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जेके लोन अस्पताल में 24 घंटे में दो मातृ मौतें, सी-सेक्शन के बाद 25 वर्षीय महिला ने तोड़ा दम
कोटा के जेके लोन अस्पताल में करीब 24 घंटे के भीतर दूसरी मातृ मृत्यु का मामला सामने आया है। 25 वर्षीय करीना की सी-सेक्शन के बाद मौत हो गई। उन्होंने जुड़वा बच्चों, एक बेटा और एक बेटी, को जन्म दिया था। अस्पताल प्रशासन के अनुसार करीना को गर्भावस्था के दौरान उच्च रक्तचाप की समस्या थी और प्रसव के बाद उन्हें एक्लेम्पसिया, दौरे, ऑक्सीजन की कमी, ARDS और DIC जैसी गंभीर जटिलताएं हुईं। वहीं परिवार ने इलाज के दौरान एक फ्लूड दिए जाने के बाद हालत बिगड़ने का आरोप लगाया है। इससे एक दिन पहले 34 वर्षीय गंगोत्री की भी प्रसव के बाद मौत हुई थी। लगातार दो मातृ मौतों के बाद अस्पताल की प्रसूति एवं प्रसवोत्तर निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठे हैं, हालांकि दोनों मामलों में चिकित्सकीय लापरवाही की पुष्टि अभी जांच के बिना नहीं हुई है।
अस्पताल में प्रसव के बाद एक और महिला की मौत का मामला सामने आया है। 25 वर्षीय करीना की सी-सेक्शन के बाद उपचार के दौरान मौत हो गई। करीना ने ऑपरेशन के जरिए जुड़वा बच्चों को जन्म दिया था। नवजातों में एक बेटा और एक बेटी हैं। अस्पताल प्रशासन के अनुसार दोनों बच्चे फिलहाल स्वस्थ बताए जा रहे हैं। करीना की मौत से एक दिन पहले इसी अस्पताल में 34 वर्षीय गंगोत्री की भी प्रसव के बाद मौत हुई थी। इस तरह करीब 24 घंटे के भीतर दो मातृ मौतों ने अस्पताल की प्रसूति सेवाओं, हाई-रिस्क गर्भावस्था के प्रबंधन और प्रसव के बाद शुरुआती घंटों में महिलाओं की निगरानी को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है।
प्रसव पीड़ा के बाद अस्पताल पहुंची थी करीना
जानकारी के अनुसार करीना मंगलवार दोपहर प्रसव पीड़ा के बाद जेके लोन अस्पताल पहुंची थीं। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि अस्पताल आने के समय उनका ब्लड प्रेशर काफी बढ़ा हुआ था। चिकित्सकीय स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने तत्काल सी-सेक्शन करने का निर्णय लिया। ऑपरेशन के बाद करीना ने जुड़वा बच्चों को जन्म दिया। शुरुआती जानकारी के मुताबिक दोनों नवजात जीवित और स्वस्थ हैं। हालांकि डिलीवरी के कुछ समय बाद करीना की हालत अचानक बिगड़ने लगी। मेडिकल टीम ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए उपचार शुरू किया, लेकिन उनकी हालत लगातार गंभीर होती चली गई और अंततः उनकी मौत हो गई।
गर्भावस्था के सातवें महीने से चल रही थी ब्लड प्रेशर की दवा
जेके लोन अस्पताल की अधीक्षक डॉ. निर्मला शर्मा के अनुसार करीना की गर्भावस्था के शुरुआती महीनों में ब्लड प्रेशर सामान्य था, लेकिन बाद में उन्हें उच्च रक्तचाप की समस्या हुई। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक मेडिकल रिकॉर्ड में दर्ज था कि गर्भावस्था के सातवें महीने से उन्हें ब्लड प्रेशर नियंत्रित करने की दवा दी जा रही थी। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि अस्पताल पहुंचने के समय रक्तचाप काफी बढ़ा हुआ था। ऐसे में मां और गर्भस्थ बच्चों की स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों के सामने प्रसव कराने का निर्णय लेना जरूरी था। हाई ब्लड प्रेशर गर्भावस्था में मां और बच्चे दोनों के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है और कुछ मामलों में स्थिति तेजी से जानलेवा हो सकती है।
