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हरियाणा में बदलेगी पढ़ाई की तस्वीर, 250 स्कूलों में 10 दिन बिना बैग के सीखेंगे बच्चे
हरियाणा: राज्य के 250 PM SHRI सरकारी स्कूलों में 2026-27 के दौरान 10 दिन का Bagless Learning Programme चलाया जाएगा। इसका उद्देश्य बच्चों को किताबों और कक्षा की पढ़ाई के साथ Practical और Experiential Learning से जोड़ना है। विद्यार्थियों को खेत, बाजार, उद्योग, प्रशिक्षण केंद्र और अन्य संस्थानों के Exposure Visit कराए जाएंगे। पारंपरिक हुनर के साथ नई तकनीक और Vocational Skills की जानकारी भी दी जाएगी। कार्यक्रम के लिए सरकार ने करीब ₹9.3 करोड़ का बजट मंजूर किया है।

हरियाणा: राज्य के 250 PM SHRI सरकारी स्कूलों में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के दौरान 10 दिन का Bagless Learning Programme शुरू किया जाएगा। इस पहल का मकसद बच्चों को सिर्फ किताबों और कक्षा तक सीमित रखने के बजाय उन्हें स्थानीय कामकाज, पारंपरिक हुनर, व्यावसायिक कौशल और नई तकनीकों का प्रत्यक्ष अनुभव देना है। कार्यक्रम को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 की व्यावहारिक और अनुभव आधारित शिक्षा की सोच के अनुरूप तैयार किया गया है।
250 स्कूलों में 551 Skill Sectors की पहचान
हरियाणा शिक्षा विभाग ने इन 250 PM SHRI स्कूलों के लिए कुल 551 Skill Sectors की पहचान की है। इनमें से 14 क्षेत्रों में पहले से प्रशिक्षण दिया जा रहा है और 183 स्कूलों में इन क्षेत्रों से जुड़ी गतिविधियां संचालित हो रही हैं। बाकी स्कूलों को भी चरणबद्ध तरीके से कार्यक्रम में शामिल किया जाएगा। इसका उद्देश्य बच्चों को यह समझने का अवसर देना है कि अलग-अलग पेशे और कौशल वास्तविक जीवन में किस तरह काम करते हैं। इसके लिए स्थानीय कारीगरों, किसानों, विशेषज्ञों और उद्योगों से जुड़े लोगों की मदद ली जाएगी।
कक्षा 6 के विद्यार्थियों के लिए खास प्रोजेक्ट
कार्यक्रम में कक्षा 6 के विद्यार्थियों की भूमिका खास रखी गई है। उन्हें पूरे शैक्षणिक वर्ष में तीन प्रोजेक्ट तैयार करने होंगे। इन प्रोजेक्ट्स को Bagless Learning के दौरान सीखी गई गतिविधियों और कौशल से जोड़ा जाएगा। इससे बच्चों को केवल जानकारी याद करने के बजाय उसे वास्तविक परिस्थितियों में समझने और लागू करने का मौका मिलेगा।
खेत से बाजार और उद्योग तक होंगे Exposure Visits
Bagless Learning के दौरान विद्यार्थियों को कई तरह के स्थानों पर ले जाने की योजना है। इनमें नर्सरी, सोलर एनर्जी पार्क, बायोडायवर्सिटी पार्क, प्रशिक्षण केंद्र, पंचायत, खेत, उद्योग, सब्जी मंडी, रेलवे स्टेशन, पुलिस स्टेशन, कृषि विज्ञान केंद्र और ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक स्थल शामिल हैं। बच्चों को स्थानीय किसानों और कुम्हार, बढ़ई जैसे कारीगरों से सीधे सीखने का मौका भी मिलेगा। इस तरह विद्यार्थी किसी पेशे को केवल किताब में पढ़ने के बजाय उसे काम करते हुए देख और समझ सकेंगे।
पारंपरिक हुनर के साथ नई Technology की जानकारी
कार्यक्रम में पारंपरिक कौशल के साथ-साथ आधुनिक और उभरते क्षेत्रों को भी शामिल किया गया है। स्कूलों में कृषि, मिट्टी और जल संरक्षण, पशुपालन, खाद्य प्रसंस्करण, हस्तशिल्प, मिट्टी के बर्तन बनाना, बढ़ईगीरी, सिलाई और बुनाई जैसे विषयों पर गतिविधियां कराई जा सकती हैं। इसके अलावा विद्यार्थियों को नई तकनीकों और Emerging Fields से भी परिचित कराया जाएगा। इसका मकसद बच्चों को भविष्य की पढ़ाई और करियर के अलग-अलग विकल्पों को कम उम्र में समझने में मदद करना है।
Indoor और Outdoor दोनों तरह की Learning
10 दिन का कार्यक्रम केवल स्कूल से बाहर की यात्राओं तक सीमित नहीं रहेगा। इसके तहत स्कूल परिसर में भी Demonstration, बातचीत और Practical Activities आयोजित की जाएंगी। Outdoor Activities के जरिए बच्चे खेत, बाजार, उद्योग या दूसरे संस्थानों को देखेंगे, जबकि Indoor Sessions में विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों से अलग-अलग कौशल के बारे में जानकारी दी जाएगी। इस मॉडल से पढ़ाई को वास्तविक जीवन से जोड़ने की कोशिश की जा रही है।
₹9.3 करोड़ का बजट मंजूर
हरियाणा सरकार ने इस कार्यक्रम के लिए कुल ₹9.3 करोड़ का बजट मंजूर किया है। इसमें करीब ₹3.09 करोड़ परिवहन, ₹1.8 करोड़ भोजन और अन्य व्यवस्थाओं तथा ₹1.4 करोड़ शैक्षणिक एवं मार्गदर्शन गतिविधियों के लिए रखे गए हैं। इसके अलावा करीब ₹37.5 लाख उपकरण और जरूरी सामग्री तथा ₹22 लाख प्रिंटिंग और संबंधित सामग्री के लिए निर्धारित किए गए हैं।
NEP 2020 से जुड़ा है Bagless Learning
Bagless Learning की अवधारणा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में सुझाई गई अनुभव आधारित और कौशल-केंद्रित शिक्षा से जुड़ी है। शिक्षा मंत्रालय के अनुसार कक्षा 6 से 8 तक के विद्यार्थियों के लिए Skill Education में Pre-Vocational Education, 10 Bagless Days और अनुभव आधारित गतिविधियों को शामिल किया गया है। PM SHRI स्कूलों की मूल अवधारणा भी NEP 2020 के अनुरूप बच्चों को केवल परीक्षा-केंद्रित शिक्षा देने के बजाय उन्हें 21वीं सदी के कौशल, व्यावसायिक शिक्षा, स्थानीय उद्योग और अनुभव आधारित सीखने से जोड़ना है।
बच्चों को करियर की दिशा समझने में मिलेगी मदद
हरियाणा शिक्षा विभाग का मानना है कि इस पहल से विद्यार्थियों को अपनी रुचि और क्षमता पहचानने में मदद मिल सकती है। अलग-अलग पेशों और कौशल क्षेत्रों का प्रत्यक्ष अनुभव मिलने से बच्चों को भविष्य में विषय और करियर चुनने के दौरान ज्यादा जानकारी मिल सकेगी। यह कार्यक्रम पारंपरिक पढ़ाई का विकल्प नहीं होगा, बल्कि उसे Practical Learning और Real-World Exposure के साथ जोड़ने का प्रयास है। 250 PM SHRI स्कूलों में इसके लागू होने से राज्य में स्कूली शिक्षा को अधिक कौशल आधारित और अनुभवात्मक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
