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सिंधुदुर्ग के सरकारी अस्पतालों से हटेंगे 20 कालबाह्य मेडिकल उपकरण, सरकार ने दी धनलेखन की मंजूरी

महाराष्ट्र सरकार ने सिंधुदुर्ग जिले के सरकारी अस्पतालों में वर्षों से उपयोग में रहे लेकिन अब तकनीकी रूप से अनुपयोगी और कालबाह्य हो चुके 20 चिकित्सा उपकरणों (Medical Equipment) को धनलेखन (Write-off) करने की मंजूरी दे दी है। सार्वजनिक आरोग्य विभाग ने 4 अगस्त 2026 को इस संबंध में शासन निर्णय (Government Resolution) जारी किया। यह निर्णय जिला अस्पताल सिंधुदुर्ग, उपजिला अस्पताल सावंतवाड़ी, शिरोडा, कणकवली, वेंगुर्ला तथा ग्रामीण अस्पताल मालवण में स्थापित उपकरणों पर लागू होगा।

Vindhya Dubey07 अग. 2026, 05:14 PM IST
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सिंधुदुर्ग के सरकारी अस्पतालों से हटेंगे 20 कालबाह्य मेडिकल उपकरण, सरकार ने दी धनलेखन की मंजूरी
सरकार के इस फैसले के बाद इन अस्पतालों में वर्षों से खराब और उपयोग के योग्य नहीं रह गए उपकरणों को सरकारी रिकॉर्ड से हटाने तथा निर्धारित नियमों के अनुसार उनका निस्तारण (Disposal) किया जा सकेगा।

सरकार के पास क्यों पहुंचा प्रस्ताव?
सिंधुदुर्ग जिले के विभिन्न सरकारी अस्पतालों में ऐसे चिकित्सा उपकरणों की पहचान की गई थी, जिनकी खरीद कीमत ₹2 लाख से अधिक थी और जो अब पूरी तरह अनुपयोगी हो चुके हैं। वित्तीय अधिकार नियम पुस्तिका, 1978 के अनुसार ₹2 लाख से अधिक मूल्य वाले उपकरणों को धनलेखन करने का अधिकार राज्य सरकार के पास है। इसी कारण उपसंचालक, आरोग्य सेवा, कोल्हापुर मंडल की ओर से सहसंचालक, आरोग्य सेवा (राज्यस्तर) के माध्यम से यह प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा गया था। प्रस्ताव पर विचार करने के बाद महाराष्ट्र सरकार ने सिंधुदुर्ग जिले के छह सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में स्थापित कुल 20 चिकित्सा उपकरणों को धनलेखन की मंजूरी प्रदान कर दी।

किन नियमों के तहत मिली मंजूरी?
शासन ने यह मंजूरी वित्तीय अधिकार नियम पुस्तिका, 1978 के भाग-1, उपविभाग-1 के नियम 146 के तहत दी है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि सभी उपकरणों का धनलेखन निर्धारित सरकारी नियमों, सामान्य शर्तों एवं प्रक्रिया का पालन करते हुए किया जाएगा।

धनलेखन वह प्रशासनिक प्रक्रिया है, जिसके तहत ऐसे सरकारी उपकरण या मशीनें जो तकनीकी रूप से अनुपयोगी हो चुकी हों, जिनकी मरम्मत संभव न हो, स्पेयर पार्ट्स उपलब्ध न हों या जिनकी मरम्मत आर्थिक रूप से लाभदायक न हो, उन्हें सरकारी संपत्ति के रिकॉर्ड से हटाया जाता है। इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत उनका निस्तारण किया जाता है। इसका अर्थ यह नहीं है कि अस्पतालों से कार्यरत मशीनें हटाई जा रही हैं। केवल वे उपकरण हटाए जाएंगे जिन्हें विशेषज्ञों द्वारा उपयोग के लिए असुरक्षित या पूरी तरह अनुपयोगी घोषित किया गया है। शासन निर्णय के अनुसार जिला अस्पताल सिंधुदुर्ग, उपजिला अस्पताल सावंतवाड़ी, शिरोडा, कणकवली, वेंगुर्ला तथा ग्रामीण अस्पताल मालवण के कुल 20 चिकित्सा उपकरणों को धनलेखन की मंजूरी दी गई है।