सी-सेक्शन के बाद एक्लेम्पसिया और दौरे की स्थिति
अस्पताल प्रशासन के अनुसार सी-सेक्शन के बाद करीना की हालत अचानक गंभीर हुई। चिकित्सकों ने प्रसवोत्तर एक्लेम्पसिया की स्थिति की बात कही, जिसके कारण उन्हें दौरे पड़ने लगे। एक्लेम्पसिया गर्भावस्था या प्रसव के आसपास होने वाली गंभीर स्थिति है, जिसमें उच्च रक्तचाप से जुड़ी जटिलताओं के बीच दौरे पड़ सकते हैं। यह स्थिति मां के मस्तिष्क, फेफड़ों, किडनी, लीवर और रक्त के थक्के बनने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है। समय पर उपचार नहीं मिलने पर यह मां के लिए जानलेवा हो सकती है। करीना के मामले में अस्पताल के अनुसार दौरे पड़ने के बाद उनकी ऑक्सीजन सैचुरेशन तेजी से गिरने लगी और रक्तचाप भी कम हो गया।
एस्पिरेशन के बाद ARDS और DIC की आशंका
चिकित्सकों के मुताबिक दौरे के दौरान एस्पिरेशन की स्थिति बनने के बाद फेफड़ों में गंभीर समस्या पैदा हुई। इसके बाद एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम यानी ARDS विकसित होने की आशंका जताई गई। ARDS में फेफड़ों की ऑक्सीजन को शरीर तक पहुंचाने की क्षमता गंभीर रूप से प्रभावित हो जाती है। इससे मरीज को सांस लेने में कठिनाई और रक्त में ऑक्सीजन की कमी हो सकती है। गंभीर मामलों में वेंटिलेटरी सपोर्ट की आवश्यकता पड़ सकती है। इसके साथ ही अस्पताल प्रशासन ने डिसेमिनेटेड इंट्रावैस्कुलर कोएगुलेशन यानी DIC जैसी गंभीर स्थिति का भी उल्लेख किया है। DIC में शरीर की रक्त जमने की प्रक्रिया असामान्य रूप से सक्रिय हो सकती है और इसके बाद रक्त के थक्के बनने तथा गंभीर रक्तस्राव दोनों का खतरा पैदा हो सकता है। प्रसूति संबंधी कुछ गंभीर परिस्थितियों में DIC तेजी से विकसित हो सकता है।
परिवार ने इलाज की प्रक्रिया पर उठाए सवाल
दूसरी ओर करीना के परिवार ने इलाज के दौरान उनकी हालत बिगड़ने की परिस्थितियों पर सवाल उठाए हैं। उनके पति अमीर खान ने किसी तरह की चिकित्सकीय गड़बड़ी की आशंका जताई है। परिवार का आरोप है कि एक फ्लूड दिए जाने के बाद करीना की स्थिति तेजी से बिगड़ी। उनका कहना है कि इससे पहले करीना अपेक्षाकृत ठीक थीं और रात में पानी भी मांग रही थीं। परिवार के मुताबिक गर्भावस्था के दौरान करीना नियमित रूप से सरकारी डॉक्टर से जांच कराती थीं और उन्हें किसी बेहद गंभीर जटिलता की जानकारी नहीं दी गई थी। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। इसलिए उपलब्ध जानकारी के आधार पर इलाज में लापरवाही का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। परिवार के आरोप और अस्पताल प्रशासन की ओर से बताए गए चिकित्सकीय कारणों के बीच अंतर को देखते हुए मेडिकल रिकॉर्ड और स्वतंत्र चिकित्सकीय जांच महत्वपूर्ण हो जाती है।
अस्पताल और परिवार के दावों में अंतर
इस मामले में फिलहाल घटनाक्रम के दो अलग-अलग पक्ष सामने आ रहे हैं। अस्पताल प्रशासन मौत को उच्च रक्तचाप, प्रसवोत्तर एक्लेम्पसिया, दौरे, ऑक्सीजन की कमी, संभावित एस्पिरेशन, ARDS और DIC जैसी गंभीर चिकित्सकीय जटिलताओं से जोड़ रहा है। वहीं परिवार का कहना है कि करीना की हालत इलाज के दौरान बिगड़ी और एक विशेष फ्लूड दिए जाने के बाद उनकी स्थिति में तेजी से गिरावट आई। इन दोनों दावों की वास्तविकता मेडिकल रिकॉर्ड, दवाओं और फ्लूड के विवरण, ऑपरेशन नोट, ऑक्सीजन एवं वाइटल्स की निगरानी, लैब रिपोर्ट और उपचार की टाइमलाइन की समीक्षा से ही स्पष्ट हो सकती है।
24 घंटे पहले गंगोत्री की भी हुई थी मौत
