crime

CJP के सौरव दास और आशुतोष रांका तिहाड़ जेल भेजे गए, बॉन्ड की शर्तें तोड़ने का आरोप

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को बेल बॉन्ड की शर्तों के उल्लंघन के आरोप में पांच दिन की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेजा गया है। वहीं, पार्टी के नेता अजिंक्य शिंदे को 5 हजार रुपये का पीस बॉन्ड भरवाकर रिहा कर दिया गया। पार्टी संस्थापक अभिजीत दिपके ने कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं।

Kashish Rai15 अक्टू. 2026, 04:38 PM IST
खबर शेयर करें:
CJP के सौरव दास और आशुतोष रांका तिहाड़ जेल भेजे गए, बॉन्ड की शर्तें तोड़ने का आरोप

दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को बेल बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन करने के आरोप में पांच दिन की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया गया है। वहीं, पार्टी के नेता अजिंक्य शिंदे को 5 हजार रुपये का पीस बॉन्ड भरवाने के बाद रिहा कर दिया गया। कोर्ट ने उन्हें छह महीने तक शांति बनाए रखने का आदेश दिया है। पुलिस के मुताबिक, सौरव दास और आशुतोष रांका ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 का दोबारा उल्लंघन किया है। पुलिस ने दोनों को बार-बार नियम तोड़ने वाला बताते हुए उनके पिछले आचरण का हवाला दिया है। इससे पहले भी उन्हें शांति भंग नहीं करने की शर्त पर रिहा किया गया था। दरअसल, मंगलवार सुबह सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे समेत CJP के कार्यकर्ता भारी बैरिकेडिंग के बीच जंतर-मंतर क्षेत्र में दाखिल हुए थे।


इस दौरान उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर नारेबाजी की। इसके बाद पुलिस ने तीनों नेताओं को हिरासत में ले लिया। CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने पार्टी नेताओं को जेल भेजे जाने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि आखिर सौरव दास और आशुतोष रांका की गलती क्या थी। दिपके ने यह भी सवाल किया कि क्या जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराने की कोशिश करना अपराध है। CJP संस्थापक अभिजीत दिपके ने कहा कि उनकी पार्टी और INDIA ब्लॉक का मकसद एक ही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कॉकरोच जनता पार्टी एक स्वतंत्र संगठन है और अपनी अलग पहचान बनाए रखेगी। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि पार्टी INDIA ब्लॉक के खिलाफ है। गौरतलब है कि जंतर-मंतर को हाल ही में निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटा दिया गया है। इससे पहले शनिवार को भी अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली पहुंचने के बाद हिरासत में लिया गया था। उस समय सुरक्षा व्यवस्था कड़ी होने के कारण CJP का प्रस्तावित प्रदर्शन नहीं हो पाया था। तीनों को अगले दिन इस शर्त पर रिहा किया गया था कि वे एक साल तक शांति भंग नहीं करेंगे।