महिला-सुरक्षा

सहारनपुर में कोर्ट के आदेश पर सिपाही समेत 6 लोगों के खिलाफ FIR, महिला ने लगाए जालसाजी और धमकी के गंभीर आरोप

करीब दो महीने तक कार्रवाई का इंतजार करने के बाद महिला को अदालत की शरण लेनी पड़ी। कोर्ट के आदेश पर सिपाही समेत छह आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज होने से मामला चर्चा में आ गया।

Sonali21 जुल. 2026, 07:09 PM IST
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सहारनपुर में कोर्ट के आदेश पर सिपाही समेत 6 लोगों के खिलाफ FIR, महिला ने लगाए जालसाजी और धमकी के गंभीर आरोप
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में एक महिला की शिकायत पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) के आदेश के बाद मिर्जापुर थाने में एक सिपाही समेत छह लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। महिला का आरोप है कि उसके साथ मारपीट, अभद्रता, जातिसूचक गालियां, धमकी और लूटपाट की गई। इतना ही नहीं, जब वह शिकायत लेकर थाने पहुंची तो वहां भी उसकी रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई।

जानकारी के अनुसार, मिर्जापुर थाना क्षेत्र के बादशाही बाग गांव निवासी 39 वर्षीय ममता ने अपनी शिकायत में बताया कि 2 मई 2026 को गांव के रवि, उसके पिता सतवीर, मां शकुंतला, भाई संजू और मामा अनिल के साथ उसका विवाद हुआ। आरोप है कि इस दौरान सभी ने मिलकर उसके साथ मारपीट की, जातिसूचक शब्द कहे, अभद्र व्यवहार किया, उसका मोबाइल फोन तोड़ दिया और कान से सोने की बाली छीन ली। महिला ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपियों ने उसे जान से मारने की धमकी दी।

पीड़िता का कहना है कि घटना के तुरंत बाद वह घायल अवस्था में मिर्जापुर थाने पहुंची। वहां तैनात सिपाही विपिन गहलोत और एक महिला कांस्टेबल को उसने पूरी घटना बताई, लेकिन उसकी एफआईआर दर्ज करने के बजाय उसके साथ अभद्र व्यवहार किया गया। महिला का आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने उसका मेडिकल परीक्षण कराने से भी इनकार किया और कहीं भी शिकायत दर्ज न होने देने की धमकी दी।

महिला के अनुसार, स्थानीय पुलिस से राहत नहीं मिलने पर उसने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) से भी शिकायत की, लेकिन वहां से भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उसने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 173(4) के तहत मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, सहारनपुर की अदालत में प्रार्थना पत्र दाखिल किया और पुलिस को मुकदमा दर्ज करने का निर्देश देने की मांग की।

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने उपलब्ध तथ्यों का अवलोकन किया और प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध बनता हुआ पाए जाने पर मिर्जापुर थाना पुलिस को एफआईआर दर्ज कर विधि के अनुसार जांच करने का आदेश दिया। न्यायालय के आदेश के अनुपालन में पुलिस ने सिपाही विपिन गहलोत समेत छह लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है।

महिला ने अपनी याचिका में यह भी दावा किया है कि मुख्य आरोपी रवि उसके साथ कथित दुष्कर्म के एक पुराने मामले में करीब एक वर्ष तक जेल में रह चुका है। उसके अनुसार, जेल से रिहा होने के बाद आरोपी और उसके परिजन लगातार उसे परेशान कर रहे हैं। हालांकि, इस दावे की पुष्टि पुलिस जांच और न्यायिक रिकॉर्ड के आधार पर ही होगी।

एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामले की विवेचना शुरू कर दी है। जांच अधिकारी घटनास्थल का निरीक्षण करेंगे, दोनों पक्षों के बयान दर्ज करेंगे और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई करेंगे। पुलिस का कहना है कि जांच निष्पक्ष तरीके से की जाएगी और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसी के अनुरूप कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

कानूनी जानकारों के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति की शिकायत पर पुलिस एफआईआर दर्ज नहीं करती है, तो पीड़ित मजिस्ट्रेट के समक्ष आवेदन प्रस्तुत कर सकता है। यदि अदालत को प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध प्रतीत होता है, तो वह पुलिस को एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष जांच करने का आदेश दे सकती है। इसी कानूनी प्रक्रिया के तहत इस मामले में भी अदालत के आदेश के बाद मुकदमा दर्ज किया गया।
फिलहाल यह मामला जांच के चरण में है। एफआईआर दर्ज होना आरोप सिद्ध होने के समान नहीं है। सभी आरोपों की सत्यता का निर्धारण पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा।