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जिंदगी और मौत की जंग: सड़क नहीं थी, तो अपनों ने चादर की डोली बनाकर बचाई गर्भवती महिला की जान
महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले से सामने आई एक घटना ने आदिवासी क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की वास्तविक स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खालापुर तालुका के ऊंबराने वाडी में प्रसव पीड़ा से जूझ रही एक गर्भवती महिला तक एम्बुलेंस सड़क के अभाव में नहीं पहुंच सकी। मजबूरी में ग्रामीणों ने चादर का अस्थायी झूला बनाया और महिला को कई किलोमीटर तक कंधों पर उठाकर जंगल और उफनते नालों को पार करते हुए अस्पताल पहुंचाया।
Vindhya Dubey15 जुल. 2026, 04:28 PM IST

रायगढ़ जिले के खालापुर तालुका स्थित ऊंबराने वाडी में सड़क जैसी मूलभूत सुविधा का अभाव एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। यहां एक गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा शुरू होने के बाद तत्काल अस्पताल ले जाने की आवश्यकता थी, लेकिन गांव तक मोटर योग्य सड़क नहीं होने के कारण 108 एम्बुलेंस सेवा वहां पहुंच ही नहीं सकी। इसके बाद गांव के लोगों ने चादर से एक अस्थायी झूला तैयार किया और महिला को कंधों पर उठाकर कई किलोमीटर तक दुर्गम रास्तों से होकर चौंक ग्रामीण अस्पताल तक पहुंचाया। रास्ते में पथरीले जंगल, फिसलन भरे रास्ते और बारिश से उफनते नालों को पार करना पड़ा। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं और सड़क संपर्क को लेकर बहस तेज हो गई है।
जानकारी के अनुसार ऊंबराने वाडी मुंबई से लगभग 80 किलोमीटर दूर और मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे के खालापुर टोल प्लाजा से कुछ दूरी पर स्थित है। आधुनिक हाईवे के इतने करीब होने के बावजूद गांव तक आज भी पक्की सड़क नहीं पहुंची है। बारिश के मौसम में हालात और गंभीर हो जाते हैं, जिससे मरीजों और गर्भवती महिलाओं को अस्पताल तक पहुंचाना बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि केवल ऊंबराने वाडी ही नहीं, बल्कि आसपास की कई आदिवासी बस्तियां वर्षों से सड़क, बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाओं की मांग कर रही हैं। उनका आरोप है कि कई बार प्रशासन के सामने यह मुद्दा उठाया गया, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं निकला। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं और आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सरकारें लगातार दावे कर रही हैं। हालांकि, जमीनी स्तर पर कई दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों में आज भी सड़क संपर्क सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है।