करीना की मौत से लगभग एक दिन पहले इसी अस्पताल में 34 वर्षीय गंगोत्री की भी प्रसव के बाद मौत हुई थी। गंगोत्री कोटा के कैथून क्षेत्र की रहने वाली बताई गई हैं। उन्होंने एक बच्चे को जन्म दिया था, जिसे शुरुआती जानकारी में स्वस्थ बताया गया। गंगोत्री की मौत के बाद उनके परिजनों ने अस्पताल में हंगामा किया था और चिकित्सकीय लापरवाही के आरोप लगाए थे। दूसरी ओर अस्पताल प्रशासन ने उनके मामले को हाई-रिस्क गर्भावस्था से जुड़ा बताया था। अस्पताल की ओर से उनके उच्च रक्तचाप और हेपेटाइटिस-बी से संबंधित चिकित्सकीय जानकारी का भी उल्लेख किया गया था। लगभग एक ही समय अवधि में दो महिलाओं की प्रसव के बाद मौत ने अस्पताल की मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर चिंता बढ़ा दी है। हालांकि दोनों मामलों को एक-दूसरे से जोड़ना या किसी समान कारण का निष्कर्ष निकालना जांच के बिना उचित नहीं होगा।
हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी की निगरानी सबसे बड़ा मुद्दा
करीना और गंगोत्री के मामलों के बाद सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक हाई-रिस्क गर्भावस्था की पहचान और लगातार निगरानी का है। गर्भावस्था के दौरान उच्च रक्तचाप, प्री-एक्लेम्पसिया और एक्लेम्पसिया ऐसी स्थितियां हैं जिनमें मरीज की स्थिति अपेक्षाकृत कम समय में गंभीर हो सकती है। ऐसे मामलों में केवल प्रसव तक निगरानी पर्याप्त नहीं होती। डिलीवरी के बाद भी ब्लड प्रेशर, ऑक्सीजन सैचुरेशन, सांस लेने की स्थिति, चेतना का स्तर, दौरे, रक्तस्राव और अन्य महत्वपूर्ण संकेतकों की लगातार निगरानी आवश्यक होती है। विशेष रूप से सी-सेक्शन के बाद शुरुआती घंटों में महिला की स्थिति पर नजर रखना महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि ऑपरेशन और प्रसव के बाद कई प्रकार की जटिलताएं सामने आ सकती हैं।
प्रसव के बाद के शुरुआती घंटे बेहद महत्वपूर्ण
मातृ मृत्यु का एक बड़ा जोखिम प्रसव के बाद के समय में बना रहता है। प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव, उच्च रक्तचाप से संबंधित जटिलताएं, दौरे, संक्रमण, रक्त के थक्के, सांस से जुड़ी समस्या और एनेस्थीसिया या अन्य उपचार से संबंधित जटिलताएं तेजी से विकसित हो सकती हैं। इसी वजह से हाई-रिस्क गर्भवती महिलाओं के लिए प्रसव के बाद निगरानी की व्यवस्था उतनी ही महत्वपूर्ण होती है जितनी प्रसव से पहले की देखभाल। करीना के मामले में यदि अस्पताल प्रशासन द्वारा बताए गए एक्लेम्पसिया, ऑक्सीजन में गिरावट, ARDS और DIC जैसे क्रम की पुष्टि होती है, तो यह एक अत्यंत गंभीर प्रसवोत्तर मेडिकल इमरजेंसी का मामला माना जाएगा। वहीं यदि परिवार के आरोपों की जांच में उपचार संबंधी कोई अनियमितता सामने आती है, तो उसकी भी स्वतंत्र रूप से जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
मई में भी सामने आया था गंभीर मामला
जेके लोन अस्पताल में मातृ स्वास्थ्य से जुड़ी गंभीर घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं। मई 2026 में सी-सेक्शन के बाद एक महिला की मौत और दो अन्य महिलाओं में किडनी से संबंधित गंभीर जटिलताओं की रिपोर्ट सामने आई थी। उस समय अस्पताल प्रशासन ने मृत महिला की स्थिति को गंभीर बताते हुए कार्डियक जटिलताओं का उल्लेख किया था, जबकि परिवार की ओर से उपचार को लेकर सवाल उठाए गए थे। इन घटनाओं के बाद अस्पताल में प्रसूति सेवाओं और गंभीर मरीजों के प्रबंधन को लेकर चर्चा तेज हुई थी। इसके बाद न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल और जेके लोन अस्पताल में प्रसव के बाद महिलाओं की मौत तथा गंभीर जटिलताओं से जुड़े मामलों की समीक्षा के लिए विशेषज्ञ समितियों के गठन की जानकारी भी सामने आई थी। अलग-अलग मामलों में अलग-अलग चिकित्सकीय कारणों की समीक्षा किए जाने की बात कही गई थी।
