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NEET-UG 2026: अकेले छात्र की आपत्ति पर Answer Key को एक्सपर्ट के पास नहीं भेजा जा सकता, इलाहाबाद HC ने याचिका खारिज की

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने NEET-UG 2026 की Answer Key को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि केवल एक अभ्यर्थी की आपत्ति के आधार पर विवादित प्रश्नों को विशेषज्ञ के पास नहीं भेजा जा सकता, जब तक अदालत के सामने विशेषज्ञ राय की जरूरत को उचित ठहराने वाले पर्याप्त तथ्य मौजूद न हों।

Sonali26 सित. 2026, 03:08 PM IST
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NEET-UG 2026: अकेले छात्र की आपत्ति पर Answer Key को एक्सपर्ट के पास नहीं भेजा जा सकता, इलाहाबाद HC ने याचिका खारिज की

प्रयागराज।

 इलाहाबाद हाईकोर्ट ने NEET-UG 2026 की Answer Key को चुनौती देने वाले एक अभ्यर्थी की याचिका खारिज करते हुए कहा कि विवादित परीक्षा प्रश्नों और उनके उत्तर विकल्पों को विशेषज्ञ के पास तभी भेजा जा सकता है, जब अदालत के सामने ऐसे तथ्य मौजूद हों जो विशेषज्ञ राय लेने की आवश्यकता को उचित ठहराते हों। कोर्ट ने कहा कि केवल एक अभ्यर्थी द्वारा उठाई गई आपत्ति, जिसे National Testing Agency (NTA) पहले ही जांचकर खारिज कर चुकी है और जिस पर किसी अन्य अभ्यर्थी ने आपत्ति नहीं जताई, हस्तक्षेप का आधार नहीं बन सकती। न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा और न्यायमूर्ति सत्यवीर सिंह की खंडपीठ ने यह टिप्पणी Nitin Mishra v. Union of India मामले में की। याचिकाकर्ता ने NEET-UG 2026 में पूछे गए प्रश्न संख्या 60 और 70 की Answer Key को चुनौती दी थी। उसके अनुसार एक प्रश्न शून्य-क्रम अभिक्रिया से संबंधित था, जबकि दूसरा ऑक्सीजन की प्रथम आयनीकरण एन्थैल्पी से जुड़े Assertion-Reason प्रश्न पर आधारित था। याचिकाकर्ता का कहना था कि यही प्रश्न इससे पहले 2019 और 2022 की Joint Entrance Examination (Mains) में भी पूछे गए थे, लेकिन उन परीक्षाओं में इनके उत्तर अलग दिए गए थे। उसने दावा किया कि उसने उन्हीं आधारों पर संबंधित उत्तर दिए थे और Answer Key में दिए गए उत्तरों पर आपत्ति की थी।

NTA ने आपत्ति की जांच के बाद Answer Key को सही माना

सुनवाई के दौरान NTA की ओर से कहा गया कि अभ्यर्थी ने Answer Key पर आपत्ति दर्ज कराई थी, जिसे एजेंसी ने जांचने के बाद खारिज कर दिया और संबंधित Answer Keys को सही माना। कोर्ट ने यह भी रिकॉर्ड किया कि याचिकाकर्ता संभवतः उन बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों में अकेला था, जिसने इन दोनों प्रश्नों के उत्तरों पर आपत्ति जताई थी। अदालत ने शुरुआत में मामले की आगे जांच करने की आवश्यकता नहीं समझी, लेकिन याचिकाकर्ता के वकील के आग्रह पर इस मुद्दे पर विस्तार से विचार किया। याचिकाकर्ता की ओर से सुप्रीम कोर्ट के Vanshika Yadav v. Union of India मामले का हवाला दिया गया, जिसमें एक प्रश्न के सही उत्तर का निर्धारण करने के लिए IIT दिल्ली के निदेशक को तीन विशेषज्ञों की टीम गठित करने को कहा गया था। उनका तर्क था कि अदालत के पास किसी प्रश्न और उसके विकल्पों को विशेषज्ञ राय के लिए भेजने की असाधारण शक्ति मौजूद है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का किया उल्लेख

वहीं NTA की ओर से UPPSC v. Rahul Singh मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित सिद्धांतों का हवाला दिया गया। इसमें कहा गया था कि Answer Key की शुद्धता के संबंध में सामान्यतः परीक्षा प्राधिकरण के उत्तर को प्राथमिकता दी जानी चाहिए और शैक्षणिक मामलों में अदालतों को विशेषज्ञों की भूमिका में जाकर उत्तरों की जांच नहीं करनी चाहिए। संदेह की स्थिति में भी परीक्षा प्राधिकरण को लाभ दिया जाना चाहिए। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने Rahul Singh और Vanshika Yadav दोनों फैसलों को साथ पढ़ते हुए कहा कि विशेषज्ञ के पास प्रश्न भेजने से पहले अदालत के सामने ऐसे तथ्य होने चाहिए जो इस तरह के संदर्भ को उचित ठहराएं। कोर्ट ने कहा कि Vanshika Yadav मामले में परिस्थितियां अलग थीं। वहां NTA ने स्वयं अभ्यर्थियों की आपत्तियों पर विचार करते हुए दो विकल्पों को सही माना था और चार अंक देने का निर्णय लिया था। इसके विपरीत वर्तमान मामले में एक अभ्यर्थी ने आपत्ति उठाई, जिसे NTA ने खारिज कर दिया और किसी अन्य अभ्यर्थी ने समान आपत्ति नहीं उठाई। पीठ ने कहा कि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर इस मामले में हस्तक्षेप या प्रश्नों को विशेषज्ञ के पास भेजने की आवश्यकता नहीं बनती। इसके बाद अदालत ने याचिका खारिज कर दी।

मामले का नाम Nitin Mishra v. Union of India And 6 Others है