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गर्भवती महिलाओं की देखभाल, पोषण और कल्याण के लिए सरकार के बड़े कदम

केंद्र सरकार ने देश में मातृ स्वास्थ्य को मजबूत करने और गर्भवती महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं, पोषण सहायता और आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराने के लिए कई योजनाएं और कार्यक्रम लागू किए हैं। सरकार का लक्ष्य गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को समय पर गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना, मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करना और हर महिला को सुरक्षित मातृत्व का अधिकार सुनिश्चित करना है।

Vindhya Dubey07 अग. 2026, 07:45 PM IST
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गर्भवती महिलाओं की देखभाल, पोषण और कल्याण के लिए सरकार के बड़े कदम

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुसार, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत गर्भवती महिलाओं के लिए मुफ्त प्रसव सेवाएं, एंटीनेटल और पोस्टनेटल केयर, पोषण सहायता तथा मातृत्व लाभ योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इन योजनाओं के माध्यम से गर्भावस्था से लेकर प्रसव और प्रसव के बाद तक महिलाओं को स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ा जा रहा है।

जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम से मुफ्त प्रसव सुविधा

जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम (JSSK) के तहत सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में प्रसव कराने वाली सभी गर्भवती महिलाओं को निशुल्क और बिना किसी खर्च के प्रसव की सुविधा दी जाती है। इसमें सामान्य प्रसव के साथ-साथ सिजेरियन डिलीवरी भी शामिल है। योजना के तहत गर्भवती महिलाओं को मुफ्त दवाएं, जांच सामग्री, भोजन, जांच सुविधाएं, परिवहन और जरूरत पड़ने पर रक्त चढ़ाने की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। इसके अलावा एक वर्ष तक के बीमार शिशुओं को भी इसी तरह की निशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं दी जाती हैं।

हर महीने मुफ्त जांच की सुविधा

प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMSMA) के तहत गर्भवती महिलाओं को प्रत्येक महीने की 9 तारीख को विशेषज्ञ डॉक्टरों और चिकित्सा अधिकारियों द्वारा मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण प्रसव पूर्व जांच (ANC) की सुविधा दी जाती है। इस अभियान का उद्देश्य गर्भावस्था के दौरान जोखिम वाली स्थितियों की पहचान करना और समय रहते उपचार उपलब्ध कराना है। इसके तहत हाई रिस्क प्रेग्नेंसी वाली महिलाओं की विशेष निगरानी की जाती है।

हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं पर विशेष ध्यान

सरकार ने PMSMA की विस्तारित रणनीति के तहत हाई रिस्क प्रेग्नेंट महिलाओं की पहचान और लगातार निगरानी की व्यवस्था की है। ऐसी महिलाओं को अतिरिक्त जांच और देखभाल उपलब्ध कराई जाती है। आशा कार्यकर्ताओं (ASHA) को भी इन महिलाओं के साथ समन्वय कर सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है।

सुमन योजना से सम्मानजनक और निशुल्क मातृत्व सेवा

सुरक्षित मातृत्व आश्वासन योजना (SUMAN) के तहत गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं को सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में सम्मानजनक, सुरक्षित और निशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। योजना के तहत स्वास्थ्य सेवाओं से इनकार की स्थिति को समाप्त करने और मातृ एवं नवजात मृत्यु के रोकथाम योग्य कारणों को कम करने पर जोर दिया गया है।

प्रसव के बाद देखभाल को मजबूत करने की पहल

सरकार ने प्रसव के बाद महिलाओं की देखभाल के लिए पोस्टनेटल केयर व्यवस्था को मजबूत किया है। इसके तहत प्रसव के बाद खतरे के संकेतों की पहचान, समय पर रेफरल और इलाज की व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। आशा कार्यकर्ताओं को प्रसव के बाद जोखिम वाली महिलाओं की पहचान और उन्हें स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना से आर्थिक सहायता

