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OBC क्रीमी लेयर पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित, केंद्र ने फैसले को भविष्य से लागू करने की मांग की
OBC क्रीमी लेयर के निर्धारण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार की याचिका पर गुरुवार, 24 सितंबर 2026 को सुनवाई हुई। केंद्र ने 11 मार्च के फैसले को पिछली भर्तियों और दाखिलों पर लागू करने से होने वाले प्रभावों को देखते हुए इसके प्रभाव को भविष्य तक सीमित रखने की मांग की है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।

सुप्रीम कोर्ट ने अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के क्रीमी लेयर निर्धारण से जुड़े अपने 11 मार्च के फैसले के प्रभाव को लेकर केंद्र सरकार की ओर से दायर आवेदन पर गुरुवार को सुनवाई की। न्यायमूर्ति पामिदिघंतम श्री नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने मामले की सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि OBC उम्मीदवार की क्रीमी लेयर स्थिति केवल उसके माता-पिता की वेतन आय के आधार पर तय नहीं की जा सकती। इसके लिए माता-पिता द्वारा धारण किए गए पद की श्रेणी और उससे जुड़े अन्य प्रासंगिक पहलुओं को भी ध्यान में रखना होगा। केंद्र सरकार ने इस फैसले के संभावित पूर्वव्यापी प्रभाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। केंद्र की ओर से आशंका जताई गई है कि यदि फैसले को पहले से पूरी हो चुकी भर्तियों और दाखिलों पर लागू किया गया, तो इससे कई नियुक्तियां और प्रवेश प्रभावित हो सकते हैं। केंद्र ने अपनी याचिका में बताया है कि केंद्र सरकार के साथ-साथ 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पहले ही भर्तियां और दाखिले किए जा चुके हैं। इन प्रक्रियाओं में उस समय लागू नियमों और OBC-NCL प्रमाणपत्रों के आधार पर पात्रता निर्धारित की गई थी।
केंद्र का कहना है कि पात्रता के बदले हुए मानदंड को पिछली नियुक्तियों या दाखिलों पर लागू करने से पहले से किए गए चयन और नियुक्तियां प्रभावित हो सकती हैं। इससे OBC-NCL स्थिति, वरिष्ठता, सेवा शर्तों और कर्मचारियों की करियर प्रगति को लेकर भी अनिश्चितता पैदा हो सकती है। इसी तरह केंद्रीय और राज्य शैक्षणिक संस्थानों, विश्वविद्यालयों तथा व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में किए गए दाखिलों पर भी इसका असर पड़ने की आशंका केंद्र ने जताई है। केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से फैसले के समयगत प्रभाव को स्पष्ट करने का अनुरोध किया है, ताकि पहले से पूरी हो चुकी चयन प्रक्रियाओं, नियुक्तियों और दाखिलों तथा उनसे जुड़े अधिकारों को प्रभावित होने से बचाया जा सके। अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा सुरक्षित रखे गए फैसले में यह स्पष्ट हो सकता है कि 11 मार्च के निर्णय का प्रभाव पहले से पूरी हो चुकी भर्तियों और दाखिलों पर किस सीमा तक पड़ेगा।
