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नकली सौंदर्य प्रसाधनों का बढ़ता जाल, खूबसूरती के नाम पर स्वास्थ्य से खिलवाड़
खूबसूरत दिखने की चाह में ग्राहक अक्सर महंगे क्रीम, फेसवॉश, लिपस्टिक और स्किन केयर उत्पाद खरीदते हैं, लेकिन असली ब्रांड के नाम पर मिलने वाला नकली या मिलावटी कॉस्मेटिक त्वचा के लिए गंभीर नुकसान का कारण बन सकता है। ऐसे उत्पादों से एलर्जी, खुजली, जलन, लालिमा, मुंहासे, सूजन और त्वचा पर दाग-धब्बे जैसी समस्याएं हो सकती हैं। ऑनलाइन और क्विक-कॉमर्स खरीदारी बढ़ने के साथ ग्राहकों के लिए असली और नकली उत्पाद में फर्क करना और भी मुश्किल हो गया है।

महाराष्ट्र में 1.52 करोड़ रुपये के अवैध कॉस्मेटिक्स जब्त
महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन की जून 2026 की कार्रवाई में मुंबई और भिवंडी से करीब 1.52 करोड़ रुपये के अवैध कॉस्मेटिक्स और निर्माण उपकरण जब्त किए गए। मुंबई के अंधेरी पूर्व में एक इकाई से शैंपू, लोशन, पाउडर, सनस्क्रीन और अन्य सौंदर्य उत्पाद मिले। कई उत्पादों पर बैच नंबर, निर्माण और समाप्ति तिथि जैसी जरूरी जानकारियां नहीं थीं। भिवंडी की एक इकाई बिना लाइसेंस संचालित पाई गई। वहां कथित तौर पर ‘सल्फेट फ्री’ और ‘पैराबेन फ्री’ उत्पाद तैयार किए जा रहे थे और ऑनलाइन बिक्री के लिए फर्जी पते का इस्तेमाल किया जा रहा था। जून में महाराष्ट्र में 34 निर्माण इकाइयों पर कार्रवाई के दौरान करीब 4.12 करोड़ रुपये के अवैध दवा, चिकित्सा उत्पाद और कॉस्मेटिक्स से जुड़े मामले सामने आए। 787 नमूनों में 35 गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे। नौ प्राथमिकी दर्ज हुईं और दो गिरफ्तारियां की गईं।
नागपुर में त्वचा को गोरा करने वाली ‘गोरी ब्यूटी क्रीम’ को लेकर गंभीर मामला सामने आया। एफडीए जांच में नमूने में पारे की मात्रा निर्धारित सीमा से 752 गुना अधिक पाए जाने की बात सामने आई। 4 जुलाई 2026 को इसकी बिक्री पर रोक लगाई गई। ‘फेस फ्रेश गोल्ड ब्यूटी क्रीम एंड ब्यूटी सीरम’ और ‘गोल्डन स्टार ब्यूटी क्रीम’ भी जांच के दायरे में आए। इनमें पारा और सीसा निर्धारित सीमा से अधिक पाए जाने की बात सामने आई। भारी धातुओं के लंबे समय तक संपर्क से त्वचा, गुर्दे और तंत्रिका तंत्र पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
नकली उत्पादों का नेटवर्क कई राज्यों तक
नकली कॉस्मेटिक्स का कारोबार महाराष्ट्र तक सीमित नहीं है। केरल में ‘ऑपरेशन सौंदर्य’ के तहत नकली साबुन और क्रीम बेचने वालों पर कार्रवाई हुई। एक इत्र में 95 प्रतिशत तक मिथाइल अल्कोहल पाए जाने की बात सामने आई। गुजरात के अहमदाबाद में नकली साबुन और फेसवॉश बनाने वाली इकाई से करीब 11.68 लाख रुपये का माल जब्त किया गया। दिल्ली में भी नकली हेयर-रिमूवल क्रीम बनाने वाली इकाई का भंडाफोड़ हुआ। दिल्ली-एनसीआर में अवधि समाप्त हो चुके महंगे कॉस्मेटिक्स को नए लेबल लगाकर बाजार में बेचने वाले नेटवर्क की जांच सामने आई। पुराने उत्पादों के निर्माण और समाप्ति संबंधी विवरण बदलकर उन्हें नए उत्पाद के रूप में बेचने का आरोप है। ऐसे उत्पादों को सैलून और खुदरा ग्राहकों तक पहुंचाने तथा सोशल मीडिया पर भारी छूट के जरिए बेचने की बात भी सामने आई।
