जोधपुर AIIMS में रेजिडेंट डॉक्टर डॉ. राजनरेश यादव की मौत के बाद मामला गरमा गया है। बुधवार को मृतक डॉक्टर के परिजनों ने AIIMS निदेशक डॉ. गोवर्धनदत्त पुरी के सामने अपनी नाराजगी जाहिर की। वहीं रेजिडेंट डॉक्टरों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए हड़ताल शुरू कर दी है। डॉक्टरों ने प्रशासन के सामने सार्वजनिक माफी, 5 करोड़ रुपये मुआवजा, कार्यकारी निदेशक के इस्तीफे और रेजिडेंट-स्टूडेंट संगठनों को औपचारिक मान्यता देने समेत कई मांगें रखी हैं।
AIIMS जोधपुर में रेजिडेंट डॉक्टर डॉ. राजनरेश यादव की मौत के बाद विरोध बढ़ता जा रहा है। बुधवार को मृतक डॉक्टर के परिजन AIIMS निदेशक डॉ. गोवर्धनदत्त पुरी से मिले और उनके सामने अपनी नाराजगी जताई। दूसरी ओर, रेजिडेंट डॉक्टरों ने अपनी मांगों को लेकर हड़ताल शुरू कर दी है। रेजिडेंट डॉक्टरों ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर कहा है कि जब तक उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। हड़ताल के दौरान केवल आपातकालीन सेवाएं जारी रखने की बात कही गई है। नियमित OPD सेवाएं बंद रहेंगी, जबकि इमरजेंसी मरीजों और आपातकालीन ऑपरेशन को प्राथमिकता दी जाएगी।
मामले के विरोध में AIIMS के रेजिडेंट डॉक्टरों और अन्य छात्रों ने एकत्र होकर प्रदर्शन किया। कई डॉक्टरों और छात्रों ने मुंह पर पट्टी बांधकर अपना विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शन के दौरान रेजिडेंट डॉक्टरों और छात्रों ने काम करने की परिस्थितियों, ड्यूटी के घंटों और कार्यभार को लेकर चिंता जताई। इससे पहले मंगलवार को रेजिडेंट डॉक्टरों ने करीब दो घंटे तक कार्य बहिष्कार किया था और निदेशक को ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगें रखी थीं। देर रात डॉ. राजनरेश यादव का पोस्टमार्टम भी किया गया।
रेजिडेंट डॉक्टरों ने घटना को लेकर संस्थान प्रशासन से सार्वजनिक माफी मांगने और अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करने की मांग की है। उनका कहना है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए संस्थान में जरूरी कदम उठाए जाने चाहिए। डॉक्टरों ने शोक संतप्त परिवार के लिए 5 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग भी रखी है। इसके अलावा कार्यकारी निदेशक के इस्तीफे की मांग की गई है। रेजिडेंट डॉक्टरों की एक अन्य प्रमुख मांग है कि रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन और स्टूडेंट यूनियन को संस्थान में रेजिडेंट और छात्रों के औपचारिक प्रतिनिधि निकाय के रूप में मान्यता दी जाए।
प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों ने रेजिडेंट और छात्रों के लिए काम करने की परिस्थितियों, लंबे ड्यूटी घंटों और कार्यभार से जुड़े मुद्दे भी उठाए हैं। उनका कहना है कि संस्थान में ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जिससे डॉक्टरों और छात्रों की समस्याओं को समय पर सुना जा सके और भविष्य में ऐसी स्थिति पैदा न हो। फिलहाल AIIMS प्रशासन की ओर से इन मांगों और आरोपों पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मामले को लेकर अस्पताल परिसर में तनाव और विरोध का माहौल बना हुआ है।