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Tata Sons चेयरमैन Chandrasekaran का इस्तीफा

Tata Sons के चेयरमैन N. Chandrasekaran ने अपने मौजूदा कार्यकाल के बाद दोबारा नियुक्ति नहीं मांगने का फैसला किया है। वह 20 फरवरी 2027 तक अपने पद पर बने रहेंगे। अब टाटा ग्रुप में नए चेयरमैन की तलाश और उत्तराधिकारी को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

Neha Sharma12 अग. 2026, 07:39 PM IST
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Tata Sons चेयरमैन Chandrasekaran का इस्तीफा

मुंबई: टाटा ग्रुप में बुधवार, 12 अगस्त 2026 को बड़ा नेतृत्व बदलाव सामने आया है। Tata Sons के चेयरमैन N. Chandrasekaran ने अपने मौजूदा कार्यकाल के बाद दोबारा चेयरमैन पद के लिए नियुक्ति नहीं मांगने का फैसला किया है। उन्होंने अपना इस्तीफा बोर्ड को सौंप दिया है, लेकिन वे तत्काल पद नहीं छोड़ रहे हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक वह अपना मौजूदा कार्यकाल पूरा करेंगे, जो 20 फरवरी 2027 को समाप्त होगा। यह फैसला ऐसे समय आया है जब Tata Sons की आगामी Annual General Meeting (AGM) 18 अगस्त 2026 को होने वाली है। Chandrasekaran का मौजूदा कार्यकाल खत्म होने के बाद नए चेयरमैन की नियुक्ति टाटा ग्रुप के लिए अगला बड़ा नेतृत्व निर्णय होगा।


क्यों लिया गया यह फैसला?

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, Chandrasekaran के अगले पांच साल के कार्यकाल को लेकर Tata Sons के बोर्ड में इस साल की शुरुआत से ही सहमति नहीं बन पाई थी। Tata Trusts के दो प्रमुख ट्रस्टों की ओर से उनके पुनर्नियुक्ति का समर्थन बताया गया था, लेकिन फरवरी में बोर्ड इस मुद्दे पर सर्वसम्मति तक नहीं पहुंच सका। इसके बाद कई महीनों तक उनकी अगली नियुक्ति को लेकर अनिश्चितता बनी रही। कुछ रिपोर्टों में Tata Trusts के चेयरमैन Noel Tata के साथ मतभेद और समूह के भीतर नेतृत्व को लेकर बढ़ी खींचतान को भी Chandrasekaran के फैसले की पृष्ठभूमि से जोड़कर देखा गया है। हालांकि, इन रिपोर्टों में बताए गए आंतरिक मतभेदों को कंपनी की ओर से इस्तीफे का आधिकारिक कारण घोषित नहीं किया गया है।


लगभग एक दशक तक संभाली टाटा ग्रुप की कमान

N. Chandrasekaran ने फरवरी 2017 में Tata Sons के चेयरमैन का पद संभाला था। इससे पहले वे Tata Consultancy Services (TCS) के CEO और MD रह चुके थे। 2022 में Tata Sons के बोर्ड ने उनके चेयरमैन पद पर अगले पांच वर्षों के लिए पुनर्नियुक्ति को सर्वसम्मति से मंजूरी दी थी और उनका मौजूदा कार्यकाल 21 फरवरी 2022 से 20 फरवरी 2027 तक तय किया गया था। उनके नेतृत्व में Tata Group ने पारंपरिक कारोबारों के साथ-साथ सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा, एयरोस्पेस, डिजिटल और AI जैसे क्षेत्रों में विस्तार पर जोर दिया। Tata की अपनी रिपोर्टिंग के अनुसार, समूह ने भारत में सेमीकंडक्टर फैब, बैटरी और अन्य उन्नत विनिर्माण परियोजनाओं सहित कई बड़े निवेश आगे बढ़ाए।


