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पीरियड्स के पहले दिन सिल्वर मेडल, ज्ञानेश्वरी यादव ने महिलाओं के लिए लिखी प्रेरणा की नई कहानी
भारतीय वेटलिफ्टर ज्ञानेश्वरी यादव ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में महिलाओं की वेटलिफ्टिंग स्पर्धा में 111 किलोग्राम क्लीन एंड जर्क उठाकर और कुल 199 किलोग्राम का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए रजत पदक अपने नाम किया। लेकिन इस जीत से भी ज्यादा चर्चा उस खुलासे की हो रही है, जो उन्होंने प्रतियोगिता के बाद किया। ज्ञानेश्वरी ने बताया कि जिस दिन उन्होंने यह शानदार प्रदर्शन किया, वह उनके मासिक धर्म यानी पीरियड्स का पहला दिन था।

उन्होंने कहा, "आज मेरा पीरियड्स का पहला दिन था। मुझे नहीं पता था कि मेरा शरीर कैसी प्रतिक्रिया देगा, लेकिन मैंने पूरी ताकत से मुकाबला किया।" उनका यह बयान सोशल मीडिया से लेकर खेल जगत और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। यह केवल एक खिलाड़ी की व्यक्तिगत कहानी नहीं, बल्कि महिलाओं के स्वास्थ्य और खेल प्रदर्शन से जुड़े उन मिथकों को चुनौती देता है, जिनके कारण आज भी कई लड़कियां खेलों से दूरी बना लेती हैं।
क्या पीरियड्स के दौरान खेल प्रदर्शन प्रभावित होता है?
लंबे समय तक यह माना जाता रहा कि मासिक धर्म के दौरान महिलाएं अपनी पूरी क्षमता से प्रदर्शन नहीं कर सकतीं। हालांकि आधुनिक खेल विज्ञान इस धारणा को पूरी तरह सही नहीं मानता। विशेषज्ञों के अनुसार मासिक धर्म के दौरान होने वाले हार्मोनल बदलाव हर महिला के शरीर को अलग-अलग तरीके से प्रभावित करते हैं। कुछ खिलाड़ियों को पेट दर्द, ऐंठन, कमर दर्द, थकान, मतली, सिरदर्द या कमजोरी महसूस होती है, जबकि कई खिलाड़ी बिना किसी बड़ी परेशानी के सामान्य या उससे भी बेहतर प्रदर्शन कर पाती हैं। यही कारण है कि आज खेल विज्ञान "वन साइज फिट्स ऑल" की बजाय "इंडिविजुअल अप्रोच" पर जोर देता है।
वैज्ञानिक शोध क्या कहते हैं?
हाल के वर्षों में प्रकाशित कई अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों में पाया गया है कि मासिक धर्म का खेल प्रदर्शन पर प्रभाव सभी महिलाओं में समान नहीं होता। कुछ शोधों में शुरुआती दिनों में हल्की कमजोरी या दर्द की संभावना बताई गई है, लेकिन ताकत, मांसपेशियों की क्षमता और प्रदर्शन में स्थायी या सार्वभौमिक गिरावट के पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिले हैं। स्पोर्ट्स मेडिसिन विशेषज्ञों का कहना है कि किसी खिलाड़ी का प्रदर्शन कई अन्य कारकों पर भी निर्भर करता है, जैसे-
- प्रशिक्षण का स्तर
- मानसिक मजबूती
- पोषण
- पर्याप्त नींद
- शरीर में आयरन का स्तर
- हाइड्रेशन
- प्रतियोगिता का अनुभव
- दर्द की तीव्रता
यानी केवल पीरियड्स के आधार पर किसी खिलाड़ी की क्षमता का आकलन नहीं किया जा सकता।
ज्ञानेश्वरी की जीत क्यों है खास?
