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महिलाओं की सुरक्षा को मजबूती, वन स्टॉप सेंटर से एक ही छत के नीचे मिल रही सभी जरूरी सेवाएं
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अनुसार, देशभर में 991 वन स्टॉप सेंटर (OSC) संचालित हैं, जिनके माध्यम से अप्रैल 2015 से जून 2026 तक 15.20 लाख से अधिक महिलाओं को चिकित्सा, कानूनी सहायता, पुलिस सहयोग, मनोसामाजिक परामर्श और अस्थायी आश्रय जैसी सेवाएं उपलब्ध कराई गई हैं। उत्तर प्रदेश में 124 वन स्टॉप सेंटर सक्रिय हैं, जहां अब तक 3.42 लाख से अधिक महिलाओं को सहायता मिली है। मिशन शक्ति योजना के तहत संचालित इन केंद्रों को महिला हेल्पलाइन, आपातकालीन सेवा 112 और अन्य सहायता तंत्रों से जोड़कर महिलाओं तक त्वरित और समन्वित सहायता पहुंचाई जा रही है।
Vindhya Dubey05 अग. 2026, 07:29 PM IST

नई दिल्ली: महिलाओं के खिलाफ बढ़ती हिंसा, घरेलू उत्पीड़न, यौन अपराध और सामाजिक असुरक्षा जैसी चुनौतियों के बीच केंद्र सरकार की वन स्टॉप सेंटर (One Stop Centre-OSC) योजना देशभर में संकटग्रस्त महिलाओं के लिए एक महत्वपूर्ण सहायता तंत्र बनकर उभरी है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अनुसार, 1 अप्रैल 2015 से 30 जून 2026 तक देशभर में 1033 वन स्टॉप सेंटरों को प्रशासनिक स्वीकृति दी जा चुकी है, जिनमें से 991 सेंटर पूरी तरह संचालित हैं। इन केंद्रों के माध्यम से अब तक 15.20 लाख से अधिक महिलाओं को तत्काल सहायता और विभिन्न प्रकार की सेवाएं उपलब्ध कराई जा चुकी हैं।
राज्यसभा में महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश में वर्तमान में 124 वन स्टॉप सेंटर संचालित हैं। इनमें वर्ष 2024-25 के दौरान 7 नए केंद्र और वर्ष 2025-26 में 36 नए केंद्र शुरू किए गए। इन केंद्रों के माध्यम से अब तक राज्य की 3.42 लाख से अधिक महिलाओं को सहायता मिली है। इनमें 2024-25 में 37,360 और 2025-26 में 52,278 महिलाओं को विभिन्न प्रकार की सेवाएं प्रदान की गईं।
क्या है वन स्टॉप सेंटर योजना?
वन स्टॉप सेंटर योजना की शुरुआत 1 अप्रैल 2015 को केंद्र सरकार ने निर्भया फंड के तहत की थी। बाद में इसे मिशन शक्ति (Mission Shakti) के 'संबल' (Sambal) उप-घटक में शामिल किया गया। इस योजना का उद्देश्य ऐसी महिलाओं और बालिकाओं को एक ही स्थान पर तत्काल और समन्वित सहायता उपलब्ध कराना है, जो किसी भी प्रकार की हिंसा, घरेलू प्रताड़ना, यौन शोषण, एसिड अटैक, मानव तस्करी, साइबर अपराध, दहेज उत्पीड़न या अन्य संकटपूर्ण परिस्थितियों का सामना कर रही हों।
इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि पीड़ित महिला को अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते। सभी आवश्यक सेवाएं एक ही परिसर में उपलब्ध कराई जाती हैं।
वन स्टॉप सेंटर में कौन-कौन सी सुविधाएं मिलती हैं?
इन केंद्रों में महिलाओं को तत्काल चिकित्सा सहायता, प्राथमिक उपचार, पुलिस सहायता, एफआईआर दर्ज कराने में सहयोग, निःशुल्क कानूनी सलाह, न्यायालयी प्रक्रिया में मार्गदर्शन, मनोसामाजिक परामर्श (Psychosocial Counselling), अस्थायी सुरक्षित आश्रय तथा आवश्यकतानुसार अन्य सरकारी योजनाओं से जोड़ने जैसी सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। कई मामलों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से न्यायिक प्रक्रिया में भी सहायता दी जाती है।
मिशन शक्ति के तहत कैसे होता है संचालन?
