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नाशिक : संत निवृत्तिनाथ देवस्थान के अध्यक्ष पर गंभीर आरोप, महिला ने लगाए अत्याचार के आरोप — FIR के बाद अध्यक्ष फरार?

शादी का झांसा, कथित बार-बार शोषण, मारपीट और धमकी के आरोप; मामला सामने आते ही देवस्थान की प्रतिष्ठा पर भी उठे सवाल। आस्था, संत परंपरा और वारकरी संप्रदाय की पहचान रखने वाले त्र्यंबकेश्वर से ऐसा मामला सामने आया है जिसने पूरे नाशिक को झकझोर दिया है। संत निवृत्तिनाथ महाराज समाधी देवस्थान के अध्यक्ष ह.भ.प. राहुल साळुंखे के खिलाफ एक महिला की शिकायत के आधार पर इंदिरानगर पुलिस थाने में गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। महिला ने शादी का झांसा देकर लंबे समय तक कथित यौन शोषण, मारपीट और धमकी देने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।

Kalpana Gautam07 अक्टू. 2026, 01:28 PM IST
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नाशिक : संत निवृत्तिनाथ देवस्थान के अध्यक्ष पर गंभीर आरोप, महिला ने लगाए अत्याचार के आरोप — FIR के बाद अध्यक्ष फरार?

नाशिक | त्र्यंबकेश्वर: आस्था, संत परंपरा और वारकरी संप्रदाय की पहचान रखने वाले त्र्यंबकेश्वर से ऐसा मामला सामने आया है जिसने पूरे नाशिक को झकझोर दिया है। संत निवृत्तिनाथ महाराज समाधी देवस्थान के अध्यक्ष ह.भ.प. राहुल साळुंखे के खिलाफ एक महिला की शिकायत के आधार पर इंदिरानगर पुलिस थाने में गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। महिला ने शादी का झांसा देकर लंबे समय तक कथित यौन शोषण, मारपीट और धमकी देने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।


शिकायत के मुताबिक, महिला का आरोप है कि राहुल साळुंखे ने अपनी पत्नी को तलाक देकर उससे शादी करने का भरोसा दिलाया और इसी भरोसे के आधार पर करीब तीन वर्षों तक उसका कथित शोषण किया। महिला का कहना है कि जब उसने शादी को लेकर सवाल उठाए तो कथित तौर पर उसके साथ मारपीट की गई और धमकियां दी गईं। रिपोर्ट्स में निजी तस्वीरें सार्वजनिक करने तथा महिला और उसकी बेटी को नुकसान पहुंचाने की धमकी के आरोपों का भी उल्लेख है।

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संत निवृत्तिनाथ महाराज समाधी देवस्थान त्र्यंबकेश्वर.


अब सवाल सिर्फ एक FIR का नहीं है।

जिस संस्था के नाम के साथ संत निवृत्तिनाथ महाराज की पहचान जुड़ी है, उसी संस्था के प्रमुख पर इतने गंभीर आरोप लगना आखिर किस बात का संकेत है?

आस्था की कुर्सी पर बैठना क्या किसी को कानून से ऊपर कर देता है?
या फिर धार्मिक पद की चमक के पीछे उठने वाली शिकायतों को तब तक नजरअंदाज किया जाता है, जब तक मामला पुलिस तक न पहुंच जाए?


रिपोर्ट्स के अनुसार, महिला ने पहले भी संस्थान के कुछ पदाधिकारियों और विश्वस्तों को मामले की जानकारी देने तथा कथित वीडियो उपलब्ध कराने का दावा किया था। अब सवाल उठ रहा है कि अगर शिकायत पहले पहुंची थी, तो समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हुई? यह आरोप और सवाल जांच का विषय हैं।


मामला दर्ज होने के बाद राहुल साळुंखे के फरार होने की बात रिपोर्ट्स में सामने आई है, जबकि पुलिस उनकी तलाश कर रही है। इस बीच देवस्थान के विश्वस्त मंडल ने बैठक कर उन्हें अध्यक्ष पद से हटाने का प्रस्ताव मंजूर किया और आगे की कार्रवाई के लिए धर्मादाय विभाग को प्रस्ताव भेजने की बात सामने आई है।


यानी अब सवाल यह है कि धर्म की बात करने वाले संस्थान में अगर किसी महिला की शिकायत ही अनसुनी रह जाए, तो फिर न्याय की आवाज आखिर सुनी कौन जाएगा?

यह मामला केवल एक व्यक्ति पर लगे आरोपों का नहीं, बल्कि धार्मिक संस्थानों की जवाबदेही, महिलाओं की सुरक्षा और शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई का भी गंभीर सवाल बन चुका है।

हालांकि, आरोपों की अंतिम सत्यता न्यायिक जांच में तय होगी और आरोपी को दोषी साबित होने तक कानूनन निर्दोष माना जाता है। पुलिस की जांच और आगे की न्यायिक प्रक्रिया ही इस पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट करेगी।