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महाराष्ट्र: एससी/एसटी अत्याचार निवारण कानून के तहत दर्ज मामलों में बढ़ोतरी, 23 हजार से अधिक केस अदालतों में लंबित

महाराष्ट्र में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम (एट्रासिटी एक्ट) तथा नागरिक अधिकार संरक्षण (PCR) कानून के तहत दर्ज होने वाले मामलों में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। नागरिक अधिकार संरक्षण विभाग (नागरी हक्क संरक्षण), महाराष्ट्र राज्य द्वारा 31 जुलाई 2026 तक के जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, राज्य की विभिन्न अदालतों में इस समय 23,180 मामले लंबित हैं, जबकि 309 मामले 60 दिनों से अधिक समय से पुलिस जांच में अटके हुए हैं। आंकड़ों के मुताबिक, कोल्हापुर और नासिक परिक्षेत्र में मामलों की संख्या सबसे अधिक दर्ज की गई है।

Vinod Tiwari30 अग. 2026, 06:31 PM IST
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महाराष्ट्र: एससी/एसटी अत्याचार निवारण कानून के तहत दर्ज मामलों में बढ़ोतरी, 23 हजार से अधिक केस अदालतों में लंबित

मामलों में लगातार बढ़ोतरी:

विभाग द्वारा जारी सांख्यिकी समीक्षा के अनुसार, राज्य में साल 2021 से 2025 के बीच एट्रासिटी और नागरिक अधिकार संरक्षण कानून के मामलों में लगातार इजाफा हुआ है:

 * वर्ष 2021: 3,135 मामले

 * वर्ष 2022: 3,510 मामले

 * वर्ष 2023: 3,802 मामले

 * वर्ष 2024: 3,943 मामले

 * वर्ष 2025: 4,116 मामले

वर्ष 2026 में 31 जुलाई तक राज्यभर में कुल 2,495 मामले दर्ज किए जा चुके हैं, जो पिछले वर्ष (2025) की इसी अवधि (2,473 मामले) की तुलना में 22 मामले अधिक हैं। 31 जुलाई 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, विभिन्न क्षेत्रों में दर्ज मामलों की स्थिति इस प्रकार है:

 * कोल्हापुर: 633 मामले (पिछले वर्ष जुलाई तक 582 मामले, +51 की बढ़ोतरी)

 * छत्रपति संभाजी नगर: 409 मामले

 * नासिक: 382 मामले

 * नांदेड़: 319 मामले

 * अमरावती: 291 मामले

 * कोकण: 214 मामले

 * नागपुर: 205 मामले

 * मुंबई: 41 मामले

 * रेलवे: 1 मामला

अदालतों में 23 हजार से अधिक केस लंबित

रिपोर्ट के मुताबिक, 31 जुलाई 2026 तक कुल 23,180 मामले अदालतों में विचाराधीन (Pending) हैं। इनमें:

 * अनुसूचित जाति (SC) से संबंधित: 18,168 मामले

 * अनुसूचित जनजाति (ST) से संबंधित: 4,916 मामले

 * नागरिक अधिकार संरक्षण (PCR) एक्ट: 96 मामले

अदालतों में लंबित मामलों में सबसे ज्यादा 5,935 मामले कोल्हापुर परिक्षेत्र से हैं। इसके बाद अमरावती (3,532), नांदेड़ (3,097), नासिक (3,056), छत्रपति संभाजी नगर (2,754), कोकण (2,158), नागपुर (2,194) और मुंबई (334) का नंबर आता है। नियमों के अनुसार तय समयसीमा में जांच पूरी करने के प्रावधान के बावजूद, राज्य में कुल 309 मामले 60 दिनों से अधिक समय से पुलिस जांच में लंबित हैं।

 * इनमें से 51 मामले तो 5 वर्ष से अधिक समय से अटके हुए हैं।

 * सबसे अधिक जांच पेंडेंसी कोकण (62 मामले), छत्रपति संभाजी नगर (55 मामले), नासिक (50 मामले), मुंबई (41 मामले) और अमरावती (41 मामले) में दर्ज की गई है।

जागरूकता और शांति के लिए उठाए जा रहे कदम

कानून के प्रभावी क्रियान्वयन और दोषसिद्धि (Conviction Rate) का प्रतिशत बढ़ाने के लिए नागरिक अधिकार संरक्षण विभाग द्वारा पुलिस स्तर पर नियमित कार्यशालाओं का आयोजन किया जा रहा है।

 * पुलिस कार्यशालाएं: वर्ष 2021 से जुलाई 2026 तक कुल 6,422 कार्यशालाएं आयोजित की जा चुकी हैं (वर्ष 2026 में जुलाई तक 697 कार्यशालाएं)।

 * जातीय सद्भाव बैठकें (जातीय सलोखा बैठक): घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने और सामाजिक शांति बनाए रखने के लिए इस अवधि में 4,153 से अधिक जातीय सद्भाव बैठकें आयोजित की गईं (वर्ष 2026 में जुलाई तक 447 बैठकें)। वर्तमान में मुंबई, ठाणे, पुणे, छत्रपति संभाजी नगर, नासिक और नागपुर में विशेष एक्सक्लूसिव अदालतें (Exclusive Special Courts) कार्यरत हैं, जबकि शेष जिलों में सत्र अदालतें विशेष अदालत के रूप में सुनवाई कर रही हैं।