वन स्टॉप सेंटर मिशन शक्ति योजना के अंतर्गत संचालित किए जाते हैं। यह केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसका क्रियान्वयन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा किया जाता है। केंद्र सरकार 'संबल' उप-योजना के तहत राज्यों को 100 प्रतिशत वित्तीय सहायता उपलब्ध कराती है। धनराशि सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (PFMS) के माध्यम से जारी की जाती है ताकि पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित की जा सके।
महिलाओं तक सहायता पहुंचाने के लिए बढ़ाया गया नेटवर्क
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने वन स्टॉप सेंटरों को महिला हेल्पलाइन (181) के साथ जोड़ने की दिशा में भी बड़ा कदम उठाया है। अब तक 661 वन स्टॉप सेंटर महिला हेल्पलाइन से एकीकृत किए जा चुके हैं। इसके अलावा महिला हेल्पलाइन को आपातकालीन सेवा 112, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 तथा अन्य आपातकालीन सेवाओं से भी जोड़ा गया है, ताकि किसी भी संकट की स्थिति में महिलाओं को तुरंत सहायता मिल सके और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो।
कर्मचारियों को दिया जा रहा विशेष प्रशिक्षण
सिर्फ केंद्र खोलना ही पर्याप्त नहीं माना गया है, बल्कि वहां कार्यरत कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके लिए राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य एवं तंत्रिका विज्ञान संस्थान (NIMHANS), संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA), सावित्रीबाई फुले राष्ट्रीय महिला एवं बाल विकास संस्थान (SPNIWCD), राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) और सी-डैक (C-DAC) जैसे संस्थानों के विशेषज्ञ नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करते हैं। इनमें लैंगिक हिंसा से जुड़े मामलों का प्रबंधन, मनोसामाजिक परामर्श, कानूनी सहायता, जेंडर संवेदनशीलता और डिजिटल डैशबोर्ड संचालन जैसे विषय शामिल हैं।
रियल-टाइम निगरानी से बढ़ी पारदर्शिता
योजना के प्रभावी संचालन के लिए महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने मिशन शक्ति डैशबोर्ड विकसित किया है। इसके माध्यम से जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर सभी वन स्टॉप सेंटरों की कार्यप्रणाली की वास्तविक समय (Real-Time) में निगरानी की जाती है। इसके अलावा कार्यक्रम अनुमोदन बोर्ड (Programme Approval Board-PAB) प्रत्येक वर्ष राज्यों के साथ बैठक कर योजना की समीक्षा करता है, जबकि मंत्रालय के अधिकारी समय-समय पर वीडियो कॉन्फ्रेंस, समीक्षा बैठक और फील्ड विजिट के जरिए भी प्रगति का मूल्यांकन करते हैं।
यह योजना क्यों महत्वपूर्ण है?
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़े बताते हैं कि महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामलों में लगातार बड़ी संख्या सामने आती है। ऐसे में वन स्टॉप सेंटर पीड़ित महिलाओं के लिए एक सुरक्षित और भरोसेमंद सहायता केंद्र के रूप में काम करते हैं। यहां एक ही स्थान पर चिकित्सा, कानूनी, पुलिस और मनोवैज्ञानिक सहायता उपलब्ध होने से पीड़िता को त्वरित राहत मिलती है और न्याय तक उसकी पहुंच आसान होती है।
इस योजना का एक बड़ा सामाजिक प्रभाव यह भी है कि हिंसा की शिकार महिलाएं बिना किसी डर या भेदभाव के अपनी शिकायत दर्ज करा सकती हैं। इससे महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ता है, न्याय व्यवस्था तक उनकी पहुंच मजबूत होती है और समाज में लैंगिक समानता तथा महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा मिलता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वन स्टॉप सेंटर केवल राहत केंद्र नहीं हैं, बल्कि महिलाओं की गरिमा, सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा करने वाला एक समग्र सहायता तंत्र हैं। यदि इन केंद्रों का विस्तार ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों तक प्रभावी ढंग से किया जाए, जागरूकता अभियान बढ़ाए जाएं और स्थानीय संस्थाओं के साथ समन्वय मजबूत किया जाए, तो महिलाओं के खिलाफ हिंसा से निपटने की दिशा में भारत और अधिक प्रभावी कदम उठा सकेगा। यह योजना न केवल संकट के समय तत्काल सहायता प्रदान करती है, बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर, सुरक्षित और न्यायपूर्ण जीवन की ओर आगे बढ़ने का अवसर भी देती है।
