महिला-सुरक्षा
7वें अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय, सूरत का सख्त संदेश: यौन उत्पीड़न मामले में दोषी की सजा बरकरार, महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर चाहिए कड़ा रुख
यौन उत्पीड़न के एक मामले में दोषी की जेल की सजा को बरकरार रखते हुए अदालत ने स्पष्ट किया कि महिलाओं के खिलाफ होने वाले यौन अपराधों पर कठोर रुख अपनाना समय की आवश्यकता है। न्यायालय ने कहा कि ऐसे मामलों में सख्त सजा न केवल पीड़ित को न्याय दिलाती है, बल्कि समाज में कानून का प्रभावी और निवारक संदेश भी देती है।
Sonali21 जुल. 2026, 07:09 PM IST

गुजरात के सूरत की एक अदालत ने यौन उत्पीड़न के एक मामले में दोषी की सजा को बरकरार रखते हुए कहा कि महिलाओं के खिलाफ होने वाले यौन अपराधों के मामलों में न्यायालयों को और अधिक सख्त रुख अपनाने की आवश्यकता है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि इस प्रकार के अपराध केवल पीड़िता के सम्मान और गरिमा पर हमला नहीं हैं, बल्कि पूरे समाज के नैतिक ढांचे को प्रभावित करते हैं। इसलिए ऐसे मामलों में दंड का उद्देश्य केवल आरोपी को सजा देना नहीं, बल्कि समाज में निवारक संदेश देना भी है।
अदालत ने कहा कि यौन उत्पीड़न के मामलों में पीड़िता की गवाही, परिस्थितिजन्य साक्ष्य और उपलब्ध अन्य प्रमाणों का समग्र रूप से मूल्यांकन किया जाना चाहिए। यदि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में सफल रहता है तो केवल सहानुभूति के आधार पर सजा में राहत नहीं दी जा सकती।
मामले की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दोषी की सजा कम करने की मांग की थी। हालांकि अदालत ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया और कहा कि अपराध की प्रकृति, पीड़िता पर उसके मानसिक प्रभाव तथा समाज में बढ़ते यौन अपराधों को देखते हुए कठोर दंड आवश्यक है। अदालत ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना न्याय व्यवस्था की प्राथमिक जिम्मेदारी है और ऐसे अपराधों के प्रति किसी भी प्रकार की उदारता न्याय के उद्देश्य को कमजोर करेगी।
अदालत ने अपने फैसले में यह भी कहा कि यौन उत्पीड़न के मामलों में न्यायपालिका का दायित्व केवल विवाद का निस्तारण करना नहीं, बल्कि समाज में कानून के प्रति विश्वास बनाए रखना भी है। इसलिए ऐसे मामलों में न्यायालयों को स्पष्ट और कड़ा संदेश देना चाहिए कि महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा से समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
यह फैसला ऐसे समय आया है जब देशभर में महिलाओं के खिलाफ अपराधों को लेकर लगातार चिंता जताई जा रही है। विभिन्न न्यायालय भी अपने हालिया फैसलों में इस बात पर जोर देते रहे हैं कि यौन अपराधों के मामलों में त्वरित सुनवाई और प्रभावी दंड व्यवस्था आवश्यक है, ताकि पीड़ितों का न्याय व्यवस्था पर विश्वास बना रहे।
