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रुद्रपुर में बारावफात जुलूस के दौरान भड़काऊ भाषण का आरोप, मौलाना मुफ्ती मुजीब गिरफ्तार l
उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर जिले के रुद्रपुर में बारावफात जुलूस के दौरान कथित तौर पर भड़काऊ और उकसाऊ भाषण देने के मामले में पुलिस ने मौलाना मुफ्ती मुजीब अहमद को गिरफ्तार किया है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो का संज्ञान लेते हुए पुलिस ने कोतवाली रुद्रपुर में भारतीय न्याय संहिता की धारा 196(2) के तहत मुकदमा दर्ज किया था। जांच के दौरान मिले साक्ष्यों के आधार पर आरोपी के खिलाफ धारा 152 भी बढ़ाई गई। पुलिस का कहना है कि वीडियो की जांच में उसके एडिटेड या AI से तैयार होने के साक्ष्य नहीं मिले।
Kashish Rai31 अग. 2026, 04:59 PM IST

उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर जिले के रुद्रपुर में बारावफात जुलूस के दौरान कथित तौर पर भड़काऊ भाषण देने के मामले में पुलिस ने मौलाना मुफ्ती मुजीब अहमद को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, 26 अगस्त को बारावफात जुलूस के दौरान रुद्रपुर के त्रिशूल चौक के पास मौलाना ने भाषण दिया था। इस भाषण का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला पुलिस के संज्ञान में आया। वीडियो में मौलाना मुफ्ती मुजीब अहमद द्वारा मदरसों से जुड़े मुद्दे पर कथित रूप से आपत्तिजनक और उकसाने वाली टिप्पणी किए जाने की बात सामने आई। पुलिस के मुताबिक, भाषण में कहा गया था कि यदि मदरसों को बंद किया गया तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। पुलिस ने आशंका जताई कि इस तरह के बयान से अलग-अलग धार्मिक समुदायों के बीच तनाव और वैमनस्य बढ़ सकता है।
सोशल मीडिया पर वीडियो सामने आने के बाद ऊधमसिंह नगर के एसएसपी अजय गणपति ने मामले का संज्ञान लिया। पुलिस ने वीडियो और उससे जुड़ी जानकारी की प्रारंभिक जांच के बाद रुद्रपुर कोतवाली में मुकदमा दर्ज किया। शुरुआत में आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता यानी BNS की धारा 196(2) के तहत केस दर्ज किया गया था। यह धारा धार्मिक या सामुदायिक आधार पर वैमनस्य और तनाव पैदा करने वाले कृत्यों से जुड़ी है। मामले की विवेचना के दौरान पुलिस ने वायरल वीडियो, भाषण की स्क्रिप्ट और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच की। पुलिस का कहना है कि जांच में यह पाया गया कि भाषण के दौरान ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया, जिन्हें कानून-व्यवस्था और सांप्रदायिक सौहार्द के लिए संवेदनशील माना जा सकता है। इसके बाद आरोपी के खिलाफ BNS की धारा 152 भी बढ़ाई गई।
पुलिस के मुताबिक, वीडियो की तकनीकी जांच भी कराई गई। जांच के दौरान वीडियो के एडिटेड या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI से बनाए जाने के साक्ष्य नहीं मिले। पुलिस ने वीडियो में दिखाई दे रहे व्यक्ति और घटनास्थल से संबंधित तथ्यों का सत्यापन किया। इसके बाद विवेचना में सामने आए साक्ष्यों के आधार पर मुफ्ती मुजीब अहमद को आरोपी बनाया गया। पुलिस ने 29 अगस्त को मुफ्ती मुजीब अहमद को गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी से पहले उसे पूछताछ के लिए बुलाया गया था। पूछताछ और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने उसे औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष पेश करने की प्रक्रिया शुरू की। रिपोर्टों के मुताबिक, आरोपी को कोर्ट में पेश किए जाने के बाद जेल भेज दिया गया।
आरोपी मुफ्ती मुजीब अहमद मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले के दड़ियाल टांडा क्षेत्र का रहने वाला बताया जा रहा है। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि जुलूस के दौरान भाषण किस परिस्थिति में दिया गया, कार्यक्रम के आयोजकों की भूमिका क्या थी और भाषण के बाद वीडियो को सोशल मीडिया पर किसने प्रसारित किया। एसएसपी अजय गणपति ने कहा कि पुलिस ने वायरल वीडियो को गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई की। उन्होंने बताया कि भाषण में इस्तेमाल किए गए शब्दों और दिए गए बयानों की जांच की गई है। पुलिस का कहना है कि किसी भी व्यक्ति को ऐसा बयान देने की अनुमति नहीं दी जाएगी, जिससे जिले का माहौल खराब हो या धार्मिक समुदायों के बीच तनाव पैदा हो।