जांच से ही साफ होगी मौत की वास्तविक वजह
करीना की मौत के मामले में अब सबसे महत्वपूर्ण भूमिका मेडिकल रिकॉर्ड की होगी। ऑपरेशन से पहले और बाद का ब्लड प्रेशर, ऑक्सीजन सैचुरेशन, दौरे का समय, दवाओं और फ्लूड का विवरण, लैब जांच, ब्लड क्लॉटिंग पैरामीटर, ऑक्सीजन या वेंटिलेटरी सपोर्ट और मरीज की स्थिति में बदलाव की पूरी टाइमलाइन यह समझने में मदद कर सकती है कि हालत किस क्रम में बिगड़ी। यदि जरूरत हो तो मेडिकल बोर्ड द्वारा ऑपरेशन रिकॉर्ड, नर्सिंग चार्ट, दवा चार्ट, एनेस्थीसिया रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की समीक्षा की जा सकती है। परिवार द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच भी इसी रिकॉर्ड के आधार पर की जानी चाहिए। किसी भी मातृ मृत्यु के मामले में केवल मृत्यु के अंतिम कारण को दर्ज करना पर्याप्त नहीं होता। यह देखना भी जरूरी होता है कि जोखिम की पहचान कब हुई, चिकित्सकीय हस्तक्षेप कितनी जल्दी किया गया, मरीज की निगरानी कितनी नियमित थी और गंभीर स्थिति सामने आने के बाद उपलब्ध संसाधनों का किस तरह इस्तेमाल किया गया।
जुड़वा नवजातों की जिम्मेदारी अब परिवार पर
करीना की मौत का सबसे संवेदनशील पहलू यह है कि उनके पीछे उनके नवजात जुड़वा बच्चे रह गए हैं। एक बेटा और एक बेटी अब अपनी मां के बिना हैं। एक तरफ परिवार 25 वर्षीय महिला की अचानक हुई मौत का कारण जानना चाहता है, वहीं दूसरी ओर अस्पताल इसे गंभीर चिकित्सकीय जटिलताओं का परिणाम बता रहा है। ऐसी स्थिति में भावनात्मक आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर पारदर्शी चिकित्सकीय समीक्षा जरूरी है। यदि किसी उपचार प्रक्रिया में गलती हुई है तो उसकी पहचान और जवाबदेही तय होना जरूरी है। वहीं यदि मौत वास्तव में गंभीर और अचानक विकसित हुई चिकित्सकीय जटिलताओं के कारण हुई है, तो परिवार को भी स्पष्ट और दस्तावेजी जानकारी मिलनी चाहिए ताकि मौत की परिस्थितियों को लेकर किसी तरह का संदेह न रहे।
24 घंटे में दो मौतों के बाद बढ़ी जवाबदेही की मांग
करीना की मौत और उससे एक दिन पहले गंगोत्री की मौत ने जेके लोन अस्पताल की प्रसूति सेवाओं पर सवाल जरूर खड़े किए हैं। हालांकि केवल समय की निकटता के आधार पर दोनों घटनाओं को किसी एक कारण से जोड़ना उचित नहीं होगा। फिर भी दो मातृ मौतों के इतने कम अंतराल में सामने आने के कारण अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के स्तर पर मामलों की विस्तृत समीक्षा महत्वपूर्ण हो जाती है। खासकर हाई-रिस्क गर्भावस्था, सी-सेक्शन के बाद निगरानी, एक्लेम्पसिया प्रबंधन, आपातकालीन प्रतिक्रिया, रक्तस्राव नियंत्रण और गंभीर श्वसन जटिलताओं से निपटने की व्यवस्था की समीक्षा की जरूरत दिखाई देती है। अब पूरे मामले में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित स्वास्थ्य विभाग या अस्पताल प्रशासन इन दोनों मातृ मृत्यु मामलों की विस्तृत चिकित्सकीय समीक्षा कराता है या नहीं। जांच में उपचार की पूरी प्रक्रिया, मौत के वास्तविक चिकित्सकीय कारण और किसी संभावित सिस्टम संबंधी कमी का पता चलना न केवल करीना के परिवार के लिए जरूरी है, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए भी महत्वपूर्ण होगा।
