महिला-सुरक्षा

: पहली डिलीवरी में जुड़वां बच्चे होने पर दूसरी बार मातृत्व अवकाश नहीं रोका जा सकता: तेलंगाना हाईकोर्ट

महिला कर्मचारियों के मातृत्व अधिकारों पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए तेलंगाना हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि पहली गर्भावस्था में जुड़वां बच्चों का जन्म होने का अर्थ यह नहीं है कि दूसरी गर्भावस्था में मातृत्व अवकाश का अधिकार समाप्त हो जाएगा। अदालत ने कहा कि जुड़वां बच्चों का जन्म एक ही प्रसव माना जाएगा और इसके आधार पर मातृत्व अवकाश से इनकार करना कानून की मंशा के विपरीत है।

Sonali21 जुल. 2026, 07:08 PM IST
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: पहली डिलीवरी में जुड़वां बच्चे होने पर दूसरी बार मातृत्व अवकाश नहीं रोका जा सकता: तेलंगाना हाईकोर्ट
तेलंगाना हाईकोर्ट ने 15 जुलाई 2026 को महिला कर्मचारियों के मातृत्व अधिकारों को मजबूत करते हुए एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। न्यायमूर्ति के. शरत (Justice K. Sarath) की एकलपीठ ने कहा कि यदि किसी महिला ने पहली गर्भावस्था में जुड़वां बच्चों को जन्म दिया है, तो केवल इस आधार पर दूसरी गर्भावस्था में उसे मातृत्व अवकाश (Maternity Leave) से वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि जुड़वां बच्चों का जन्म एक ही प्रसव (Single Delivery) माना जाएगा, न कि दो अलग-अलग प्रसव।

यह आदेश सरकारी जूनियर अंग्रेजी व्याख्याता जादी स्वरूपा रानी (Jadi Swarupa Rani) द्वारा दायर रिट याचिका पर पारित किया गया। याचिकाकर्ता तेलंगाना सोशल वेलफेयर रेजिडेंशियल एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस सोसाइटी (TSWREIS) के गर्ल्स जूनियर कॉलेज, बेल्लमपल्ली (मंचेरियल) में कार्यरत हैं।
मामले के अनुसार, याचिकाकर्ता की नियुक्ति 27 सितंबर 2019 को हुई थी। उन्होंने 9 नवंबर 2023 को अपनी पहली गर्भावस्था में जुड़वां बच्चों को जन्म दिया, जिसके लिए उन्हें 180 दिनों का मातृत्व अवकाश प्रदान किया गया। इसके बाद दूसरी गर्भावस्था में उन्होंने 14 अप्रैल 2026 को तीसरे बच्चे को जन्म दिया और पुनः 180 दिनों के मातृत्व अवकाश के लिए आवेदन किया।

हालांकि, संबंधित अधिकारियों ने उनका आवेदन यह कहते हुए खारिज कर दिया कि उनके पहले से दो जीवित बच्चे हैं, इसलिए राज्य सरकार के "दो जीवित बच्चों" संबंधी नियम के तहत उन्हें दूसरी बार मातृत्व अवकाश का लाभ नहीं दिया जा सकता। इसके बाद उन्होंने तेलंगाना हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति के. शरत ने कहा कि मातृत्व अवकाश एक कल्याणकारी और संवैधानिक अधिकार है, जिसका उद्देश्य महिला और नवजात शिशु के स्वास्थ्य की रक्षा करना है। अदालत ने कहा कि यदि पहली गर्भावस्था में जुड़वां बच्चों के जन्म को दो अलग-अलग प्रसव मान लिया जाए, तो इससे मातृत्व लाभ कानून का उद्देश्य ही विफल हो जाएगा। इसलिए नियमों की उदार और उद्देश्यपूर्ण व्याख्या की जानी चाहिए।

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण निर्णय Deepika Singh v. Central Administrative Tribunal (2022) सहित विभिन्न उच्च न्यायालयों के निर्णयों का भी उल्लेख किया और कहा कि मातृत्व लाभ संबंधी कानूनों की व्याख्या महिलाओं के अधिकारों और सामाजिक कल्याण को ध्यान में रखकर की जानी चाहिए।
अंततः अदालत ने राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को 14 अप्रैल 2026 से 11 अक्टूबर 2026 तक 180 दिनों का मातृत्व अवकाश, पूर्ण वेतन, भत्ते तथा सभी सेवा लाभ प्रदान किए जाएं। हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पहली गर्भावस्था में जुड़वां बच्चों का जन्म भविष्य में मातृत्व अवकाश से वंचित करने का आधार नहीं बनाया जा सकता।