पुलिस ने आम लोगों से सोशल मीडिया पर भड़काऊ या विवादित सामग्री साझा न करने की अपील की है। अधिकारियों ने लोगों से कहा है कि वे किसी भी वीडियो या बयान पर तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय उसकी सत्यता की जांच करें और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने वाली गतिविधियों से दूर रहें। रुद्रपुर पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिले में शांति और सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखना प्राथमिकता है। एसएसपी ने चेतावनी दी कि यदि कोई व्यक्ति माहौल बिगाड़ने, भड़काऊ बयान देने या समुदायों के बीच तनाव पैदा करने की कोशिश करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस मामले की आगे की विवेचना कर रही है। जांच में भाषण के पूरे वीडियो, कार्यक्रम में मौजूद लोगों, आयोजकों और सोशल मीडिया पर वीडियो प्रसारित करने वालों की भूमिका की भी पड़ताल की जा सकती है। आरोपी के खिलाफ दर्ज धाराओं के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई न्यायालय में होने वाली सुनवाई और जांच से सामने आने वाले साक्ष्यों पर निर्भर करेगी।
सोशल मीडिया पर वीडियो सामने आने के बाद ऊधमसिंह नगर के एसएसपी अजय गणपति ने मामले का संज्ञान लिया। पुलिस ने वीडियो और उससे जुड़ी जानकारी की प्रारंभिक जांच के बाद रुद्रपुर कोतवाली में मुकदमा दर्ज किया। शुरुआत में आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता यानी BNS की धारा 196(2) के तहत केस दर्ज किया गया था। यह धारा धार्मिक या सामुदायिक आधार पर वैमनस्य और तनाव पैदा करने वाले कृत्यों से जुड़ी है। मामले की विवेचना के दौरान पुलिस ने वायरल वीडियो, भाषण की स्क्रिप्ट और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच की। पुलिस का कहना है कि जांच में यह पाया गया कि भाषण के दौरान ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया, जिन्हें कानून-व्यवस्था और सांप्रदायिक सौहार्द के लिए संवेदनशील माना जा सकता है। इसके बाद आरोपी के खिलाफ BNS की धारा 152 भी बढ़ाई गई।
पुलिस के मुताबिक, वीडियो की तकनीकी जांच भी कराई गई। जांच के दौरान वीडियो के एडिटेड या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI से बनाए जाने के साक्ष्य नहीं मिले। पुलिस ने वीडियो में दिखाई दे रहे व्यक्ति और घटनास्थल से संबंधित तथ्यों का सत्यापन किया। इसके बाद विवेचना में सामने आए साक्ष्यों के आधार पर मुफ्ती मुजीब अहमद को आरोपी बनाया गया। पुलिस ने 29 अगस्त को मुफ्ती मुजीब अहमद को गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी से पहले उसे पूछताछ के लिए बुलाया गया था। पूछताछ और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने उसे औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष पेश करने की प्रक्रिया शुरू की। रिपोर्टों के मुताबिक, आरोपी को कोर्ट में पेश किए जाने के बाद जेल भेज दिया गया।
आरोपी मुफ्ती मुजीब अहमद मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले के दड़ियाल टांडा क्षेत्र का रहने वाला बताया जा रहा है। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि जुलूस के दौरान भाषण किस परिस्थिति में दिया गया, कार्यक्रम के आयोजकों की भूमिका क्या थी और भाषण के बाद वीडियो को सोशल मीडिया पर किसने प्रसारित किया। एसएसपी अजय गणपति ने कहा कि पुलिस ने वायरल वीडियो को गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई की। उन्होंने बताया कि भाषण में इस्तेमाल किए गए शब्दों और दिए गए बयानों की जांच की गई है। पुलिस का कहना है कि किसी भी व्यक्ति को ऐसा बयान देने की अनुमति नहीं दी जाएगी, जिससे जिले का माहौल खराब हो या धार्मिक समुदायों के बीच तनाव पैदा हो।
पुलिस ने आम लोगों से सोशल मीडिया पर भड़काऊ या विवादित सामग्री साझा न करने की अपील की है। अधिकारियों ने लोगों से कहा है कि वे किसी भी वीडियो या बयान पर तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय उसकी सत्यता की जांच करें और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने वाली गतिविधियों से दूर रहें। रुद्रपुर पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिले में शांति और सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखना प्राथमिकता है। एसएसपी ने चेतावनी दी कि यदि कोई व्यक्ति माहौल बिगाड़ने, भड़काऊ बयान देने या समुदायों के बीच तनाव पैदा करने की कोशिश करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस मामले की आगे की विवेचना कर रही है। जांच में भाषण के पूरे वीडियो, कार्यक्रम में मौजूद लोगों, आयोजकों और सोशल मीडिया पर वीडियो प्रसारित करने वालों की भूमिका की भी पड़ताल की जा सकती है। आरोपी के खिलाफ दर्ज धाराओं के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई न्यायालय में होने वाली सुनवाई और जांच से सामने आने वाले साक्ष्यों पर निर्भर करेगी।
