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दिल्ली IGI एयरपोर्ट पर ड्रोन तस्करी का खुलासा, 1.03 करोड़ का सामान जब्त; जांच में प्रोफेशनल ग्रेड UAV मिले
दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर कस्टम अधिकारियों ने तीन भारतीय यात्रियों के सामान से बड़ी संख्या में ड्रोन और उनके पार्ट्स बरामद किए। जब्त सामान की कुल कीमत करीब 1.03 करोड़ रुपये बताई गई है। तकनीकी जांच में ड्रोन में थर्मल इमेजिंग और लेजर रेंज फाइंडर जैसी सुविधाएं होने की बात सामने आई है। कस्टम विभाग अब सामान के मालिक और इसे भारत लाने के मकसद की जांच कर रहा है।

दिल्ली के IGI एयरपोर्ट पर कस्टम विभाग ने 25 सितंबर 2026 को ड्रोन और उनके पार्ट्स की कथित तस्करी के मामले का खुलासा किया। हांगकांग से वियतनाम होते हुए दिल्ली पहुंचे तीन भारतीय यात्रियों को जांच के लिए रोका गया। ये यात्री VN593 और VN981 फ्लाइट से इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंचे थे। सामान की तलाशी के दौरान कस्टम अधिकारियों को बड़ी संख्या में ड्रोन से जुड़े उपकरण मिले। बरामद सामान में Autel Robotics MDX-1 ड्रोन, 11 रिमोट कंट्रोलर, 10 AC/DC एडाप्टर, 10 USB चार्जर और 20 डेटा केबल शामिल हैं। इसके अलावा 10 रिमोट कंट्रोल लैनयार्ड, 60 प्रोपेलर, 10 कैमरा गिंबल, 20 एंटीना और 40 जॉयस्टिक भी बरामद किए गए।
तलाशी के दौरान 1 Autel ESC PCBA और 4 प्लास्टिक आर्म्स समेत ड्रोन से जुड़े अन्य पार्ट्स भी मिले। यात्रियों के सामान से iPhone 18 Pro Max 512GB भी बरामद किया गया। कस्टम विभाग के अनुसार, जब्त किए गए सामान की कुल बाजार कीमत 1 करोड़ 3 लाख 55 हजार 900 रुपये आंकी गई है। बरामद ड्रोन की तकनीकी क्षमता की जांच के लिए कस्टम विभाग ने एक चार्टर्ड इंजीनियर की मदद ली। जांच में ड्रोन में थर्मल इमेजिंग और लेजर रेंज फाइंडर जैसी तकनीक मौजूद होने की बात सामने आई। तकनीकी रिपोर्ट के मुताबिक, इनकी क्षमता सामान्य उपभोक्ता ड्रोन से अलग बताई गई है और इन्हें प्रोफेशनल/डिफेंस ग्रेड UAV की श्रेणी में रखा गया है।
कस्टम अधिकारियों ने सामान को कस्टम एक्ट, 1962 की धारा 110(1) के तहत जब्त कर लिया है। विभाग अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि इतनी बड़ी संख्या में प्रोफेशनल ड्रोन और उनके पार्ट्स भारत क्यों लाए जा रहे थे। पूछताछ में एक यात्री ने कथित तौर पर बताया कि वह यह सामान अपने एक दोस्त के लिए लेकर आया था और सामान का असली मालिक उसका दोस्त है। कस्टम की जांच में सामान को बिना घोषित किए और कस्टम ड्यूटी का भुगतान किए बिना भारत लाने की बात भी सामने आई है।
अब कस्टम विभाग सामान के कथित असली मालिक, उसकी खरीद, भुगतान और भारत लाने के उद्देश्य की जांच कर रहा है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इन ड्रोन और पार्ट्स का इस्तेमाल किस उद्देश्य के लिए किया जाना था। मामले में आगे की जांच जारी है।
