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इकलौते बेटे की मौत के बाद 52 वर्षीय महिला को मिली मातृत्व की उम्मीद, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने IVF की दी अनुमति
हाईकोर्ट ने कहा- केवल उम्र IVF से इनकार का आधार नहीं हो सकती, मेडिकल फिटनेस और विशेषज्ञों की राय होगी निर्णायक
Sonali17 जुल. 2026, 02:48 PM IST

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में 52 वर्षीय महिला और उसके पति को इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) कराने की अनुमति दे दी है। अदालत ने कहा कि यदि महिला चिकित्सकीय रूप से स्वस्थ और IVF के लिए उपयुक्त है, तो केवल इसलिए उसे मातृत्व के अवसर से वंचित नहीं किया जा सकता कि उसकी आयु 50 वर्ष से अधिक है। यह आदेश न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा की एकल पीठ ने 10 जुलाई 2026 को पारित किया।
याचिकाकर्ता दंपति ने अदालत को बताया कि वर्ष 2025 में उनके 21 वर्षीय इकलौते बेटे की पीलिया और मल्टी ऑर्गन फेल्योर के कारण मृत्यु हो गई थी। बेटे की मौत के बाद वे पूरी तरह निःसंतान हो गए। अधिक आयु के कारण उनके लिए प्राकृतिक रूप से संतान प्राप्त करना संभव नहीं था, इसलिए उन्होंने IVF का सहारा लेने का निर्णय लिया। हालांकि, जिस अस्पताल में उन्होंने उपचार के लिए आवेदन किया था, उसने Assisted Reproductive Technology (Regulation) Act, 2021 का हवाला देते हुए उनका आवेदन स्वीकार करने से इनकार कर दिया। अधिनियम के तहत महिलाओं के लिए ART/IVF सेवाओं की अधिकतम आयु 50 वर्ष तथा पुरुषों के लिए 55 वर्ष निर्धारित की गई है। अस्पताल ने इसी प्रावधान का हवाला देकर प्रक्रिया आगे बढ़ाने से मना कर दिया, जिसके बाद दंपति ने हाईकोर्ट का रुख किया।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि किसी भी महिला की पात्रता का निर्धारण केवल आयु के आधार पर नहीं किया जा सकता। यदि अधिकृत चिकित्सा संस्थान और विशेषज्ञ डॉक्टर यह राय देते हैं कि महिला IVF के लिए चिकित्सकीय रूप से फिट है और दंपति उपचार से जुड़े संभावित जोखिम स्वीकार करता है, तो केवल आयु सीमा के आधार पर उसे मातृत्व से वंचित करना उचित नहीं होगा। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि IVF कराने का अंतिम निर्णय संबंधित विशेषज्ञ डॉक्टरों और मेडिकल बोर्ड की चिकित्सकीय राय पर निर्भर करेगा।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि चिकित्सा संस्थान को मरीज की स्वास्थ्य स्थिति का मूल्यांकन करने और उपचार की व्यवहार्यता तय करने का अधिकार है, लेकिन केवल आयु का हवाला देकर आवेदन खारिज करना न्यायसंगत नहीं माना जा सकता। अदालत ने मामले की विशेष परिस्थितियों को देखते हुए दंपति को राहत प्रदान की। यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि हाल के महीनों में विभिन्न उच्च न्यायालयों ने ART Act, 2021 में निर्धारित आयु सीमा से जुड़े मामलों में विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए राहत दी है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 51 वर्षीय महिला को IVF की अनुमति दी थी, जबकि कलकत्ता हाईकोर्ट ने भी विशेष परिस्थितियों में आयु सीमा के बावजूद IVF की इजाजत दी। वहीं बॉम्बे हाईकोर्ट में 50 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं द्वारा ART Act की आयु सीमा को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई जारी है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय उन दंपतियों के लिए महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है, जो असाधारण परिस्थितियों के कारण ART Act में निर्धारित आयु सीमा से प्रभावित होते हैं। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि यह आदेश सामान्य नियम में बदलाव नहीं है, बल्कि मामले के विशेष तथ्यों और महिला की चिकित्सकीय फिटनेस को ध्यान में रखते हुए दिया गया है।
