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12 हजार किताबों पर बैन! अमेरिका के स्कूलों में बढ़ा Book Ban का मामला

अमेरिका के पब्लिक स्कूलों में 2025-26 के दौरान करीब 12 हजार बार किताबों पर बैन लगाया गया। PEN America की रिपोर्ट के मुताबिक यह अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। किताबों पर रोक के पीछे यौन सामग्री, जेंडर, नस्ल और अन्य संवेदनशील विषयों से जुड़े कंटेंट को प्रमुख कारण बताया गया है।

Neha Sharma08 अक्टू. 2026, 04:09 PM IST
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12 हजार किताबों पर बैन! अमेरिका के स्कूलों में बढ़ा Book Ban का मामला

वॉशिंगटन: अमेरिका के पब्लिक स्कूलों में किताबों पर प्रतिबंध को लेकर एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। PEN America के मुताबिक, 2025-26 के स्कूल वर्ष में देशभर में 11,982 बार किताबों पर बैन लगाया गया, जो एक साल में दर्ज अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। इन प्रतिबंधों से 7,370 अलग-अलग किताबें प्रभावित हुईं और 4,000 से ज्यादा लेखक, चित्रकार और अनुवादक इससे प्रभावित हुए।


टेक्सास में सबसे ज्यादा किताबों पर लगा प्रतिबंध

रिपोर्ट के अनुसार टेक्सास में सबसे ज्यादा किताबों को स्कूलों से हटाया गया। राज्य में 2025-26 के दौरान 8,100 से ज्यादा बैन दर्ज किए गए। इसके बाद फ्लोरिडा में 3,200 से ज्यादा किताबों पर प्रतिबंध की घटनाएं दर्ज हुईं। PEN America के अनुसार टेक्सास में 2025 में लागू हुए Senate Bill 13 (SB13) ने स्कूलों में किताबों की समीक्षा और उन्हें हटाने की प्रक्रिया को प्रभावित किया। रिपोर्ट में कहा गया है कि कानून को लेकर अस्पष्टता के कारण कई स्कूल जिलों ने बड़ी संख्या में किताबों को हटाया।


AI की मदद से भी किताबों की हो रही जांच

इस बार की रिपोर्ट में एक नया ट्रेंड भी सामने आया है। कुछ अमेरिकी स्कूल जिलों में Artificial Intelligence (AI) का इस्तेमाल किताबों की जांच करने और यह पता लगाने के लिए किया गया कि उनमें ऐसा कोई कंटेंट तो नहीं है जिसे स्कूल नियमों के तहत हटाया जाना चाहिए। PEN America का कहना है कि कुछ मामलों में AI ने दूसरे स्कूल जिलों में पहले से हटाई गई किताबों को आधार बनाकर नई किताबों को भी हटाने की सिफारिश की। इससे किताबों पर प्रतिबंध लगाने की प्रक्रिया और तेज हो सकती है।


‘Sold’ सबसे ज्यादा बैन होने वाली किताब

रिपोर्ट के मुताबिक, Patricia McCormick की किताब ‘Sold’ 2025-26 में सबसे ज्यादा बार बैन की गई। यह कहानी नेपाल की एक किशोरी पर आधारित है, जिसे यौन शोषण और मानव तस्करी का सामना करना पड़ता है। वहीं, Stephen King लगातार दूसरे साल सबसे ज्यादा प्रतिबंध झेलने वाले लेखक रहे। उनकी किताबों से जुड़े 312 बैन दर्ज किए गए।

‘Jane Eyre’ और ‘The Handmaid’s Tale’ भी सूची में

इस बार प्रतिबंधों का असर केवल नई या विवादित किताबों तक सीमित नहीं रहा। Charlotte Brontë की ‘Jane Eyre’, Margaret Atwood की ‘The Handmaid’s Tale’ और कई लोकप्रिय युवा साहित्य भी प्रभावित हुए।

PEN America के मुताबिक, 2025-26 में 4,500 से ज्यादा किताबों पर पहली बार बैन दर्ज किया गया। इनमें साहित्यिक क्लासिक्स से लेकर आधुनिक उपन्यास और जापानी मंगा तक शामिल हैं।


युवा साहित्य और मंगा भी निशाने पर

रिपोर्ट में कहा गया है कि युवा पाठकों के बीच लोकप्रिय Young Adult Fiction और Manga पर भी बड़ी संख्या में प्रतिबंध लगाए गए। 2025-26 में बैन किए गए Young Adult टाइटल्स में 90 प्रतिशत से ज्यादा फिक्शन थे।

PEN America का कहना है कि ऐसे प्रतिबंध छात्रों की पढ़ने की रुचि और अलग-अलग विचारों, संस्कृतियों और अनुभवों तक उनकी पहुंच को प्रभावित कर सकते हैं।


आखिर किताबों पर क्यों लग रहा है बैन?

रिपोर्ट के अनुसार किताबों को चुनौती देने या हटाने के पीछे यौन सामग्री, सेक्सुअलिटी, जेंडर आइडेंटिटी, नस्ल और नस्लवाद जैसे विषय प्रमुख कारणों में शामिल हैं। कुछ अभिभावक और समूह बच्चों के लिए अनुपयुक्त माने जाने वाले कंटेंट को स्कूलों से हटाने की मांग करते हैं। दूसरी ओर, PEN America और अन्य पुस्तक-अभिव्यक्ति समर्थक संगठनों का कहना है कि किताबों को बड़े स्तर पर हटाने से छात्रों की अलग-अलग विचारों और अनुभवों तक पहुंच सीमित हो सकती है।


पांच साल में करीब 34 हजार बैन

PEN America ने 2021 से अमेरिकी पब्लिक स्कूलों में किताबों पर प्रतिबंध की घटनाओं को ट्रैक करना शुरू किया था। संगठन के मुताबिक, अब तक करीब 34,000 बैन दर्ज किए जा चुके हैं। 2025-26 का आंकड़ा इस पूरे रिकॉर्ड में सबसे ज्यादा है। इस साल 114 स्कूल जिलों में किताबों पर प्रतिबंध दर्ज किया गया, जो एक साल के लिए नया रिकॉर्ड है।


क्यों महत्वपूर्ण है यह खबर?

अमेरिका में किताबों पर बढ़ते प्रतिबंध ने एक बड़ा सवाल खड़ा किया है—बच्चों को स्कूल में क्या पढ़ने की अनुमति होनी चाहिए और इसका फैसला कौन करे? एक तरफ अभिभावक और कुछ संगठन बच्चों को संवेदनशील सामग्री से बचाने की बात कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ PEN America जैसे संगठन इसे पढ़ने की आजादी और छात्रों की जानकारी तक पहुंच का मुद्दा मानते हैं।