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महाराष्ट्र में चीनी की जमाखोरी पर सख्त एक्शन: स्टॉक लिमिट तय, 27 अगस्त से विशेष जांच अभियान शुरू
महाराष्ट्र सरकार ने चीनी की कालाबाजारी, जमाखोरी और कृत्रिम मूल्य वृद्धि को रोकने के लिए व्यापारियों, वितरकों और बड़े उपभोक्ताओं के लिए चीनी स्टॉक की सख्त सीमा तय कर दी है। केंद्र सरकार के निर्देशों के तहत खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने एक विस्तृत सर्कुलर जारी किया है, जिसके तहत 27 अगस्त से राज्य भर में चीनी के स्टॉक और बिक्री की जांच के लिए सघन अभियान शुरू कर दिया गया है। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी।

व्यापारियों और बड़े उपभोक्ताओं के लिए नई सीमाएं
* चीनी विक्रेता और वितरक: कोई भी व्यापारी या वितरक किसी भी समय 4,000 क्विंटल (400 मीट्रिक टन) से अधिक चीनी का स्टॉक नहीं रख सकेगा। इसके अलावा, स्टॉक प्राप्त होने की तारीख से 30 दिनों से अधिक समय तक चीनी को जमा करके रखने पर रोक रहेगी।
* बड़े उपभोक्ता (Bulk Consumers): उत्पादन या कच्चे माल के रूप में प्रति माह 10 मीट्रिक टन से अधिक चीनी का उपयोग करने वाले बड़े उपभोक्ताओं को स्टॉक प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर उसका उपयोग करना होगा।
* यह सभी स्टॉक सीमाएं 30 नवंबर तक प्रभावी रहेंगी।
पोर्टल पर हर शुक्रवार देना होगा स्टॉक का हिसाब
सर्कुलर के अनुसार, सभी चीनी विक्रेताओं और वितरकों को केंद्र सरकार के 'फूड स्टॉक मॉनिटरिंग पोर्टल' ([https://foodstock.dfpd.gov.in/](https://foodstock.dfpd.gov.in/)) पर तत्काल पंजीकरण करना अनिवार्य है। उन्हें अपने वर्तमान स्टॉक की जानकारी पोर्टल पर दर्ज करनी होगी और हर शुक्रवार को इसे अपडेट करना होगा। पोर्टल पर गलत या अधूरी जानकारी देना गंभीर अनियमितता माना जाएगा।
जिला स्तर पर विशेष जांच दल गठित
नियमों का कड़ाई से पालन कराने के लिए जिला स्तर पर 5 सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) बनाए गए हैं:
* अध्यक्ष: जिला आपूर्ति अधिकारी
* सदस्य: जिला उपनिबंधक (सहकारी संस्थाएं), चीनी आयुक्त कार्यालय के प्रतिनिधि, वैध मापशास्त्र (लीगल मेट्रोलॉजी) निरीक्षक और पुलिस अधीक्षक/पुलिस निरीक्षक स्तर के अधिकारी।
* मुंबई और ठाणे क्षेत्र के लिए राशनिंग नियंत्रक व नागरिक आपूर्ति निदेशक के स्तर पर विशेष टीमों का गठन किया गया है।
दुकानों और गोदामों में होगा फिजिकल वेरिफिकेशन
जांच टीमें व्यापारियों के गोदामों और व्यावसायिक परिसरों में जाकर बोरियों की वास्तविक गिनती करेंगी और उसका मिलान खरीद-बिक्री रजिस्टर और पोर्टल पर घोषित डेटा से करेंगी। बड़े उपभोक्ताओं के चीनी उपयोग की पुष्टि उनके जीएसटी (GST) रिटर्न और HSN कोड के आधार पर की जाएगी।
यदि स्टॉक में अंतर, तय सीमा से अधिक चीनी या 30/15 दिनों से ज्यादा समय तक जमाखोरी पाई जाती है, तो पंचनामा बनाकर और फोटो साक्ष्य जुटाकर आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
