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आयुर्वेद की दुर्लभ पांडुलिपियां होंगी डिजिटल, CCRAS ने किया MoU
CCRAS के तहत नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इंडियन मेडिकल हेरिटेज (NIIMH), हैदराबाद ने केरल के Sevadhi Museum & Indological Research Institute (SEMIRI) के साथ MoU किया है। इसके तहत 30 हजार से अधिक पांडुलिपियों के संग्रह में मौजूद सैकड़ों दुर्लभ आयुर्वेदिक और चिकित्सा पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण और विस्तृत कैटलॉग तैयार किया जाएगा। इस पहल से प्राचीन चिकित्सा ज्ञान को सुरक्षित रखने के साथ शोधकर्ताओं और अकादमिक विशेषज्ञों के लिए इन ऐतिहासिक दस्तावेजों तक पहुंच आसान होगी। यह कदम ज्ञान भारतम मिशन के तहत भारत की पारंपरिक चिकित्सा और पांडुलिपि विरासत के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

भारत की पारंपरिक चिकित्सा विरासत को संरक्षित करने की दिशा में केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (CCRAS) के तहत नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इंडियन मेडिकल हेरिटेज (NIIMH), हैदराबाद ने केरल के कोट्टायम स्थित Sevadhi Museum & Indological Research Institute (SEMIRI) के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस सहयोग के तहत केरल में संरक्षित दुर्लभ चिकित्सा और आयुर्वेदिक पांडुलिपियों का व्यवस्थित डिजिटलीकरण और विस्तृत कैटलॉग तैयार किया जाएगा। SEMIRI के संग्रह में 30 हजार से अधिक पांडुलिपियां मौजूद हैं। इनमें मंदिर अभिलेखों के साथ-साथ आयुर्वेद और भारतीय पारंपरिक ज्ञान से जुड़ी कई महत्वपूर्ण पांडुलिपियां भी शामिल हैं। इन दस्तावेजों में चिकित्सा विचारों के विकास, उपचार पद्धतियों, औषधीय पदार्थों, निदान संबंधी अवधारणाओं और पारंपरिक चिकित्सा के विद्वतापूर्ण इतिहास से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दर्ज है।
सैकड़ों मेडिकल पांडुलिपियों का होगा डिजिटलीकरण
MoU के तहत CCRAS-NIIMH की विशेषज्ञ टीम पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण के साथ उनका वैज्ञानिक और व्यवस्थित दस्तावेजीकरण करेगी। इसका उद्देश्य पुरानी और नाजुक पांडुलिपियों की उच्च गुणवत्ता वाली डिजिटल प्रतियां तैयार करना है, ताकि उनके संरक्षण के साथ-साथ बार-बार मूल दस्तावेजों को संभालने की जरूरत भी कम हो। इसके अलावा पांडुलिपियों का एक व्यापक वर्णनात्मक कैटलॉग तैयार किया जाएगा। इसमें उपलब्ध जानकारी के आधार पर पांडुलिपि का शीर्षक, लेखक, विषय, भाषा, लिपि, सामग्री, आकार, फोलियो की जानकारी, वर्तमान स्थिति और स्रोत जैसे विवरण दर्ज किए जाएंगे।
शोधकर्ताओं के लिए आसान होगी पहुंच
डिजिटल रिकॉर्ड और कैटलॉग तैयार होने के बाद शोधकर्ताओं और अकादमिक विशेषज्ञों के लिए इन पांडुलिपियों की पहचान और अध्ययन करना आसान होगा। इससे आयुर्वेद, चिकित्सा इतिहास, पांडुलिपि विज्ञान और भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े शोध को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। यह पहल भारत सरकार के ज्ञान भारतम मिशन के व्यापक प्रयासों से भी जुड़ी है। मिशन के तहत देश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पांडुलिपि विरासत को संरक्षित, डिजिटल और व्यापक स्तर पर उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। चिकित्सा पांडुलिपियां इस विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जिनमें कई पीढ़ियों से संचित पारंपरिक ज्ञान दर्ज है।
CCRAS विशेषज्ञ टीम ने शुरू किया काम
CCRAS-NIIMH के विशेषज्ञों की टीम ने संस्थान में पांडुलिपियों का मौके पर डिजिटलीकरण शुरू कर दिया है। यह कार्य संस्थान के ‘Collection, Digitization and Cataloguing of AYUSH Manuscripts and Rare Books’ प्रोजेक्ट के तहत किया जा रहा है। CCRAS के महानिदेशक प्रो. वैद्य रबीनारायण आचार्य ने कहा कि चिकित्सा पांडुलिपियों का संरक्षण केवल अभिलेखों को सुरक्षित रखने का काम नहीं है, बल्कि यह भारत की बौद्धिक विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने व्यवस्थित डिजिटलीकरण और वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण को पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान के संरक्षण और शोध के लिए जरूरी बताया। SEMIRI के अध्यक्ष डॉ. सी.एस. उन्नी ने इस सहयोग को केरल, खासकर कुमरनल्लूर और कोट्टायम क्षेत्र की ऐतिहासिक विरासत को सामने लाने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया। वहीं CCRAS-NIIMH के प्रमुख डॉ. गोली पेंचला प्रसाद ने आयुर्वेदिक पांडुलिपियों के संरक्षण में आने वाली चुनौतियों और आगे की रणनीति पर चर्चा की। इस अवसर पर SEMIRI के क्यूरेटर डॉ. एस. राजेंदु, CCRAS के रिसर्च ऑफिसर डॉ. संतोष एस. माने और डॉ. राकेश नारायण समेत कई अधिकारी और विशेषज्ञ मौजूद रहे।
आधुनिक शोध के लिए बनेगा ज्ञान संसाधन
इस परियोजना से तैयार होने वाले डिजिटल संसाधन और वर्णनात्मक कैटलॉग भविष्य में शोधकर्ताओं के लिए महत्वपूर्ण प्राथमिक स्रोत उपलब्ध करा सकते हैं। इससे आयुर्वेदिक ग्रंथों के आलोचनात्मक अध्ययन, शोध पत्रों, प्रामाणिक संस्करणों और अन्य अकादमिक कार्यों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। हैदराबाद स्थित NIIMH, CCRAS और आयुष मंत्रालय के तहत भारतीय चिकित्सा प्रणालियों के ऐतिहासिक एवं साहित्यिक विरासत पर शोध, दस्तावेजीकरण और संरक्षण के लिए काम करता है। वहीं केरल का SEMIRI कुमरनल्लूर क्षेत्र की सांस्कृतिक, सामाजिक और प्रशासनिक विरासत के संरक्षण एवं अध्ययन के लिए सक्रिय है। CCRAS और SEMIRI के बीच यह सहयोग भारत की सदियों पुरानी चिकित्सा परंपरा को आधुनिक डिजिटल तकनीक से जोड़ने की दिशा में अहम पहल माना जा रहा है।