जिला अस्पताल सिंधुदुर्ग में सबसे अधिक 13 उपकरण
जिला अस्पताल सिंधुदुर्ग में कुल 13 उपकरणों को धनलेखन के लिए मंजूरी मिली है। इनमें शामिल हैं-
  • Pediatric Ventilator
  • Mobile C-Arm Image Intensifier
  • दो Respirator Ventilator
  • Fiberoptic Bronchoscope
  • Gastroscope
  • Defibrillator
  • तीन Ventilator
  • दो Dragger Ventilator
इन उपकरणों में अधिकांश में मदरबोर्ड, कंट्रोल सर्किट, पीसीबी, सॉफ्टवेयर, डिस्प्ले बोर्ड, पावर सप्लाई और बैटरी जैसी गंभीर तकनीकी खराबियां पाई गईं। कई मशीनों के स्पेयर पार्ट्स बाजार में उपलब्ध नहीं हैं, जबकि कुछ उपकरणों की भौतिक स्थिति अत्यंत खराब हो चुकी है। कुछ मशीनों को अस्पताल प्रशासन ने मरीजों के लिए असुरक्षित भी बताया है।

  • सावंतवाड़ी उपजिला अस्पताल: यहां स्थापित 300 mA X-Ray Machine को धनलेखन की मंजूरी दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार इसका कंट्रोल पैनल खराब है, मशीन अत्यधिक पुरानी हो चुकी है और अब उपयोग योग्य नहीं है।
  • शिरोडा उपजिला अस्पताल: यहां की 300 mA X-Ray Machine का ट्यूब हेड जल चुका है, कंट्रोल पैनल खराब है तथा संबंधित कंपनी की ओर से आवश्यक तकनीकी सहायता उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। इसी कारण इसे अनुपयोगी घोषित किया गया।
  • कणकवली उपजिला अस्पताल: कणकवली अस्पताल में तीन उपकरणों को धनलेखन की मंजूरी मिली है; Mobile C-Arm Machine, Horizontal Cylindrical Waste Autoclave, Vella Ventilator इनमें Mobile C-Arm Machine की PCB खराब है तथा मशीन की स्थिति इतनी खराब है कि उसकी मरम्मत आर्थिक रूप से संभव नहीं है। Autoclave पूरी तरह जंग खा चुका है और मरम्मत योग्य नहीं है। वहीं Vella Ventilator का मुख्य कंट्रोल सर्किट बोर्ड खराब हो चुका है।
  • वेंगुर्ला उपजिला अस्पताल: यहां स्थापित 60 mA X-Ray Machine का कंट्रोल पैनल खराब हो चुका है। मशीन पुरानी हो चुकी है और इसके स्पेयर पार्ट्स भी बाजार में उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए इसे भी धनलेखन के लिए मंजूरी दी गई है।
  • ग्रामीण अस्पताल मालवण: मालवण के ग्रामीण अस्पताल में Cell Analyser को धनलेखन की मंजूरी मिली है। जांच में पाया गया कि इसकी WBC Assembly खराब हो चुकी है तथा अंदर की ट्यूबें पूरी तरह चोक हो गई हैं, जिसके कारण मशीन का उपयोग संभव नहीं है।

20 उपकरणों की कुल खरीद कीमत एक करोड़ रुपये से अधिक
शासन निर्णय के अनुसार इन 20 उपकरणों की कुल मूल खरीद कीमत लगभग ₹1.11 करोड़ (₹1,10,95,507) है। वर्तमान अवशिष्ट (Residual) मूल्य लगभग ₹11.09 लाख (₹11,09,551) दर्शाया गया है। हालांकि, तकनीकी रूप से अनुपयोगी होने के कारण इन्हें सरकारी रिकॉर्ड से हटाने का निर्णय लिया गया है। महत्वपूर्ण बात यह है कि यह शासन निर्णय केवल पुराने एवं अनुपयोगी चिकित्सा उपकरणों को धनलेखन करने से संबंधित है। इसमें कहीं भी नए उपकरणों की खरीद या अस्पतालों को नई मशीनें उपलब्ध कराने का प्रावधान नहीं किया गया है। नए उपकरणों की खरीद के लिए अलग प्रशासनिक एवं वित्तीय प्रक्रिया अपनाई जाएगी।