crime

गांजा से मेफेड्रोन तक पुलिस की नजर, कल्याण DCP Zone-3 में 37 दिन में नशे के 87 FIR

कल्याण DCP Zone-3 में नशे के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई तेज है। 1 सितंबर से 7 अक्टूबर के बीच महज 37 दिनों में गांजा से लेकर मेफेड्रोन तक नशीले पदार्थों से जुड़े 87 FIR दर्ज हुए, जिनमें 72 सेवन और 15 बिक्री-सप्लाई के मामले हैं।

Sonali08 अक्टू. 2026, 04:09 PM IST
खबर शेयर करें:
गांजा से मेफेड्रोन तक पुलिस की नजर, कल्याण DCP Zone-3 में 37 दिन में नशे के 87 FIR

कल्याण-डोंबिवली पुलिस के DCP Zone-3 में नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों को लेकर सामने आए आंकड़े पुलिस के सामने मौजूद चुनौती को दिखाते हैं। 1 सितंबर से 7 अक्टूबर 2026 के बीच 37 दिनों में नशीले पदार्थों से संबंधित कुल 87 FIR दर्ज की गईं। इनमें 72 मामले नशीले पदार्थों के सेवन से जुड़े हैं, जबकि 15 FIR में नशीले पदार्थों की बिक्री या सप्लाई से संबंधित कार्रवाई की गई। यानी इस अवधि में बिक्री या सप्लाई की तुलना में सेवन से जुड़े मामलों की संख्या करीब पांच गुना रही। DCP Zone-3 के अंतर्गत महात्मा फुले चौक (Mahatma Phule Chowk), बाजारपेठ (Bazar Peth), खड़कपाड़ा (Khadakpada), कोलसेवाड़ी (Kolsewadi), डोंबिवली (Dombivli), विष्णु नगर (Vishnu Nagar), मानपाड़ा (Manpada) और तिलक नगर (Tilak Nagar) पुलिस स्टेशन आते हैं।


इन आठ थाना क्षेत्रों में 1 सितंबर से 7 अक्टूबर के बीच नशीले पदार्थों के सेवन, कब्जे, बिक्री और सप्लाई से संबंधित FIR दर्ज की गईं। इन मामलों में अलग-अलग प्रकार के नशीले पदार्थों का उल्लेख सामने आया है। गांजा (Ganja) से जुड़े मामलों के अलावा मेफेड्रोन (Mephedrone) जैसे सिंथेटिक ड्रग्स (Synthetic Drugs) से संबंधित कार्रवाई भी हुई है। मेफेड्रोन एक साइकोट्रोपिक पदार्थ (Psychotropic Substance) है और इसके अवैध सेवन, कब्जे, बिक्री या सप्लाई के मामलों में कानून के तहत कार्रवाई की जाती है। आंकड़ों के मुताबिक, 87 FIR में 72 मामले सेवन से संबंधित हैं, जबकि 15 मामले बिक्री या सप्लाई से जुड़े हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि संबंधित अवधि में पुलिस कार्रवाई के दौरान सेवन से जुड़े मामले बड़ी संख्या में सामने आए। वहीं बिक्री और सप्लाई से जुड़े मामलों की संख्या कम होने के बावजूद ये मामले नशीले पदार्थों की उपलब्धता और उनके स्रोत की जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं।


बिक्री और सप्लाई से जुड़े 15 मामलों में पुलिस के सामने यह पता लगाने की चुनौती रहती है कि नशीले पदार्थ कहां से लाए जा रहे हैं, उन्हें कौन सप्लाई कर रहा है और क्या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क सक्रिय है। दूसरी ओर, सेवन से जुड़े 72 मामले यह दिखाते हैं कि पुलिस कार्रवाई के दौरान नशीले पदार्थों के इस्तेमाल से जुड़े मामले भी बड़ी संख्या में दर्ज हुए हैं। हालांकि, इन 87 FIR को पूरे DCP Zone-3 में नशे के वास्तविक प्रसार का सीधा पैमाना नहीं माना जा सकता। FIR की संख्या पुलिस के पास दर्ज मामलों और संबंधित अवधि में हुई कार्रवाई को दर्शाती है।


इसके बावजूद 1 सितंबर से 7 अक्टूबर के बीच 37 दिनों में 87 FIR दर्ज होना यह जरूर बताता है कि नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों पर पुलिस की निगरानी और कार्रवाई जारी है। इन आंकड़ों में सेवन से जुड़े मामलों की संख्या बिक्री और सप्लाई के मामलों से काफी अधिक है। ऐसे में नशे की समस्या से निपटने के लिए केवल सेवन से जुड़े मामलों पर कार्रवाई के साथ-साथ नशीले पदार्थों की बिक्री और सप्लाई के स्रोत तक पहुंचना भी महत्वपूर्ण होगा। DCP Zone-3 के आठ पुलिस थाना क्षेत्रों से सामने आए ये आंकड़े नशे के खिलाफ कार्रवाई की दो प्रमुख चुनौतियां सामने रखते हैं—नशीले पदार्थों के सेवन पर नियंत्रण और उनकी बिक्री-सप्लाई चैन पर रोक।