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10वीं बार मां बनने जा रही महिला ने C-Section से किया इनकार, हाई BP के बावजूद घर लौटी l
राजस्थान के खैरथल-तिजारा जिले में 10वीं बार गर्भवती हुई 9 बच्चों की मां का मामला चर्चा में है। महिला का रक्तचाप 170 से 190 के बीच पाए जाने के बाद डॉक्टरों ने गर्भावस्था को हाई रिस्क बताया और सुरक्षित प्रसव के लिए अस्पताल में विशेषज्ञों की निगरानी में रहने की सलाह दी। महिला को पहले अलवर और फिर जयपुर रेफर किया गया, लेकिन उसने अस्पताल जाने के बजाय घर लौटने का फैसला किया। अब स्वास्थ्य विभाग की टीम लगातार महिला और उसके परिवार को सुरक्षित संस्थागत प्रसव के लिए समझाने में जुटी है।

राजस्थान के खैरथल-तिजारा जिले में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। कोटकासिम ब्लॉक के मुनपुर ठाकरान खानपुर निवासी नारायण की पत्नी सरोज 10वीं बार गर्भवती हैं। उनके पहले से नौ बच्चे हैं। गर्भावस्था के दौरान नियमित स्वास्थ्य निगरानी की जा रही थी, लेकिन हाल ही में जांच के दौरान उनका रक्तचाप बेहद अधिक पाया गया। डॉक्टरों ने इसे गंभीर हाई रिस्क स्थिति मानते हुए अस्पताल में विशेषज्ञों की निगरानी में प्रसव कराने की सलाह दी। CMHO डॉ. अरविंद गेट के अनुसार, सरोज की नियमित निगरानी स्वास्थ्य सखी और एएनएम के स्तर पर की जा रही थी।
21 जुलाई को उन्हें उप स्वास्थ्य केंद्र खानपुर लाया गया था। यहां डॉक्टर श्रीपाल गुर्जर ने प्राथमिक जांच की। इसके बाद महिला को सीएचसी पूर में डॉ. मधु यादव के पास जांच के लिए भेजा गया। जांच के दौरान महिला का ब्लड प्रेशर 170 से 190 के बीच दर्ज किया गया। डॉक्टरों ने इतनी अधिक BP रीडिंग को गर्भावस्था के लिहाज से बेहद गंभीर माना। महिला की स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों ने सुरक्षित प्रसव और लगातार विशेषज्ञ निगरानी की जरूरत बताई। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, ऐसी स्थिति में घर पर प्रसव कराना महिला और गर्भस्थ शिशु दोनों के लिए जोखिम भरा हो सकता है। महिला की हालत को देखते हुए उसे 108 एंबुलेंस की मदद से अलवर के जनाना अस्पताल भेजा गया। वहां विशेषज्ञ चिकित्सकों ने जांच के बाद स्थिति को गंभीर मानते हुए महिला को आगे के इलाज के लिए जयपुर रेफर कर दिया। हालांकि, महिला जयपुर जाने के बजाय वापस अपने घर लौट आई।
महिला के घर लौटने के बाद स्वास्थ्य विभाग की चिंता और बढ़ गई। इसके बाद CMHO, BCMO, ब्लॉक स्तर के डॉक्टरों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों ने महिला तथा उसके परिजनों से लगातार संपर्क करना शुरू किया। टीम की ओर से महिला को अस्पताल में भर्ती होने और विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में प्रसव कराने के लिए समझाया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की टीम कई बार महिला के घर भी पहुंच चुकी है। अधिकारियों और स्वास्थ्यकर्मियों ने परिजनों को महिला की मौजूदा स्वास्थ्य स्थिति और संभावित जोखिमों के बारे में जानकारी दी है। इसके बावजूद महिला फिलहाल घर पर ही प्रसव कराने के फैसले पर कायम है और अस्पताल में भर्ती होने को तैयार नहीं है।
डॉक्टरों ने बताया हाई रिस्क मामला
CMHO के मुताबिक महिला की वर्तमान स्थिति बेहद संवेदनशील है। गर्भावस्था के दौरान अत्यधिक रक्तचाप को गंभीरता से लेना जरूरी है। ऐसे मामलों में अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में प्रसव कराने से किसी भी आपात स्थिति में तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जा सकती है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि उसका उद्देश्य महिला पर किसी तरह का दबाव बनाना नहीं, बल्कि उसे और उसके गर्भस्थ शिशु को संभावित खतरे से बचाना है। इसी वजह से विभाग की टीम लगातार महिला और उसके परिवार को अस्पताल में प्रसव कराने के फायदे समझा रही है।
अधिकारियों के मुताबिक महिला की स्थिति को देखते हुए समय पर चिकित्सकीय निगरानी बेहद जरूरी है। स्वास्थ्य विभाग की कोशिश है कि प्रसव से पहले महिला को अस्पताल में भर्ती कराया जाए, ताकि जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ डॉक्टर तत्काल उपचार उपलब्ध करा सकें। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग की टीम महिला के संपर्क में बनी हुई है और उसके स्वास्थ्य की निगरानी करने के साथ परिवार को सुरक्षित संस्थागत प्रसव के लिए लगातार समझाइश दे रही है।
