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बच्चों को पोलियो से बचाना जरूरी, विश्व पोलियो दिवस पर जागरूकता का संदेश
विश्व पोलियो दिवस हर साल 24 अक्टूबर को मनाया जाता है। इस अवसर पर भारत में पोलियो-मुक्त स्थिति को बनाए रखने और बच्चों के नियमित टीकाकरण के महत्व पर जोर दिया गया। भारत को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने 2014 में पोलियो-मुक्त प्रमाणित किया था।

नई दिल्ली: विश्व पोलियो दिवस के अवसर पर केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने भारत के पोलियो-मुक्त दर्जे को देश के निरंतर टीकाकरण प्रयासों की बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि बच्चों को पोलियो से सुरक्षित रखने के लिए नियमित टीकाकरण, जागरूकता और बीमारी की निगरानी लगातार जारी रखना जरूरी है। भारत को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने 27 मार्च 2014 को पोलियो-मुक्त प्रमाणित किया था। यह उपलब्धि देश में बड़े स्तर पर चलाए गए टीकाकरण अभियानों, स्वास्थ्यकर्मियों की मेहनत और लोगों की भागीदारी से संभव हुई।
भारत में पोलियो उन्मूलन की बड़ी उपलब्धि
पोलियो एक संक्रामक बीमारी है, जो मुख्य रूप से पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों को प्रभावित करती है। गंभीर मामलों में यह बीमारी शरीर में स्थायी लकवा पैदा कर सकती है। भारत में जंगली पोलियो वायरस का आखिरी मामला 13 जनवरी 2011 को पश्चिम बंगाल के हावड़ा में सामने आया था। इसके बाद देश में जंगली पोलियो वायरस का कोई नया मामला दर्ज नहीं किया गया। भारत की इस सफलता में सरकारी टीकाकरण कार्यक्रमों, स्वास्थ्यकर्मियों और समुदाय की सक्रिय भागीदारी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
बच्चों के टीकाकरण पर सरकार का जोर
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सरकार के सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम (Universal Immunization Programme) और विशेष टीकाकरण अभियानों के माध्यम से पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों तक पोलियो की अतिरिक्त खुराक पहुँचाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इन अभियानों का उद्देश्य दूरदराज और जरूरतमंद क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों तक भी टीकाकरण की सुविधा पहुँचाना है, ताकि कोई भी बच्चा इस सुरक्षा से वंचित न रहे। पोलियो से बचाव के लिए ओरल पोलियो वैक्सीन (OPV) का उपयोग किया जाता है। बच्चों को निर्धारित टीकाकरण कार्यक्रम के अनुसार सभी जरूरी खुराक दिलाना महत्वपूर्ण है।
भारत को अभी भी सतर्क रहने की जरूरत
भारत के पोलियो-मुक्त होने के बावजूद दुनिया के कुछ हिस्सों में पोलियो वायरस का प्रसार चिंता का विषय है। अंतरराष्ट्रीय यात्रा और लोगों की आवाजाही के कारण वायरस दूसरे देशों से भारत में दोबारा प्रवेश करने का जोखिम बना रह सकता है। इसलिए नियमित टीकाकरण, बीमारी की निगरानी और समय पर आवश्यक कदम उठाना जरूरी है। स्वास्थ्य अधिकारियों का उद्देश्य पोलियो के संभावित खतरे की पहचान करना और उसके प्रसार को रोकना है।
विश्व पोलियो दिवस क्यों मनाया जाता है?
विश्व पोलियो दिवस हर साल 24 अक्टूबर को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य पोलियो के प्रति जागरूकता बढ़ाना और दुनिया भर में इस बीमारी के उन्मूलन के प्रयासों को मजबूत करना है। इस दिन स्वास्थ्य संगठनों और सरकारों द्वारा टीकाकरण के महत्व तथा बच्चों को पोलियो से सुरक्षित रखने की आवश्यकता पर जोर दिया जाता है। विश्व पोलियो दिवस पर भारत ने पोलियो उन्मूलन में मिली सफलता को याद करते हुए नियमित टीकाकरण और सतर्कता बनाए रखने का संदेश दिया है। भारत का पोलियो-मुक्त दर्जा एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य उपलब्धि है, लेकिन इसे बनाए रखने के लिए सरकार, स्वास्थ्यकर्मियों और आम नागरिकों की निरंतर भागीदारी जरूरी है।