ऑनलाइन खरीदारी सबसे बड़ी चुनौती
उपभोक्ता सर्वेक्षणों में ऑनलाइन मंच नकली कॉस्मेटिक्स के प्रमुख स्रोतों में सामने आए हैं। लोकलसर्किल्स के सर्वे में 23 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने ऑनलाइन मंच, ऐप या वेबसाइट को नकली उत्पाद मिलने का स्रोत बताया। इसके अलावा 18 प्रतिशत ने सामान्य या कॉस्मेटिक दुकानों और 14 प्रतिशत ने स्थानीय दुकानों या बाजार स्टॉल का उल्लेख किया। हालांकि ये आंकड़े पूरे बाजार में नकली उत्पादों की वास्तविक हिस्सेदारी नहीं बताते, लेकिन ऑनलाइन बिक्री में विक्रेता सत्यापन और आपूर्ति श्रृंखला की निगरानी की जरूरत जरूर दिखाते हैं। लोकलसर्किल्स के सर्वे में 12,208 प्रतिक्रियाओं के आधार पर 40 प्रतिशत उपभोक्ताओं ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में खरीदे गए एक या अधिक कॉस्मेटिक बाद में उन्हें नकली लगे। 26 प्रतिशत ने किसी न किसी कॉस्मेटिक से एलर्जी की शिकायत की। हालांकि यह सर्वेक्षण उपभोक्ता अनुभवों पर आधारित है और इससे बाजार में नकली कॉस्मेटिक्स की वास्तविक हिस्सेदारी तय नहीं की जा सकती। नकली उत्पादों की पैकेजिंग अब इतनी समान हो सकती है कि पहली नजर में अंतर करना मुश्किल हो जाता है। लोगो, रंग, बारकोड और ब्रांड डिजाइन की नकल की जा सकती है। खरीदारी से पहले उपभोक्ता को निर्माता का नाम और पता, बैच नंबर, निर्माण तिथि, समाप्ति तिथि, विक्रेता की जानकारी और उत्पाद की वैधता से जुड़ी जानकारी जरूर देखनी चाहिए।
नकली कॉस्मेटिक्स पर नियंत्रण की जिम्मेदारी केवल ग्राहक की नहीं है। निर्माताओं, वितरकों, विक्रेताओं, ऑनलाइन मंचों और नियामक एजेंसियों को भी जवाबदेह बनाना जरूरी है। ऑनलाइन विक्रेताओं का अनिवार्य सत्यापन, उत्पाद की ट्रेसिंग, बैच और समाप्ति की जानकारी, नियमित नमूना जांच, प्रतिबंधित उत्पादों का सार्वजनिक डेटाबेस और आसान शिकायत व्यवस्था जैसे कदम जरूरी हैं। नकली कॉस्मेटिक्स का मामला केवल ब्रांड की नकल या ग्राहक के आर्थिक नुकसान तक सीमित नहीं है। गलत सामग्री, भारी धातु, खराब गुणवत्ता या अवधि समाप्त उत्पाद सीधे त्वचा और शरीर के संपर्क में आते हैं। महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में हुई कार्रवाई बताती है कि नकली सौंदर्य प्रसाधनों का नेटवर्क निर्माण इकाइयों से लेकर दुकानों, सैलून और ऑनलाइन मंचों तक फैला हो सकता है। ऐसे में खूबसूरती के उत्पाद खरीदते समय आकर्षक पैकेजिंग से ज्यादा जरूरी उनकी प्रामाणिकता और सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
