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महिलाओं की हेल्थ एजुकेशन पर बड़ा सवाल, आखिर क्यों नहीं सिखाया जाता पेल्विक फ्लोर?

यह एक महिला का व्यक्तिगत अनुभव है, लेकिन आज यह दुनिया भर में महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़े एक बड़े मुद्दे की ओर ध्यान आकर्षित कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि पेल्विक फ्लोर शरीर का बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा होने के बावजूद अधिकांश महिलाओं को इसके बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं होती। यही वजह है कि कई महिलाएं वर्षों तक पेशाब रिसाव, कमर दर्द, प्रसव के बाद की समस्याओं, पेल्विक दर्द और यौन स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियों का सामना करती रहती हैं, लेकिन उन्हें यह समझ ही नहीं आता कि इसकी जड़ पेल्विक फ्लोर की कमजोरी या खराब कार्यप्रणाली हो सकती है।

Vindhya Dubey30 जुल. 2026, 07:18 PM IST
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महिलाओं की हेल्थ एजुकेशन पर बड़ा सवाल, आखिर क्यों नहीं सिखाया जाता पेल्विक फ्लोर?


पेल्विक फ्लोर मांसपेशियों, लिगामेंट्स और संयोजी ऊतकों का एक समूह होता है, जो श्रोणि यानी पेल्विस के निचले हिस्से में मौजूद रहता है। यह मूत्राशय, गर्भाशय, आंत और अन्य महत्वपूर्ण अंगों को सहारा देने का काम करता है। इसके अलावा यह पेशाब और मल त्याग को नियंत्रित करने, गर्भावस्था और प्रसव के दौरान शरीर को सहारा देने तथा यौन स्वास्थ्य में भी अहम भूमिका निभाता है। यदि यह मांसपेशियां बहुत कमजोर या अत्यधिक कसी हुई हों, तो कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

महिलाओं को क्यों नहीं मिलती पर्याप्त जानकारी?

विशेषज्ञों के अनुसार स्कूलों और कॉलेजों में प्रजनन स्वास्थ्य पर पढ़ाई तो होती है, लेकिन पेल्विक फ्लोर की कार्यप्रणाली पर बहुत कम चर्चा की जाती है। अधिकांश महिलाओं को पहली बार इसके बारे में तब जानकारी मिलती है जब उन्हें गर्भावस्था, प्रसव, लगातार कमर दर्द या यूरिन लीकेज जैसी समस्या होने लगती है। फिजियोथेरेपिस्ट और महिला रोग विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किशोरावस्था से ही महिलाओं को पेल्विक फ्लोर की जानकारी दी जाए, तो भविष्य में कई समस्याओं से बचा जा सकता है।

किन महिलाओं में अधिक होता है खतरा?

विशेषज्ञों के अनुसार निम्न परिस्थितियों में पेल्विक फ्लोर प्रभावित हो सकता है—

  • गर्भावस्था और सामान्य प्रसव
  • बढ़ती उम्र
  • मोटापा
  • लंबे समय तक कब्ज रहना
  • बार-बार भारी वजन उठाना
  • लगातार खांसी
  • हार्मोनल बदलाव
  • अत्यधिक हाई-इम्पैक्ट एक्सरसाइज

हालांकि यह समस्या केवल मातृत्व से जुड़ी नहीं है। युवा, फिट और कभी गर्भवती न हुई महिलाओं में भी पेल्विक फ्लोर से जुड़ी समस्याएं देखी जा सकती हैं।

क्या हैं इसके सामान्य लक्षण?

यदि पेल्विक फ्लोर ठीक तरह से काम नहीं कर रहा हो, तो निम्न लक्षण दिखाई दे सकते हैं—

  • खांसने, छींकने या दौड़ने पर पेशाब का रिसाव
  • बार-बार पेशाब आने की इच्छा
  • पेल्विस में भारीपन या दबाव महसूस होना
  • कमर या पेल्विक क्षेत्र में लगातार दर्द
  • यौन संबंध के दौरान दर्द या असुविधा
  • मल त्याग में कठिनाई

यदि ये लक्षण लंबे समय तक बने रहें, तो विशेषज्ञ से परामर्श लेना जरूरी है।

क्या किया जा सकता है?

डॉक्टरों के अनुसार अधिकांश मामलों में जीवनशैली में बदलाव और सही व्यायाम से काफी सुधार संभव है। पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज, जिन्हें आमतौर पर "केगल एक्सरसाइज" कहा जाता है, मांसपेशियों को मजबूत बनाने में मदद कर सकती हैं। हालांकि विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि हर व्यक्ति के लिए एक जैसी एक्सरसाइज उपयुक्त नहीं होती। कुछ मामलों में मांसपेशियां पहले से ही अधिक कसी हुई होती हैं, जहां गलत व्यायाम समस्या बढ़ा सकता है। इसीलिए सही निदान के बाद प्रशिक्षित पेल्विक फ्लोर फिजियोथेरेपिस्ट या स्त्री रोग विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर माना जाता है।

जागरूकता बढ़ाना क्यों है जरूरी?

महिला स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि पेल्विक फ्लोर के बारे में जागरूकता बढ़ाने की उतनी ही जरूरत है जितनी मासिक धर्म, गर्भावस्था या स्तन स्वास्थ्य के बारे में है। शरीर के इस महत्वपूर्ण हिस्से को समझने से महिलाएं अपनी समस्याओं को पहचान सकती हैं, समय पर इलाज करा सकती हैं और भविष्य में होने वाली कई जटिलताओं से बच सकती हैं।

 29 वर्षीय महिला का यह अनुभव केवल एक व्यक्तिगत कहानी नहीं, बल्कि महिलाओं की स्वास्थ्य शिक्षा में मौजूद उस कमी की ओर इशारा करता है, जिसे दूर करना समय की जरूरत है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पेल्विक फ्लोर के बारे में सही जानकारी स्कूल स्तर से ही दी जाए, तो लाखों महिलाओं के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाया जा सकता है।