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राम मंदिर चढ़ावा केस: 105 संदिग्ध घटनाएं, ₹79 लाख बरामद; 40 हजार पन्नों की चार्जशीट में क्या-क्या?”
अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की रकम में कथित हेराफेरी के मामले की जांच निर्णायक चरण में पहुंच गई है। पुलिस ने गिरफ्तार 8 आरोपियों के खिलाफ करीब 40 हजार पन्नों की चार्जशीट तैयार की है, जिसे 23 सितंबर 2026 को अदालत में दाखिल करने की तैयारी बताई गई है। जांच में मंदिर परिसर के CCTV फुटेज में 105 ऐसी घटनाएं चिन्हित हुई हैं, जिनमें नकदी को कथित तौर पर अनधिकृत तरीके से निकालने या छिपाने की गतिविधियां रिकॉर्ड हुईं। SIT ने 173 गवाहों के बयान दर्ज किए और CCTV, बैंक रिकॉर्ड, मोबाइल डेटा, कॉल डिटेल, बरामदगी तथा फोरेंसिक ऑडिट समेत कई तरह के साक्ष्यों की जांच की।

अयोध्या: राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे और दान से जुड़ी कथित चोरी के मामले में जांच अब अहम मोड़ पर पहुंच गई है। पुलिस ने करीब 40 हजार पन्नों की चार्जशीट तैयार की है, जिसमें आठ आरोपियों के खिलाफ जांच से जुड़े दस्तावेज, CCTV फुटेज, गवाहों के बयान और वित्तीय रिकॉर्ड शामिल हैं। रिपोर्टों के मुताबिक चार्जशीट 23 सितंबर को दाखिल किए जाने की तैयारी थी। मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) को CCTV फुटेज की पड़ताल में 105 ऐसी घटनाएं मिलीं, जिनमें मंदिर के चढ़ावे की रकम को कथित तौर पर अनधिकृत तरीके से हटाने या छिपाने की बात सामने आई। शुरुआती जांच में ऐसी 70 घटनाओं का उल्लेख था, लेकिन आगे की जांच में संख्या बढ़कर 105 हो गई।
CCTV से शुरू हुई जांच में सामने आईं 105 घटनाएं
जांच के दौरान 27 अप्रैल से 5 जून 2026 के बीच की गतिविधियों की CCTV फुटेज की जांच की गई। SIT ने इन्हीं फुटेज और दूसरे साक्ष्यों के आधार पर कथित अनधिकृत नकदी निकासी या उसे छिपाने से जुड़ी 105 घटनाओं को चिन्हित किया है। हालांकि, इन 105 घटनाओं को अदालत द्वारा साबित चोरी नहीं माना जा सकता। ये फिलहाल जांच में सामने आए संदिग्ध/आरोपित घटनाक्रम हैं और अंतिम फैसला अदालत को करना है।
करीब ₹79 लाख की बरामदगी का दावा
जांच में पुलिस ने करीब ₹79 लाख की रकम बरामद किए जाने की बात कही है। इसके अलावा वाहन, बाइक, आभूषण और दूसरे दस्तावेज भी जांच का हिस्सा बनाए गए हैं। SIT ने आरोपियों के बैंक खातों, संपत्तियों और वित्तीय लेनदेन की भी पड़ताल की है।
86 कीमती सामान बिना रसीद, 803 की रसीदों से जांच
SIT की रिपोर्ट में मंदिर से जुड़े कीमती सामान की जांच का भी उल्लेख है। जांच के दौरान 86 मूल्यवान वस्तुओं के ऐसे रिकॉर्ड मिले, जिनके साथ रसीद उपलब्ध नहीं थी। दूसरी ओर 803 मूल्यवान वस्तुओं से संबंधित रसीदों को रिकॉर्ड और सॉफ्टवेयर में दर्ज जानकारी से सत्यापित किया गया। करीब 944.411 किलोग्राम सफेद धातु से संबंधित रिकॉर्ड भी जांचे गए और इसे आगे पिघलाने की प्रक्रिया के लिए संबंधित सरकारी संस्था को भेजे जाने का उल्लेख जांच रिकॉर्ड में है।
200 किलो चांदी से लेकर चरण पादुका तक की जांच
मामले में चढ़ावे से जुड़ी कई बड़ी शिकायतों की भी जांच हुई। SIT की रिपोर्ट में 200 किलो चांदी की ईंटों, 38.288 किलो चांदी की ईंटों, चांदी की माला, चरण पादुका और रामचरितमानस से जुड़े एक दान की जांच का उल्लेख है। जांच रिकॉर्ड के अनुसार इन विशिष्ट मामलों में कोई ऐसी विसंगति नहीं मिली, जो लगाए गए आरोपों की पुष्टि करती हो।
173 गवाहों के बयान, CCTV से लेकर बैंक रिकॉर्ड तक जुटाए सबूत
14 सितंबर तक जांच में 173 गवाहों के बयान दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई थी। SIT ने CCTV फुटेज के अलावा बरामदगी, बैंक और वित्तीय रिकॉर्ड, संपत्ति एवं वाहनों से जुड़े दस्तावेज, मोबाइल डेटा, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, गवाहों के बयान और फॉरेंसिक जांच को भी साक्ष्य के रूप में शामिल किया है।
मामले की वित्तीय जांच के लिए फॉरेंसिक ऑडिट भी कराया गया।
आठ आरोपी जांच के घेरे में
रिपोर्टों में जिन आठ आरोपियों के नाम सामने आए हैं, उनमें राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू, सुभाष चंद्र श्रीवास्तव, अनकल्प मिश्रा, रमा शंकर मिश्रा, मनीष कुमार यादव, अविनाश शुक्ला, लवकुश मिश्रा और करुणेश पांडेय शामिल हैं। इन सभी पर लगे आरोप अभी न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं। चार्जशीट में आरोप लगाए जाना अपने आप में अपराध सिद्ध होना नहीं है।
वकीलों के बहिष्कार से कोर्ट परिसर में भी माहौल गरम
मामले में आरोपियों की पैरवी को लेकर अयोध्या बार एसोसिएशन की ओर से बहिष्कार की बात सामने आई है। रिपोर्टों के मुताबिक कुछ वकीलों ने आरोपियों का मुकदमा लड़ने वाले अधिवक्ताओं के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी भी दी। इस घटनाक्रम ने अदालत में आरोपी के कानूनी प्रतिनिधित्व के अधिकार को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, बार एसोसिएशन का रुख और अदालत में आरोपियों के अधिकार—दो अलग कानूनी पहलू हैं।
अब आगे क्या?
मामले में जांच लगभग पूरी होने की बात सुप्रीम कोर्ट के समक्ष भी रखी गई है। पहली गिरफ्तारी के बाद 90 दिनों की वैधानिक अवधि 25 सितंबर के आसपास पूरी हो रही है, इसलिए चार्जशीट दाखिल करने की समयसीमा और डिफॉल्ट जमानत का मुद्दा भी महत्वपूर्ण हो गया है। अब चार्जशीट दाखिल होने के बाद अदालत उसके दस्तावेजों और आरोपों पर विचार करेगी। इसके बाद आरोप तय होने और मुकदमे की आगे की प्रक्रिया शुरू होगी।
सबसे महत्वपूर्ण बात: जांच में सामने आई 105 घटनाएं, बरामद रकम और अन्य साक्ष्य गंभीर आरोपों का हिस्सा हैं, लेकिन इनसे आरोपियों का अपराध स्वतः सिद्ध नहीं होता। अंतिम निर्णय अदालत में साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होगा।