प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY) के तहत पात्र गर्भवती महिलाओं को आर्थिक सहायता दी जाती है। पहली संतान के जन्म पर योजना के तहत 5,000 रुपये की सहायता सीधे लाभार्थी के बैंक या पोस्ट ऑफिस खाते में डीबीटी के माध्यम से भेजी जाती है। संस्थागत प्रसव के बाद जननी सुरक्षा योजना के तहत मिलने वाली सहायता को मिलाकर महिला को औसतन 6,000 रुपये तक का मातृत्व लाभ प्राप्त होता है। दूसरी संतान के रूप में बेटी के जन्म पर पात्र महिलाओं को 6,000 रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाती है।

मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 से पोषण सुरक्षा

महिलाओं और बच्चों में कुपोषण की चुनौती से निपटने के लिए सरकार मिशन सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0 चला रही है। इसके तहत गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं, छह महीने से छह वर्ष तक के बच्चों और किशोरियों को पूरक पोषण उपलब्ध कराया जाता है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत निर्धारित पोषण मानकों में जनवरी 2023 में संशोधन किया गया। नए मानकों में आहार विविधता, गुणवत्तापूर्ण प्रोटीन, स्वस्थ वसा और कैल्शियम, जिंक, आयरन, फोलेट, विटामिन ए, विटामिन बी6 और विटामिन बी12 जैसे आवश्यक पोषक तत्वों को शामिल किया गया है।

SUMAN रोडमैप 2030 से जीवन चक्र आधारित स्वास्थ्य देखभाल

सरकार ने SUMAN रोडमैप 2030 तैयार किया है, जिसमें महिलाओं के स्वास्थ्य को जीवन चक्र के आधार पर देखा गया है। इसमें गर्भधारण से पहले की देखभाल, गर्भावस्था के दौरान जांच, प्रसव के समय सेवाएं और प्रसव के बाद देखभाल को एकीकृत किया गया है।

एनीमिया मुक्त भारत अभियान में नई रणनीति

गर्भवती महिलाओं में खून की कमी (एनीमिया) की समस्या को दूर करने के लिए एनीमिया मुक्त भारत अभियान को और मजबूत किया गया है। जून 2026 में जारी नए ऑपरेशनल दिशानिर्देशों में 7x7x7 रणनीति को अपनाया गया है। इस रणनीति में सात प्रमुख लाभार्थी समूहों को शामिल किया गया है, जिसमें कम वजन वाले शिशु, छोटे बच्चे, किशोर, गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएं तथा प्रजनन आयु वर्ग की महिलाएं शामिल हैं।

डिजिटल तकनीक से योजनाओं की निगरानी

सरकार ने योजनाओं की प्रभावी निगरानी और लाभार्थियों तक सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल तकनीक का उपयोग बढ़ाया है। पोषण अभियान के तहत पोषण ट्रैकर डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से आंगनवाड़ी सेवाओं और लाभार्थियों की रियल टाइम निगरानी की जा रही है। इसके अलावा टेक-होम राशन (THR) वितरण को आसान बनाने के लिए नोमिनी मॉड्यूल शुरू किया गया है, जिससे लाभार्थी के अनुपलब्ध होने पर भी पोषण सामग्री की आपूर्ति जारी रह सके। सभी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और फील्ड कर्मचारियों को स्मार्टफोन तथा डेटा सपोर्ट उपलब्ध कराया गया है ताकि डिजिटल मॉनिटरिंग व्यवस्था को प्रभावी बनाया जा सके।

सामुदायिक भागीदारी से योजनाओं का विस्तार

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रदर्शन की नियमित समीक्षा की जाती है। आउटपुट-आउटकम मॉनिटरिंग फ्रेमवर्क (OOMF) और कॉमन रिव्यू मिशन (CRM) के माध्यम से योजनाओं की जमीनी स्थिति का मूल्यांकन किया जाता है। इसके साथ ही एएनएम, आशा कार्यकर्ता और सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (CHO) ग्रामीण स्तर पर महिलाओं को स्वास्थ्य सेवाओं, पोषण और सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूक कर रहे हैं।

सरकार का कहना है कि इन पहलों के माध्यम से मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने, कुपोषण और एनीमिया को कम करने तथा सुरक्षित मातृत्व सुनिश्चित करने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है।