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BMC के स्तन कैंसर महाअभियान में 27,886 महिलाओं की जांच, शुरुआती पहचान से बचाई जा सकती हैं हजारों जानें।

बीएमसी ने मुंबई में 298 स्थानों पर आयोजित स्तन कैंसर महाअभियान के तहत 27,886 महिलाओं की स्क्रीनिंग की। इस उपलब्धि को एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी स्थान मिला। अभियान का उद्देश्य महिलाओं में स्तन कैंसर की शुरुआती पहचान कर समय पर इलाज सुनिश्चित करना है। संदिग्ध मामलों को टाटा मेमोरियल, केईएम और अन्य विशेषज्ञ अस्पतालों में रेफर किया जाएगा।

Anshuman Mishra23 जुल. 2026, 07:57 PM IST
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BMC के स्तन कैंसर महाअभियान में 27,886 महिलाओं की जांच, शुरुआती पहचान से बचाई जा सकती हैं हजारों जानें।
मुंबई: मुंबई में 298 स्थानों पर चला विशेष स्क्रीनिंग अभियान, संदिग्ध मामलों को टाटा मेमोरियल, केईएम, नायर और अन्य अस्पतालों में रेफर किया जाएगा। स्तन कैंसर के प्रति जागरूकता बढ़ाने और महिलाओं में समय रहते बीमारी की पहचान सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने एक बड़े स्तर पर स्तन कैंसर जांच महाअभियान चलाया। इस अभियान के तहत मुंबई के 298 स्थानों पर एक साथ आयोजित विशेष शिविरों में 27,886 महिलाओं की स्क्रीनिंग की गई। इस उपलब्धि के लिए एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स ने बीएमसी के इस अभियान को सम्मानित भी किया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्तन कैंसर की पहचान शुरुआती चरण में हो जाए तो अधिकांश मामलों में इलाज सफल हो सकता है और मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। बीएमसी द्वारा आयोजित इस महाअभियान में हजारों महिलाओं ने स्वेच्छा से भाग लेकर स्वास्थ्य जांच कराई। इस अभियान को एक ही दिन में बड़ी संख्या में महिलाओं की स्क्रीनिंग के कारण एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में स्थान मिला। मुंबई की महापौर ऋतु तावड़े और उपमहापौर संजय घाडी को इस उपलब्धि के लिए सम्मानित किया गया। अभियान ने यह संदेश भी दिया कि महिलाएं अब अपने स्वास्थ्य के प्रति पहले की तुलना में अधिक जागरूक हो रही हैं।

स्तन कैंसर क्या है?
स्तन कैंसर महिलाओं में होने वाला सबसे सामान्य कैंसर है। यह तब विकसित होता है जब स्तन की कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं और गांठ या ट्यूमर का रूप ले लेती हैं। यदि समय पर इलाज न मिले तो यह शरीर के अन्य अंगों तक भी फैल सकता है। हालांकि शुरुआती चरण में इसकी पहचान होने पर उपचार की सफलता की संभावना काफी अधिक होती है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR), राष्ट्रीय कैंसर रजिस्ट्री कार्यक्रम (NCRP) और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार भारत में महिलाओं में सबसे अधिक पाए जाने वाले कैंसरों में स्तन कैंसर पहले स्थान पर है। हर वर्ष लाखों नए मामले सामने आते हैं और शहरी क्षेत्रों में इसकी संख्या लगातार बढ़ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि देर से जांच, जागरूकता की कमी और नियमित स्क्रीनिंग न होने के कारण कई मामलों का पता बीमारी के उन्नत चरण में चलता है।

डॉक्टरों के अनुसार यदि स्तन कैंसर का पता पहले या दूसरे चरण में चल जाए तो उपचार की सफलता 90 प्रतिशत या उससे अधिक हो सकती है। नियमित क्लिनिकल ब्रेस्ट एग्जाम, डॉक्टर की सलाह पर मैमोग्राफी और किसी भी असामान्य बदलाव की तुरंत जांच कराना जीवन बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यही कारण है कि बीएमसी जैसी सार्वजनिक स्वास्थ्य पहलें महिलाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।

किसे करानी चाहिए नियमित जांच?
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि 30 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं को नियमित स्वास्थ्य जांच करानी चाहिए। जिन महिलाओं के परिवार में स्तन कैंसर का इतिहास है, उन्हें और अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता होती है। यदि स्तन में गांठ, त्वचा में बदलाव, निप्पल से असामान्य स्राव या लगातार दर्द जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। बीएमसी ने बताया कि जांच के दौरान जिन महिलाओं में स्तन कैंसर की आशंका पाई जाएगी, उन्हें आगे की जांच और उपचार के लिए टाटा मेमोरियल अस्पताल, केईएम अस्पताल, नायर अस्पताल और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर मेमोरियल अस्पताल सहित अन्य विशेषज्ञ संस्थानों में रेफर किया जाएगा। इससे मरीजों को समय पर विशेषज्ञ उपचार मिल सकेगा।

महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह अभियान?
यह अभियान केवल एक रिकॉर्ड बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं में कैंसर के प्रति जागरूकता बढ़ाने, समय पर जांच कराने की आदत विकसित करने और मृत्यु दर कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। बड़े पैमाने पर स्क्रीनिंग से उन महिलाओं की पहचान संभव होती है जिन्हें शुरुआती अवस्था में इलाज की जरूरत है। इससे उपचार की लागत कम होती है, मरीज के ठीक होने की संभावना बढ़ती है और परिवारों पर बीमारी का सामाजिक एवं आर्थिक बोझ भी कम होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि देश के अन्य शहर भी इस तरह के सामुदायिक स्क्रीनिंग अभियान नियमित रूप से चलाएं तो भारत में स्तन कैंसर से होने वाली मौतों में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।