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तिरंगा यात्रा में बिगड़ी बच्चों की तबीयत, देवरिया में 40 छात्राएं और सिंगरौली में 12 बच्चों की हालत बिगड़ी

उत्तर प्रदेश के देवरिया और मध्य प्रदेश के सिंगरौली में ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के तहत निकाली गई तिरंगा यात्राओं के दौरान कई स्कूली बच्चों की तबीयत बिगड़ गई। देवरिया में करीब 40 छात्राएं गर्मी, उमस, थकान और पर्याप्त पानी-भोजन न मिलने के कारण बीमार पड़ीं, जिनमें 25 से अधिक को अस्पताल में उपचार मिला। वहीं, सिंगरौली में 200 से ज्यादा छात्रों ने छह किलोमीटर पैदल यात्रा की और धूप में लंबे समय तक इंतजार किया, जिसके बाद 12 छात्रों को डिहाइड्रेशन और सांस लेने में परेशानी के चलते आपात चिकित्सा सहायता दी गई। घटनाओं ने बच्चों को सार्वजनिक आयोजनों में शामिल करने से पहले पानी, छांव, विश्राम और मेडिकल सुविधाओं की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने की जरूरत पर सवाल खड़े किए हैं।

Vindhya Dubey15 अग. 2026, 01:10 PM IST
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तिरंगा यात्रा में बिगड़ी बच्चों की तबीयत, देवरिया में 40 छात्राएं और सिंगरौली में 12 बच्चों की हालत बिगड़ी

स्वतंत्रता दिवस से पहले देशभर में आयोजित हो रही ‘हर घर तिरंगा’ मुहिम के तहत निकाली गई तिरंगा यात्राओं के दौरान उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में स्कूली बच्चों की तबीयत बिगड़ने के मामले सामने आए हैं। देवरिया में एक किलोमीटर की तिरंगा यात्रा के दौरान 40 से अधिक छात्राएं बीमार पड़ गईं, जबकि मध्य प्रदेश के सिंगरौली में छह किलोमीटर की यात्रा और लंबे समय तक धूप में इंतजार के बाद 12 छात्रों की तबीयत बिगड़ गई। दोनों घटनाओं ने सरकारी आयोजनों में बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य इंतजामों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

देवरिया में 40 से अधिक छात्राएं बीमार

उत्तर प्रदेश के देवरिया में 13 अगस्त को आयोजित तिरंगा यात्रा में बड़ी संख्या में स्कूली छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया। रिपोर्टों के मुताबिक, करीब एक किलोमीटर की यात्रा के दौरान Kasturba Gandhi Government Girls Inter College की 40 से अधिक छात्राओं की तबीयत बिगड़ गई और कई छात्राएं बेहोश होकर गिर पड़ीं। डॉक्टरों ने उनकी हालत को गर्मी, उमस, शारीरिक थकान और डिहाइड्रेशन से जोड़ा। बताया गया कि कई छात्राओं को इलाज के लिए महार्षि देवराहा बाबा स्वायत्त राज्य चिकित्सा महाविद्यालय ले जाया गया। रिपोर्ट के अनुसार 25 से अधिक छात्राओं को अस्पताल में उपचार की जरूरत पड़ी। कुछ छात्राओं ने सुबह खाना नहीं खाया था, जिससे गर्मी और लंबी पैदल यात्रा के दौरान कमजोरी और चक्कर की स्थिति और गंभीर हो सकती है। यह यात्रा जिला प्रशासन की ओर से आयोजित कार्यक्रम का हिस्सा थी और इसमें बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे शामिल हुए थे। घटना के बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने अस्पताल पहुंचकर बच्चों की स्थिति का जायजा लिया। अधिकांश छात्राओं की हालत उपचार और हाइड्रेशन के बाद स्थिर बताई गई और कई को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

सिंगरौली में छह किलोमीटर पैदल चले छात्र

मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले के चित्रांगी क्षेत्र में भी तिरंगा यात्रा के दौरान छात्रों के बीमार पड़ने का मामला सामने आया। PTI के मुताबिक, आठ स्कूलों के 200 से अधिक छात्र इस यात्रा में शामिल हुए थे। छात्रों ने करीब छह किलोमीटर पैदल यात्रा की। इसके बाद उन्हें कार्यक्रम में मंत्री के पहुंचने का इंतजार भी करना पड़ा। ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की रिपोर्ट के अनुसार, छात्र करीब एक घंटे तक मंत्री राधा सिंह के आने का इंतजार करते रहे। इस दौरान गर्मी और पानी की कमी के बीच कई बच्चों की तबीयत बिगड़ गई। 12 छात्रों को इलाज की जरूरत पड़ी। रिपोर्टों में बताया गया कि कुछ छात्रों को गंभीर डिहाइड्रेशन और सांस लेने में परेशानी के चलते आपात चिकित्सा सहायता और ऑक्सीजन दी गई। घटना ने इस बात को लेकर चिंता बढ़ाई कि बच्चों को लंबी दूरी तक पैदल चलाने और उसके बाद धूप में इंतजार कराने से पहले पर्याप्त चिकित्सा एवं जल व्यवस्था क्यों नहीं की गई।

उत्साह के बीच सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

प्रशासन की ओर से यह कहा गया कि बच्चे उत्साह के कारण पर्याप्त पानी नहीं पी पाए और अधिकांश बच्चों की हालत बाद में ठीक हो गई। लेकिन इन घटनाओं के बाद सवाल यह है कि स्कूली बच्चों को शामिल करने वाले सार्वजनिक आयोजनों में स्वास्थ्य जोखिमों का पहले से आकलन क्यों नहीं किया गया। विशेषज्ञों और आलोचकों का कहना है कि बच्चों को किसी भी सार्वजनिक रैली या यात्रा में शामिल करते समय केवल कार्यक्रम की सफलता और भागीदारी पर ध्यान नहीं दिया जाना चाहिए। गर्मी और उमस की स्थिति में पर्याप्त पेयजल, छायादार स्थान, आराम के लिए ब्रेक, प्राथमिक उपचार केंद्र, एंबुलेंस और प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ की व्यवस्था पहले से सुनिश्चित होना जरूरी है।

देशभक्ति के आयोजन में बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि

‘हर घर तिरंगा’ जैसे अभियानों का उद्देश्य देशभक्ति और राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान की भावना को मजबूत करना है। लेकिन बच्चों की भागीदारी वाले आयोजनों में उत्साह के साथ उनकी सुरक्षा भी सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। देवरिया और सिंगरौली की घटनाएं प्रशासन के लिए एक चेतावनी के तौर पर देखी जा रही हैं। भविष्य में ऐसे आयोजनों के लिए मौसम की स्थिति को ध्यान में रखते हुए समय और दूरी तय करने, पर्याप्त पानी और भोजन उपलब्ध कराने, बीच-बीच में विश्राम की व्यवस्था करने और मेडिकल टीम को मौके पर तैनात रखने जैसे कदम जरूरी हैं। देशभक्ति का संदेश तभी सार्थक होगा, जब उसे आगे बढ़ाने वाले बच्चों की सेहत और सुरक्षा भी उतनी ही गंभीरता से सुनिश्चित की जाए।