वेटलिफ्टिंग दुनिया के सबसे अधिक ताकत मांगने वाले खेलों में गिनी जाती है। इसमें खिलाड़ी को कुछ सेकंड के भीतर विस्फोटक शक्ति, संतुलन, तकनीक और मानसिक एकाग्रता का प्रदर्शन करना होता है। ऐसे खेल में पीरियड्स के पहले दिन 111 किलोग्राम क्लीन एंड जर्क उठाना केवल शारीरिक ताकत नहीं, बल्कि असाधारण मानसिक दृढ़ता का भी उदाहरण माना जा रहा है। उनकी इस उपलब्धि ने यह साबित किया कि सही तैयारी, आत्मविश्वास और इच्छाशक्ति के साथ महिलाएं कठिन परिस्थितियों में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकती हैं।
महिलाओं के स्वास्थ्य पर खुलकर बात करने की जरूरत
भारत सहित दुनिया के कई देशों में आज भी मासिक धर्म को लेकर सामाजिक झिझक बनी हुई है। स्कूलों, कॉलेजों और खेल संस्थानों में कई लड़कियां पीरियड्स के कारण अभ्यास छोड़ देती हैं या प्रतियोगिताओं में भाग लेने से हिचकिचाती हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि इस विषय पर खुलकर बातचीत होना बेहद जरूरी है ताकि खिलाड़ियों को समय पर चिकित्सकीय सलाह, पोषण, मानसिक सहयोग और आवश्यक सुविधाएं मिल सकें। ज्ञानेश्वरी यादव का सार्वजनिक बयान इस दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है। इससे युवा खिलाड़ियों को यह संदेश मिलता है कि पीरियड्स कोई ऐसी स्थिति नहीं है जिसे छिपाने की जरूरत हो।
हर महिला का अनुभव अलग होता है
हालांकि डॉक्टर यह भी स्पष्ट करते हैं कि ज्ञानेश्वरी का प्रदर्शन यह साबित नहीं करता कि हर महिला पीरियड्स के दौरान समान प्रदर्शन कर सकती है। कुछ महिलाओं को गंभीर दर्द, अत्यधिक रक्तस्राव, चक्कर, माइग्रेन या एंडोमेट्रियोसिस जैसी समस्याएं हो सकती हैं, जिनमें आराम या चिकित्सकीय उपचार की आवश्यकता पड़ सकती है। इसीलिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि महिला खिलाड़ियों को अपने शरीर के संकेतों को समझना चाहिए और आवश्यकता पड़ने पर प्रशिक्षक तथा डॉक्टर की मदद लेनी चाहिए।
खेल विज्ञान अब बदल रहा है
दुनिया की कई राष्ट्रीय टीमें और ओलंपिक कार्यक्रम अब महिला खिलाड़ियों के मासिक धर्म चक्र को ध्यान में रखकर प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार कर रहे हैं। कई देशों में खिलाड़ी अपने मेंस्ट्रुअल साइकिल को ट्रैक करती हैं ताकि प्रशिक्षण, रिकवरी और प्रतियोगिता की रणनीति को बेहतर बनाया जा सके। यह बदलाव महिला खेल विज्ञान को अधिक वैज्ञानिक और खिलाड़ी-केंद्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
प्रेरणा बनी ज्ञानेश्वरी यादव
ज्ञानेश्वरी यादव की 111 किलोग्राम की लिफ्ट केवल एक पदक जीतने की कहानी नहीं है। यह उस सोच को चुनौती देती है जो महिलाओं की शारीरिक क्षमता को मासिक धर्म से जोड़कर सीमित मानती है। उनका प्रदर्शन यह संदेश देता है कि हर महिला का शरीर अलग होता है और सही तैयारी, वैज्ञानिक दृष्टिकोण तथा आत्मविश्वास के साथ पीरियड्स के दौरान भी उत्कृष्ट प्रदर्शन संभव है। उनकी यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ी की महिला खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बन सकती है और समाज में मासिक धर्म से जुड़े मिथकों को तोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
