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निजी स्कूल शिक्षकों की पेंशन-सोशल सिक्योरिटी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र-राज्यों को नोटिस; 4 हफ्ते बाद होगी सुनवाई
देशभर के निजी स्कूल शिक्षकों के लिए पेंशन, मेडिकल सुविधा, बीमा और रिटायरमेंट के बाद सामाजिक सुरक्षा की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्यों से जवाब मांगा है। कोर्ट ने निजी स्कूल शिक्षकों के लिए एक समान राष्ट्रीय नीति और कल्याणकारी ढांचे की मांग वाली PIL पर नोटिस जारी किया है।

सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के निजी स्कूल शिक्षकों के लिए सामाजिक सुरक्षा, पेंशन और सेवानिवृत्ति के बाद आर्थिक संरक्षण सुनिश्चित करने की मांग वाली जनहित याचिका पर केंद्र सरकार, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों समेत संबंधित प्राधिकरणों को नोटिस जारी किया है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने मामले को चार सप्ताह बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है। यह जनहित याचिका ऑल इंडिया टीचर्स फेडरेशन की नेशनल कोऑर्डिनेटर लिगिमोल जॉर्ज की ओर से अधिवक्ता-ऑन-रिकॉर्ड दीपक प्रकाश के माध्यम से दाखिल की गई है। याचिका में निजी स्कूल शिक्षकों के कल्याण और सामाजिक सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक व्यापक नीति तथा उचित वैधानिक और प्रशासनिक ढांचा तैयार करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि निजी स्कूलों में कार्यरत शिक्षक शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण सार्वजनिक कार्य करते हैं और संविधान के अनुच्छेद 21A के तहत बच्चों के शिक्षा के अधिकार को लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके बावजूद निजी स्कूल शिक्षकों के लिए देशभर में सामाजिक सुरक्षा और सेवानिवृत्ति लाभों से जुड़ा कोई समान और व्यापक वैधानिक ढांचा नहीं है। याचिका में दावा किया गया है कि वर्तमान व्यवस्था अलग-अलग राज्यों के कानूनों, स्कूल संस्थानों की नीतियों और रोजगार अनुबंधों पर निर्भर है। इसके कारण समान परिस्थितियों में काम करने वाले निजी स्कूल शिक्षकों को सेवा शर्तों और सामाजिक सुरक्षा लाभों में काफी अंतर का सामना करना पड़ता है।
पेंशन, मेडिकल सुविधा और बीमा की मांग
याचिका में कहा गया है कि बड़ी संख्या में निजी स्कूल शिक्षक पर्याप्त पेंशन, चिकित्सा सहायता, बीमा सुरक्षा, पारिवारिक कल्याण लाभ और दिव्यांगता सहायता जैसी सुविधाओं के बिना सेवानिवृत्त हो जाते हैं। वृद्धावस्था या किसी आकस्मिक परिस्थिति में सामाजिक सुरक्षा का प्रभावी तंत्र नहीं होने के कारण उन्हें आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। याचिकाकर्ता ने निजी स्कूल शिक्षकों के लिए National Private School Teachers Welfare Board स्थापित करने की मांग की है। इसके अलावा व्यापक वैधानिक पेंशन और सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था के साथ राष्ट्रीय कल्याण कोष बनाने और शिक्षकों तथा उनके परिवारों के लिए चिकित्सा, बीमा और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की गई है।
मौजूदा कानूनों को लेकर भी सवाल
याचिका में Employees' State Insurance Act, 1948, Employees' Provident Funds and Miscellaneous Provisions Act, 1952, Payment of Gratuity Act, 1972 और Code on Social Security, 2020 समेत विभिन्न श्रम एवं सामाजिक सुरक्षा कानूनों का उल्लेख किया गया है। हालांकि, याचिकाकर्ता का तर्क है कि ये कानून निजी स्कूल शिक्षकों के दीर्घकालिक कल्याण के लिए कोई विशेष और व्यापक संस्थागत व्यवस्था उपलब्ध नहीं कराते। याचिका में निर्माण श्रमिकों, बीड़ी श्रमिकों, फिल्म कर्मियों, मछुआरों, पत्रकारों और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए बनाए गए कल्याणकारी तंत्रों का भी उल्लेख किया गया है। याचिकाकर्ता के अनुसार निजी स्कूल शिक्षकों के लिए ऐसा कोई समर्पित राष्ट्रीय कल्याण बोर्ड या एकीकृत संस्थागत व्यवस्था मौजूद नहीं है।
याचिका में केंद्र सरकार से समयबद्ध तरीके से राष्ट्रीय नीति तैयार करने और निजी स्कूल शिक्षकों के लिए पेंशन, चिकित्सा सहायता, बीमा, परिवार कल्याण, दिव्यांगता सहायता तथा सेवानिवृत्ति के बाद सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी ढांचा तैयार करने की मांग की गई है। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल केंद्र, राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और संबंधित प्राधिकरणों से जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी।
