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NBFC के सिस्टम में सेंध लगाकर 87 मिनट में 3.3 करोड़ की ठगी, 52 खातों में भेजे पैसे

हैदराबाद की एक नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) के सिस्टम और API में सेंध लगाकर साइबर अपराधियों ने 87 मिनट में 3.3 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम निकाल ली। कुल 183 ट्रांजेक्शन के जरिए पैसे 52 संदिग्ध बैंक खातों में भेजे गए। अब तक करीब 40 लाख रुपये फ्रीज किए जा सके हैं। तेलंगाना साइबर सिक्योरिटी ब्यूरो मामले की जांच कर रहा है।

Kashish Rai24 अक्टू. 2026, 05:13 PM IST
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NBFC के सिस्टम में सेंध लगाकर 87 मिनट में 3.3 करोड़ की ठगी, 52 खातों में भेजे पैसे

हैदराबाद में एक नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) के साथ करोड़ों रुपये की साइबर ठगी का मामला सामने आया है। साइबर अपराधियों ने कथित तौर पर कंपनी के सिस्टम और एप्लिकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस (API) तक अनधिकृत पहुंच बनाकर महज 87 मिनट में 3.3 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम निकाल ली। इस दौरान कंपनी के बैंक खाते से लगातार 183 संदिग्ध ट्रांजेक्शन किए गए और रकम को 52 अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिया गया। घटना सामने आने के बाद कंपनी और जांच एजेंसियों में हड़कंप मच गया है। शिकायत के मुताबिक, 19 अक्टूबर को सुबह 10 बजकर 31 मिनट से 11 बजकर 58 मिनट के बीच कंपनी के खाते से संदिग्ध लेन-देन हुए। इस दौरान अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए बड़ी रकम दूसरे खातों में भेजी गई। शुरुआती जानकारी के अनुसार, प्रत्येक ट्रांजेक्शन में करीब 50 हजार रुपये से लेकर 2 लाख रुपये तक की रकम ट्रांसफर की गई। इतने कम समय में बड़ी संख्या में हुए लेन-देन ने कंपनी के डिजिटल सुरक्षा इंतजामों को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।


इस मामले में साइबर अपराधियों ने कंपनी के सिस्टम के साथ उसके API तक भी पहुंच बनाई। API एक डिजिटल माध्यम है, जिसकी मदद से अलग-अलग सॉफ्टवेयर और सिस्टम आपस में जानकारी साझा करते हैं और निर्धारित निर्देशों के अनुसार काम करते हैं। वित्तीय कंपनियां डिजिटल सेवाओं और अपने सिस्टम को आपस में जोड़ने के लिए इसका इस्तेमाल करती हैं। हालांकि, इस मामले में अपराधियों ने सिस्टम तक पहुंच कैसे बनाई और सुरक्षा व्यवस्था की किन संभावित खामियों का फायदा उठाया, इसका अभी खुलासा नहीं हुआ है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि कंपनी के सिस्टम में सेंधमारी किस तरह हुई और संदिग्ध ट्रांजेक्शन किस प्रक्रिया के जरिए किए गए। इसके लिए सिस्टम लॉग, API लॉग, ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड, बैंक स्टेटमेंट और कंपनी की आंतरिक रिपोर्ट की जांच की जा रही है। डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर यह भी पता लगाने की कोशिश हो रही है कि इस साइबर हमले में कितने लोग शामिल थे और क्या इसके पीछे कोई संगठित गिरोह काम कर रहा था।


इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल ठगी की रकम को लेकर है। अब तक करीब 40 लाख रुपये संदिग्ध बैंक खातों में फ्रीज किए जाने की जानकारी सामने आई है। इससे उस रकम को निकालने या आगे ट्रांसफर करने पर रोक लगाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, 3.3 करोड़ रुपये से ज्यादा की कथित ठगी के मुकाबले फ्रीज की गई रकम काफी कम है। ऐसे में बाकी रकम का पता लगाना और उसे वापस हासिल करना जांच एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती है। कंपनी के मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) ने 20 अक्टूबर को तेलंगाना साइबर सिक्योरिटी ब्यूरो (TGCSB) में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में साइबर हमले की जांच करने, जिम्मेदार लोगों की पहचान करने और संदिग्ध बैंक खातों में मौजूद रकम को फ्रीज करने की मांग की गई। कंपनी ने इसी दिन राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी घटना की जानकारी दी। इसके बाद जांच एजेंसियों ने लेन-देन के रिकॉर्ड और डिजिटल सबूत जुटाने शुरू किए। फिलहाल पुलिस और साइबर सुरक्षा अधिकारी इस बात की जांच कर रहे हैं कि रकम किन खातों में भेजी गई और वहां से आगे किसी दूसरे खाते में ट्रांसफर की गई या नहीं। साथ ही, साइबर अपराधियों की पहचान करने और ठगी गई रकम की बरामदगी के प्रयास किए जा रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कंपनी के सिस्टम में सेंधमारी किस तरीके से हुई और इस पूरे साइबर फ्रॉड में कौन-कौन शामिल था।