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'मिशन शक्ति' से सशक्त हो रहीं देश की महिलाएं: 4.60 करोड़ माताओं को मिले ₹21,343 करोड़, 991 वन स्टॉप सेंटरों से 15 लाख से अधिक को मिली मदद — केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी
केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना 'मिशन शक्ति' देश की महिलाओं की सुरक्षा, संरक्षा और सशक्तीकरण में क्रांतिकारी बदलाव ला रही है। कोलकाता में आयोजित महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की परामर्श समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी ने बताया कि प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY) के तहत अब तक 4.60 करोड़ से अधिक माताओं को 21,343 करोड़ रुपये से अधिक की मातृत्व सहायता राशि सीधे उनके खातों में वितरित की जा चुकी है। इसके साथ ही, देशभर में सक्रिय 991 'वन स्टॉप सेंटरों' के जरिए संकटग्रस्त और हिंसा से पीड़ित 15.20 लाख से अधिक महिलाओं को एक ही छत के नीचे तुरंत सहायता पहुंचाई गई है।

केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय से संबद्ध सांसदों की परामर्श समिति की इस बैठक में 'मिशन शक्ति' के तीन प्रमुख घटकों—वन स्टॉप सेंटर (OSC), प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY) और संकल्प: महिला सशक्तीकरण केंद्र (HEW) पर मुख्य रूप से चर्चा हुई। बैठक को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि मंत्रालय प्रधानमंत्री के "महिला नेतृत्व वाले विकास" (Women-led Development) और 'विकसित भारत' के संकल्प को साकार करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने जानकारी दी कि मिशन शक्ति के अंतर्गत दो उप-योजनाएं संचालित हैं:
* संबल उप-योजना: इसके तहत वन स्टॉप सेंटर, महिला हेल्पलाइन, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ और नारी अदालत शामिल हैं, जिसमें केंद्र सरकार राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को 100% वित्तीय सहायता देती है।
* सामर्थ्य उप-योजना: इसमें महिला सशक्तीकरण केंद्र, PMMVY, शक्ति सदन, सखी निवास और पालना शामिल हैं। इसका वित्त पोषण केंद्र और सामान्य राज्यों के बीच 60:40 तथा पूर्वोत्तर व विशेष श्रेणी राज्यों के लिए 90:10 के अनुपात में किया जाता है।
1. वन स्टॉप सेंटर (OSC): एक ही छत के नीचे 24x7 मदद
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि निर्भया कोष से संचालित वन स्टॉप सेंटर योजना के तहत देश के प्रत्येक जिले में कम से कम एक केंद्र खोलने का लक्ष्य है।
* अब तक देश में 1,033 ओएससी स्वीकृत किए जा चुके हैं, जिनमें से 991 केंद्र सफलतापूर्वक कार्यरत हैं और इनसे 15.20 लाख से अधिक महिलाओं को मदद मिली है।
* इन केंद्रों पर संकटग्रस्त महिलाओं को मेडिकल सहायता, निःशुल्क कानूनी सहायता, पुलिस सहायता, मनोवैज्ञानिक परामर्श और 5 से 20 दिनों तक का अस्थायी आश्रय उपलब्ध कराया जाता है।
* ये केंद्र सरकारी अस्पतालों के पास स्थित हैं और इनके पास 24x7 समर्पित रेस्क्यू वाहन मौजूद रहते हैं।
* सभी ओएससी को रियल-टाइम मॉनिटरिंग के लिए पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान और मिशन शक्ति डैशबोर्ड से जोड़ा गया है।
2. प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY): माताओं और बालिकाओं को आर्थिक संबल
गर्भवती और स्तनपान कराने वाली माताओं के पोषण एवं स्वास्थ्य सुधार के लिए लागू इस योजना के प्रमुख आंकड़े व सुधार:
* वित्तीय लाभ: पहले बच्चे के जन्म पर दो किस्तों में 5,000 रुपये (जननी सुरक्षा योजना सहित कुल औसतन 6,000 रुपये) और दूसरे बच्चे के रूप में बालिका (बेटी) के जन्म पर 6,000 रुपये की नकद प्रोत्साहन राशि सीधे बैंक/डाकघर खाते में दी जाती है।
* पारदर्शिता व सुधार: बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के जरिए अब तक 64.65 लाख लाभार्थियों का पारदर्शी नामांकन हुआ है। वहीं, 'ड्यू लिस्ट' पहल के माध्यम से आंगनवाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं ने घर-घर जाकर 36.42 लाख पात्र महिलाओं को योजना से जोड़ा है।
* त्वरित शिकायत निवारण: योजना में 14 दिनों के भीतर शिकायत समाधान की व्यवस्था है, जिसके तहत 87% से अधिक मामलों का निपटारा किया जा चुका है। आवेदन और भुगतान स्थिति जानने के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1515 और पोर्टल का 22.52 लाख से अधिक बार उपयोग किया गया है।
3. 'संकल्प' महिला सशक्तीकरण केंद्र (HEW): योजनाओं की सिंगल विंडो
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि महिलाओं तक सरकारी योजनाओं की जानकारी पहुंचाने और समन्वय के लिए 'संकल्प' केंद्र एक 'सिंगल विंडो' की तरह कार्य कर रहे हैं। वर्तमान में देशभर में 36 राज्य स्तरीय और 765 जिला स्तरीय महिला सशक्तीकरण केंद्र कार्यरत हैं।
सांसदों ने दिए अहम सुझाव:
बैठक में उपस्थित संसद सदस्यों—सुश्री मंजू शर्मा, सुश्री ज्योति नागनाथ वाघमरे, सुश्री माया चिंतामन और सुश्री स्वाति मालीवाल ने योजनाओं की पहुंच और वितरण व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए अपने सुझाव रखे। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर ने सांसदों के सुझावों का स्वागत करते हुए कहा कि सरकार का लक्ष्य प्रधानमंत्री के उस मार्गदर्शक सिद्धांत पर चलना है जिसके तहत विकास और सहायता का लाभ समाज की कतार में खड़े अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।
