लखनऊ: परिवार नियोजन को लेकर महिलाओं में बढ़ती जागरूकता का सकारात्मक असर अब सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था के आंकड़ों में भी दिखाई देने लगा है। स्वास्थ्य विभाग और सरकारी अस्पतालों के आंकड़े बताते हैं कि दो बच्चों के बाद परिवार नियोजन अपनाने वाली महिलाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। इससे न केवल छोटे परिवार की सोच को बल मिला है, बल्कि जनसंख्या वृद्धि की रफ्तार को नियंत्रित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, वर्ष 2025-26 में सरकारी अस्पतालों में महिला नसबंदी और अन्य परिवार नियोजन सेवाओं का लाभ लेने वाली महिलाओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। अधिकारियों का कहना है कि यह बदलाव लगातार चलाए जा रहे जागरूकता अभियानों, बेहतर परामर्श सेवाओं और सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध सुविधाओं का परिणाम है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पहले परिवार नियोजन को लेकर निर्णय लेने में महिलाओं की भूमिका सीमित रहती थी, लेकिन अब वे स्वयं आगे बढ़कर स्वास्थ्य केंद्रों में परामर्श ले रही हैं और अपनी आवश्यकताओं के अनुरूप परिवार नियोजन के साधन अपना रही हैं। इससे मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में सुधार के साथ-साथ परिवारों की आर्थिक और सामाजिक स्थिति पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। सरकारी अस्पतालों में कार्यरत स्वास्थ्यकर्मियों के अनुसार, महिलाओं को परिवार नियोजन के स्थायी और अस्थायी दोनों विकल्पों की जानकारी दी जा रही है। साथ ही उन्हें इन उपायों के लाभ, संभावित जोखिम और स्वास्थ्य संबंधी पहलुओं के बारे में भी जागरूक किया जाता है, ताकि वे सोच-समझकर निर्णय ले सकें।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले तीन वर्षों में कॉपर-टी जैसे अस्थायी गर्भनिरोधक साधनों को अपनाने वाली महिलाओं की संख्या में भी करीब 52 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इससे स्पष्ट होता है कि महिलाएं अब स्थायी उपायों के साथ-साथ लंबे समय तक प्रभावी रहने वाले गर्भनिरोधक विकल्पों को भी प्राथमिकता दे रही हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि परिवार नियोजन केवल जनसंख्या नियंत्रण का माध्यम नहीं, बल्कि महिलाओं के स्वास्थ्य, सुरक्षित मातृत्व, बच्चों के बेहतर पालन-पोषण और परिवार की आर्थिक स्थिरता से भी जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। ऐसे में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
विश्व जनसंख्या दिवस जैसे अवसरों पर स्वास्थ्य विभाग लोगों से अपील कर रहा है कि वे परिवार नियोजन से जुड़े वैज्ञानिक और सुरक्षित उपायों को अपनाएं तथा सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर उपलब्ध निःशुल्क परामर्श और सेवाओं का लाभ उठाएं। इससे स्वस्थ परिवार और संतुलित समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान मिल सकता है।