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हर महीने होने वाले तेज पीरियड दर्द को न करें नजरअंदाज, नई रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
माहवारी के दौरान हल्का दर्द सामान्य हो सकता है, लेकिन अगर दर्द बहुत तेज हो और रोजमर्रा की गतिविधियों को प्रभावित करे तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार या बढ़ता हुआ पीरियड दर्द एंडोमेट्रियोसिस जैसी स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकता है। भारत में हुई नई जेनेटिक रिसर्च ने भी इस बीमारी के संभावित आनुवंशिक संबंधों पर नई जानकारी सामने रखी है।

महिलाओं में माहवारी के दौरान होने वाले दर्द को अक्सर सामान्य मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। लेकिन अगर पीरियड्स का दर्द इतना तेज हो कि रोजमर्रा के काम, पढ़ाई या नौकरी प्रभावित होने लगे, बार-बार लौटे या समय के साथ बढ़ता जाए, तो इसे सामान्य मासिक धर्म का हिस्सा मानकर टालना सही नहीं है। विशेषज्ञों के मुताबिक, ऐसे लक्षण एंडोमेट्रियोसिस जैसी बीमारी की ओर संकेत कर सकते हैं। एंडोमेट्रियोसिस एक ऐसी स्थिति है, जिसमें गर्भाशय की अंदरूनी परत जैसी कोशिकाएं गर्भाशय के बाहर विकसित होने लगती हैं। इससे सूजन और दर्द की समस्या हो सकती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, यह स्थिति प्रजनन आयु की महिलाओं में लगभग 10 प्रतिशत तक प्रभावित कर सकती है और इसके कारण होने वाला दर्द कई बार इतना गंभीर होता है कि महिला को स्कूल, काम या सामान्य गतिविधियों से दूर रहना पड़ सकता है।
तेज दर्द को नजरअंदाज करना क्यों चिंता की बात है
सामान्य पीरियड्स में हल्का या मध्यम दर्द होना आम बात हो सकती है। लेकिन ऐसा दर्द जो लगातार बेहद तेज हो, सामान्य गतिविधियों को रोक दे या हर महीने बढ़ता महसूस हो, चिकित्सकीय जांच की जरूरत का संकेत हो सकता है। एंडोमेट्रियोसिस में दर्द केवल माहवारी के दिनों तक सीमित नहीं भी रह सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, बहुत अधिक दर्द के साथ अत्यधिक रक्तस्राव, लगातार पेल्विक दर्द या ऐसे लक्षण जो रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करें, उन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
भारत में सामने आई नई जेनेटिक रिसर्च
इसी बीच भारत में एंडोमेट्रियोसिस को लेकर हुई एक महत्वपूर्ण जीनोम रिसर्च ने बीमारी के संभावित आनुवंशिक संबंधों पर नई जानकारी दी है। भारतीय महिलाओं पर किए गए इस अध्ययन में 21 ऐसे आनुवंशिक क्षेत्रों की पहचान की गई, जिनका एंडोमेट्रियोसिस से संभावित संबंध पाया गया। शोधकर्ताओं ने हालांकि स्पष्ट किया है कि इन निष्कर्षों का इस्तेमाल अभी किसी व्यक्ति में बीमारी के जोखिम की भविष्यवाणी या क्लीनिकल टेस्ट के रूप में नहीं किया जा सकता। इस अध्ययन में देशभर के 18 केंद्रों से मरीजों और प्रतिभागियों को शामिल किया गया। शोध का उद्देश्य यह समझना था कि भारतीय महिलाओं में एंडोमेट्रियोसिस के पीछे आनुवंशिक कारक किस तरह भूमिका निभा सकते हैं। शोधकर्ताओं के मुताबिक, यह अध्ययन भविष्य में बीमारी की जल्दी पहचान, बेहतर निदान और उपचार के नए रास्तों पर रिसर्च का आधार बन सकता है।
बीमारी की पहचान में क्यों लग सकता है समय
एंडोमेट्रियोसिस की पहचान कई बार देर से होती है क्योंकि इसके लक्षण अलग-अलग महिलाओं में अलग हो सकते हैं और गंभीर पीरियड दर्द को लंबे समय तक सामान्य मान लिया जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन भी बताता है कि पीरियड से जुड़े दर्द को सामाजिक धारणाओं और झिझक के कारण अक्सर कम करके आंका जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि बार-बार होने वाला या बढ़ता हुआ तेज दर्द शरीर का ऐसा संकेत हो सकता है जिसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर चिकित्सकीय सलाह लेने से लक्षणों के कारण की पहचान करने और उचित उपचार की दिशा तय करने में मदद मिल सकती है।
कब डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी
अगर माहवारी का दर्द इतना अधिक हो कि सामान्य गतिविधियां प्रभावित हों, दर्द लगातार या हर चक्र में बढ़ रहा हो, या इसके साथ असामान्य रूप से अधिक रक्तस्राव और लगातार पेल्विक दर्द जैसी समस्याएं हों, तो डॉक्टर से सलाह लेना उचित है। हर तेज पीरियड दर्द का कारण एंडोमेट्रियोसिस नहीं होता, इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर खुद से बीमारी तय नहीं करनी चाहिए। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मुख्य संदेश यही है कि माहवारी के दौरान होने वाले दर्द को सिर्फ इसलिए सामान्य नहीं मानना चाहिए क्योंकि वह हर महीने होता है। अगर दर्द जीवन की सामान्य गतिविधियों में बाधा डाल रहा है, तो उसके पीछे का कारण जानना जरूरी है।
