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राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम की बड़ी कामयाबी: खुरपका-मुंहपका (FMD) के मामलों में 70% की भारी गिरावट, 8 करोड़ से अधिक किसानों को मिला सीधा लाभ
देशभर के पशुपालकों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को संबल देने के लिए शुरू किए गए 'राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम' (NADCP) के सकारात्मक और व्यापक परिणाम सामने आए हैं। सरकार द्वारा चलाए गए राष्ट्रव्यापी टीकाकरण और डिजिटल निगरानी अभियानों की बदौलत मवेशियों में खुरपका-मुंहपका रोग (FMD) के मामलों में 70 प्रतिशत तक की भारी कमी दर्ज की गई है। अब तक 147 करोड़ से अधिक टीकों की खुराक देकर 8.04 करोड़ किसानों के पशुधन को सुरक्षित किया जा चुका है।

बीमारियों के मामलों में भारी गिरावट
प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, निरंतर और व्यापक टीकाकरण से पशुओं में रोग प्रतिरोधक क्षमता (हर्ड इम्यूनिटी) मजबूत हुई है।
* वर्ष 2019 में जहां FMD के 132 मामले दर्ज किए गए थे, वहीं वर्ष 2025 तक यह संख्या घटकर मात्र 40 रह गई है।
* पिछले 3 वर्षों के दौरान देश में सीरोटाइप 'एशिया-1' से उत्पन्न FMD का एक भी मामला सामने नहीं आया है।
* वहीं, प्रजनन संबंधी गंभीर बीमारी 'ब्रुसेलोसिस' के मामलों में भी कमी आई है और यह 2019 के 22 मामलों से घटकर 2025 में 15 पर आ गए हैं।
दूध उत्पादन और उत्पादकता में ऐतिहासिक वृद्धि
रोग नियंत्रण के प्रभावी उपायों का सीधा असर देश के दुग्ध उत्पादन और गोवंशीय मवेशियों की उत्पादकता पर देखने को मिला है:
* कुल दूध उत्पादन: देश का वार्षिक दुग्ध उत्पादन 2014-15 के 146.31 मिलियन टन से 69.4% बढ़कर 2024-25 में 247.87 मिलियन टन तक पहुँच गया है।
* गोवंशीय मवेशियों की उत्पादकता: प्रति पशु औसत वार्षिक उत्पादकता 1,640 किलोग्राम से बढ़कर 2,250 किलोग्राम (36.63% की वृद्धि) हो गई है, जो विश्व स्तर पर दर्ज की गई सर्वाधिक वृद्धियों में से एक है।
* सरकार का लक्ष्य 2030 तक प्रति पशु औसत वार्षिक दूध उत्पादन को 3,000 किलोग्राम तक पहुँचाना है।
डिजिटल एकीकरण और घर-घर पशु चिकित्सा सेवाएं
* भारत पशुधन पोर्टल: देश के 39 करोड़ से अधिक मवेशियों को 12 अंकों की विशिष्ट टैग आईडी के साथ पोर्टल पर पंजीकृत किया जा चुका है, जिससे टीकों और पशु स्वास्थ्य की रियल-टाइम निगरानी संभव हुई है।
* मोबाइल वेटरनरी यूनिट्स (MVU): 29 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में 4,019 सचल पशु चिकित्सा इकाइयां टोल-फ्री नंबर 1962 के जरिए संचालित हैं। इनके माध्यम से 1.36 करोड़ किसानों के घर पर 2.76 करोड़ से अधिक मवेशियों का उपचार किया गया है।
* सक्रिय कर्मी व प्रोत्साहन: गाँव-गाँव सेवा पहुँचाने के लिए 39,810 से अधिक कृत्रिम गर्भाधान तकनीशियनों (MAITRI) को प्रशिक्षित किया गया है तथा टीकाकर्मियों को प्रति टीका कम से कम ₹3 का वित्तीय प्रोत्साहन दिया जा रहा है।
वित्तीय प्रावधान और 'वन हेल्थ' दृष्टिकोण
सरकार ने पशु स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत करने के लिए 'पशुधन स्वास्थ्य और रोग नियंत्रण कार्यक्रम' (LH&DCP) के तहत एनएडीसीपी और पशु औषधि जैसी पहलों को एकीकृत किया है।
* वित्त वर्ष 2026-27 के लिए इस कार्यक्रम का कुल बजट परिव्यय ₹2,010 करोड़ रखा गया है।
* इसके साथ ही, 'राष्ट्रीय वन हेल्थ मिशन' और $25 मिलियन की 'महामारी कोष परियोजना' के माध्यम से इंसानों, पशुओं और पर्यावरण के स्वास्थ्य को एक साथ सुरक्षित रखने की दिशा में वैज्ञानिक कदम उठाए जा रहे हैं, ताकि जूनोटिक (पशुओं से मनुष्यों में फैलने वाली) बीमारियों के जोखिम को खत्म किया जा सके।
