महिला-सुरक्षा
कल्याण कोर्ट में 'AirDrop स्कैंडल', महिला वकीलों के निजी डेटा तक पहुंच के आरोप में अधिवक्ता हिरासत में
कल्याण कोर्ट में महिला अधिवक्ताओं की निजता से जुड़े कथित AirDrop स्कैंडल ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 21 महिला वकीलों की शिकायत के बाद एक अधिवक्ता को हिरासत में लिया गया है। आरोप है कि उसने AirDrop के जरिए उनके निजी फोटो और डेटा तक पहुंचने की कोशिश की। पुलिस मामले की जांच कर रही है और जब्त मोबाइल की फॉरेंसिक जांच कराई जाएगी।
Sonali18 जुल. 2026, 07:09 PM IST

महाराष्ट्र के ठाणे जिले के कल्याण कोर्ट परिसर में एक सनसनीखेज घटना सामने आई है, जहां एक वकील पर iPhone के AirDrop फीचर का कथित दुरुपयोग कर महिला वकीलों के निजी फोटो और अन्य डिजिटल डेटा अपने मोबाइल में प्राप्त करने का आरोप लगा है। मामले का खुलासा होने के बाद कोर्ट परिसर में हंगामा मच गया और आरोपी वकील की कुछ महिला अधिवक्ताओं ने पिटाई कर दी। बाद में उसे महात्मा फुले चौक पुलिस के हवाले कर दिया गया। घटना की जांच जारी है।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार आरोपी की पहचान महेश जाधव के रूप में हुई है। आरोप है कि वह कोर्ट परिसर में मौजूद महिला वकीलों के iPhone पर AirDrop के माध्यम से फाइलें प्राप्त करने की कोशिश कर रहा था। एक महिला अधिवक्ता को मोबाइल पर संदिग्ध AirDrop अनुरोध दिखाई देने के बाद उसे शक हुआ। इसके बाद अन्य महिला वकीलों ने आरोपी को पकड़ लिया और उसके मोबाइल की जांच की, जिसमें कथित रूप से कई महिलाओं के निजी फोटो और डिजिटल सामग्री मिलने का दावा किया गया। इस दौरान कोर्ट परिसर में तनाव की स्थिति बन गई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए महिला अधिवक्ताओं ने आरोपी को सीधे कल्याण जिला एवं सत्र न्यायालय के प्रधान जिला न्यायाधीश के समक्ष पेश किया। न्यायालय के निर्देश पर महात्मा फुले चौक पुलिस मौके पर पहुंची और आरोपी को हिरासत में लेकर थाने ले गई। पुलिस ने आरोपी का मोबाइल फोन जब्त कर लिया है और उसे डिजिटल फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, इस मामले में अब तक 21 महिला अधिवक्ताओं ने शिकायत दर्ज कराई है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि आरोपी ने केवल एक-दो नहीं बल्कि कई महिला वकीलों के iPhone से AirDrop के माध्यम से निजी फोटो और अन्य डिजिटल डेटा अपने मोबाइल में प्राप्त किए। जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि क्या आरोपी ने अन्य लोगों का भी डेटा इसी तरीके से हासिल किया था और उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जा रहा था।
पुलिस अब यह जांच कर रही है कि आरोपी के मोबाइल में मौजूद फोटो और अन्य डिजिटल सामग्री किस प्रकार प्राप्त हुई। फोरेंसिक जांच के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि AirDrop का कथित दुरुपयोग किया गया था या नहीं, कितने लोगों का डेटा प्रभावित हुआ और क्या सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) तथा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराएं इस मामले में लागू होती हैं। जांच पूरी होने के बाद पुलिस आगे की कानूनी कार्रवाई करेगी।
घटना के बाद कल्याण कोर्ट परिसर में अधिवक्ताओं के बीच डिजिटल सुरक्षा और निजता को लेकर गंभीर चिंता जताई जा रही है। महिला अधिवक्ताओं ने कहा कि न्यायालय जैसे संवेदनशील परिसर में इस प्रकार की घटना बेहद गंभीर है और इससे अधिवक्ताओं की सुरक्षा तथा गोपनीयता पर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने दोषी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
विशेषज्ञ की प्रतिक्रिया:
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि AirDrop एक सुरक्षित फाइल शेयरिंग सुविधा है, लेकिन यदि इसकी सेटिंग "Everyone" या "Everyone for 10 Minutes" पर हो और उपयोगकर्ता बिना सावधानी के किसी अनुरोध को स्वीकार कर ले, तो गोपनीयता से जुड़े जोखिम पैदा हो सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, सार्वजनिक स्थानों पर AirDrop की सेटिंग "Contacts Only" या "Receiving Off" रखनी चाहिए तथा किसी भी संदिग्ध फाइल अनुरोध को स्वीकार नहीं करना चाहिए। यदि किसी के निजी डेटा के दुरुपयोग की आशंका हो तो तत्काल पुलिस और साइबर सेल को सूचना देनी चाहिए।
पुलिस ने फिलहाल मामले की जांच जारी होने की बात कही है। अधिकारियों का कहना है कि आरोपी के खिलाफ दर्ज शिकायतों, डिजिटल साक्ष्यों और फोरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं, महिला अधिवक्ताओं द्वारा लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