One Tata’ पर रहा जोर

Chandrasekaran के कार्यकाल की प्रमुख रणनीतियों में ‘One Tata’ की अवधारणा भी रही। इसके तहत टाटा समूह की अलग-अलग कंपनियों के बीच सहयोग और तालमेल बढ़ाने पर जोर दिया गया। Tata Group के अनुसार, इस रणनीति के दौरान समूह के संयुक्त बाजार पूंजीकरण ने 2026 में ₹30 लाख करोड़ और बाद में ₹35 लाख करोड़ का स्तर पार किया था।


AI और सेमीकंडक्टर पर बड़ा दांव

Chandrasekaran के नेतृत्व में Tata Group ने AI और सेमीकंडक्टर जैसे नए क्षेत्रों में भी बड़े निवेश की रणनीति अपनाई। 2026 में Tata की ओर से बताया गया कि समूह AI को चिप से लेकर सिस्टम, डेटा सेंटर और एप्लीकेशन तक पूरे टेक्नोलॉजी स्टैक में अपनाने की दिशा में काम कर रहा है। Tata Group ने Dholera, गुजरात में सेमीकंडक्टर फैब और अन्य उन्नत विनिर्माण परियोजनाओं पर भी काम आगे बढ़ाया है। कंपनी के 2026 के चेयरमैन संदेश के अनुसार, समूह ने AI डेटा सेंटर और AI आधारित टेक्नोलॉजी में निवेश की दिशा में भी कदम बढ़ाए हैं।


शेयर बाजार पर भी असर

Chandrasekaran के फैसले का असर शेयर बाजार में भी दिखाई दिया। खबर सामने आने के बाद Tata Group की कई सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों में दबाव देखा गया। रिपोर्टों के अनुसार TCS समेत कई प्रमुख Tata stocks में गिरावट आई, क्योंकि निवेशकों के बीच समूह के भविष्य के नेतृत्व को लेकर अनिश्चितता पैदा हुई। हालांकि, बाजार विशेषज्ञों के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगले चेयरमैन के रूप में किस व्यक्ति को चुना जाता है और नेतृत्व परिवर्तन कितनी सुचारू तरीके से होता है। नए चेयरमैन की नियुक्ति समूह की भविष्य की रणनीति और निवेशकों के भरोसे के लिहाज से महत्वपूर्ण होगी।


अब किसके हाथ में होगी Tata Group की कमान?

Chandrasekaran के जाने के फैसले के बाद अब सबसे बड़ा सवाल उनके उत्तराधिकारी को लेकर है। Tata Sons की संरचना में Tata Trusts की महत्वपूर्ण भूमिका है और नए चेयरमैन के चयन में प्रमुख Tata Trusts की भूमिका अहम होगी। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार अभी तत्काल किसी उत्तराधिकारी की घोषणा नहीं हुई है। आगामी महीनों में Tata Sons के बोर्ड और प्रमुख शेयरधारकों के बीच उत्तराधिकारी के नाम पर सहमति बनाना सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया होगी। 18 अगस्त की AGM के बाद इस नेतृत्व परिवर्तन की दिशा और स्पष्ट होने की उम्मीद है।


टाटा ग्रुप के लिए आगे की चुनौती

Chandrasekaran का फैसला Tata Group के लिए केवल चेयरमैन बदलने का मामला नहीं है, बल्कि यह ऐसे समय में नेतृत्व परिवर्तन है जब समूह एयरलाइन, सेमीकंडक्टर, AI, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल और रक्षा जैसे कई बड़े क्षेत्रों में विस्तार कर रहा है। इसलिए नए चेयरमैन के सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी कि वे Chandrasekaran के दौरान शुरू की गई बड़ी परियोजनाओं को किस दिशा में आगे बढ़ाते हैं और समूह की विभिन्न कंपनियों के बीच तालमेल को कैसे बनाए रखते हैं। फिलहाल Chandrasekaran फरवरी 2027 तक अपने मौजूदा कार्यकाल में बने रहेंगे, जिससे Tata Group को उत्तराधिकारी चुनने और नेतृत्व परिवर्तन की तैयारी के लिए समय मिलेगा।