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जम्मू कश्मीर के कठुआ में कहासुनी के बाद खूनी फायरिंग CISF जवान ने साथियों पर गोली चलाई, 4 की मौत

जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले के बसोहली इलाके में Sewa Hydel Project की सुरक्षा में तैनात CISF कैंप में मंगलवार शाम फायरिंग की घटना हुई। इसमें असिस्टेंट कमांडेंट समेत चार CISF जवानों की मौत हो गई। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, सहकर्मियों के बीच विवाद के बाद फायरिंग हुई। आरोपी हेड कांस्टेबल को हिरासत में ले लिया गया है और घटना की जांच जारी है।

Kashish Rai30 सित. 2026, 02:23 PM IST
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जम्मू कश्मीर के कठुआ में कहासुनी के बाद खूनी फायरिंग  CISF जवान ने साथियों पर गोली चलाई, 4 की मौत

जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में मंगलवार शाम CISF कैंप के अंदर फायरिंग की घटना से हड़कंप मच गया। यह घटना बसोहली इलाके के माश्का गांव स्थित सेवा हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट की सुरक्षा में तैनात CISF यूनिट के कैंप में हुई। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, ड्यूटी बदलने के दौरान कुछ जवानों के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी हुई थी। इसके बाद CISF के एक हेड कांस्टेबल ने कथित तौर पर अपनी सर्विस राइफल से साथियों पर फायरिंग कर दी। फायरिंग में चार CISF कर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए। सभी को तत्काल इलाज के लिए हिमाचल प्रदेश स्थित NHPC अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। मृतकों में असिस्टेंट कमांडेंट अंकित कुमार पांडेय, सब-इंस्पेक्टर लक्ष्मण सिंह और कांस्टेबल रफीक अहमद व संजीव कुमार शामिल हैं।


घटना के बाद कैंप में मौजूद अन्य जवानों ने आरोपी कर्मी को काबू कर लिया। बाद में उसे पुलिस के हवाले कर दिया गया। सूचना मिलते ही पुलिस टीम भी मौके पर पहुंची और घटना की जांच शुरू की। फिलहाल फायरिंग की असली वजह स्पष्ट नहीं है। अधिकारियों का कहना है कि कहासुनी किस बात को लेकर हुई और उसके बाद फायरिंग की स्थिति कैसे बनी, इसकी जांच की जा रही है। CISF मुख्यालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए Court of Inquiry के आदेश दिए हैं। CISF के वरिष्ठ अधिकारी भी पूरी घटना की निगरानी कर रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद ही फायरिंग के पीछे की वास्तविक वजह और घटना से जुड़े अन्य तथ्यों की पूरी जानकारी सामने आ सकेगी।


यह घटना सुरक्षा बलों के बीच आपसी फायरिंग के मामलों को लेकर भी चिंता बढ़ाती है। गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2021 से 2025 के बीच सुरक्षा बलों में आपसी फायरिंग की घटनाओं में 24 जवानों की मौत हुई। कठुआ की घटना की जांच के साथ यह भी देखा जाएगा कि फायरिंग से पहले जवानों के बीच किस तरह का विवाद हुआ था और ऐसी घटना को रोकने के लिए मौजूद सुरक्षा व्यवस्था कितनी प्रभावी थी।