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AI के दौर में Cyber Security जरूरी, अक्टूबर में चलेगा खास जागरूकता अभियान

नई दिल्ली: AI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ Deepfake, Online Fraud और Cyber Crime जैसे खतरे भी बढ़ रहे हैं। इसी को देखते हुए अक्टूबर में Cybersecurity Awareness Month के तहत लोगों को साइबर सुरक्षा और AI से जुड़े खतरों के बारे में जागरूक किया जा रहा है। इस अभियान में AI से होने वाले साइबर अपराध, Deepfake, डिजिटल फ्रॉड और ऑनलाइन सुरक्षा जैसे मुद्दों पर जानकारी दी जाएगी।

Neha Sharma01 अक्टू. 2026, 07:04 PM IST
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AI के दौर में Cyber Security जरूरी, अक्टूबर में चलेगा खास जागरूकता अभियान

नई दिल्ली: Artificial Intelligence यानी AI के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर अपराध और ऑनलाइन धोखाधड़ी के नए तरीके भी सामने आ रहे हैं। इसी को देखते हुए अक्टूबर महीने में Cybersecurity Awareness Month के तहत भारत में साइबर सुरक्षा और AI से जुड़े खतरों को लेकर जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।


AI और Cybersecurity पर 31 दिन की पहल

Centre for Police Technology (CPT) ने 1 अक्टूबर से “31 Days | 31 Key Topics” नाम से एक महीने की पहल शुरू की है। इसमें AI से जुड़ी सुरक्षा, साइबर अपराध की जांच, डिजिटल फॉरेंसिक, तकनीक से जुड़े कानून और नए ऑनलाइन खतरों जैसे विषयों पर जानकारी साझा की जाएगी। इस पहल का एक प्रमुख विषय AI-powered cybersecurity है। यानी AI का इस्तेमाल सिर्फ साइबर अपराध करने के लिए नहीं, बल्कि साइबर हमलों को पहचानने और उनसे बचाव के लिए भी किया जा सकता है।


AI से बढ़ रहे नए साइबर खतरे

AI की मदद से फर्जी तस्वीरें, आवाज और वीडियो यानी Deepfake बनाना आसान हुआ है। इसका इस्तेमाल किसी व्यक्ति की पहचान की नकल करने, लोगों को भ्रमित करने या ऑनलाइन ठगी के लिए किया जा सकता है। भारत सरकार ने भी AI से बनाए गए गलत या भ्रामक कंटेंट और Deepfake से जुड़े जोखिमों को देखते हुए फरवरी 2026 में IT Rules में बदलाव किए थे। इन नियमों के तहत बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों को ऐसे गैरकानूनी AI-generated content को रोकने के लिए तकनीकी उपाय करने होते हैं।


AI से साइबर अपराध की पहचान में भी मदद

भारत की IndiaAI Mission के तहत I4C CyberGuard AI Hackathon में ऐसे AI समाधान विकसित किए गए हैं, जिनका उद्देश्य साइबर अपराध की शिकायतों को पहचानने और नए अपराध के पैटर्न का पता लगाने में मदद करना है।

सरकार ने AI सुरक्षा से जुड़े शोध और मानकों के लिए IndiaAI Safety Institute स्थापित करने की दिशा में भी काम शुरू किया है। इसका उद्देश्य AI से जुड़े जोखिमों को समझना, सुरक्षा मानक विकसित करना और AI सिस्टम की जांच करना है।


साइबर अपराध से निपटने के लिए I4C भी सक्रिय

केंद्र सरकार का Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C) साइबर अपराध से निपटने के लिए राज्यों और अन्य एजेंसियों के साथ काम कर रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 30 जून 2026 तक साइबर फ्रॉड से जुड़ी शिकायतों के आधार पर ₹11,158 करोड़ से ज्यादा की राशि बचाई गई। इसके अलावा साइबर अपराधियों से जुड़े लाखों SIM कार्ड और IMEI नंबर भी ब्लॉक किए गए हैं। साइबर फ्रॉड की शिकायत के लिए 1930 हेल्पलाइन और National Cyber Crime Reporting Portal का इस्तेमाल किया जा सकता है।


आम लोगों के लिए क्यों जरूरी है जागरूकता?

AI के कारण साइबर ठगी के तरीके पहले से ज्यादा भरोसेमंद दिखाई दे सकते हैं। किसी परिचित की आवाज जैसी आवाज, नकली वीडियो या फर्जी मैसेज लोगों को जल्दी विश्वास करने पर मजबूर कर सकते हैं। ऐसे में किसी भी संदिग्ध कॉल, लिंक, मैसेज या वीडियो पर तुरंत भरोसा करने के बजाय उसकी जानकारी दूसरे माध्यम से जांचना जरूरी है।