प्रयागराज में पितृ पक्ष को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। इस बार पितृ पक्ष 26 सितंबर से 10 अक्टूबर 2026 तक रहेगा। देश-विदेश से श्रद्धालुओं के प्रयागराज पहुंचकर संगम पर तर्पण और पिंडदान करने की उम्मीद है। जो लोग प्रयागराज नहीं आ सकते, उनके लिए ऑनलाइन पिंडदान की व्यवस्था भी की जा रही है। अमेरिका से एक श्रद्धालु 28 सितंबर को ऑनलाइन माध्यम से पिंडदान कराने की तैयारी में है।
पितृ पक्ष के करीब आते ही संगम नगरी प्रयागराज में तर्पण और पिंडदान की तैयारियां तेज हो गई हैं। इस बार पितृ पक्ष 26 सितंबर से शुरू होकर 10 अक्टूबर 2026 तक चलेगा। इस दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों के साथ विदेशों से भी श्रद्धालुओं के प्रयागराज पहुंचने की उम्मीद है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृ पक्ष के दौरान लोग अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और मोक्ष की कामना से तर्पण, पिंडदान और अन्य धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। संगम क्षेत्र में पितृ पक्ष के दौरान सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिलती है। तीर्थ पुरोहितों के अनुसार, जैसे-जैसे पितृ पक्ष आगे बढ़ेगा, संगम क्षेत्र में श्रद्धालुओं की संख्या भी बढ़ती जाएगी।
तीर्थ पुरोहित प्रदीप पांडे के अनुसार, धार्मिक परंपरा में प्रयागराज, काशी और गया का पिंडदान के लिए विशेष महत्व माना जाता है। कई श्रद्धालु प्रयागराज से धार्मिक यात्रा की शुरुआत करते हैं और इसके बाद काशी होते हुए गया पहुंचकर पिंडदान की प्रक्रिया पूरी करते हैं।इसी वजह से पितृ पक्ष के दौरान प्रयागराज में देश के विभिन्न राज्यों से लोग पहुंचते हैं। संगम क्षेत्र में श्रद्धालु अपने पितरों के निमित्त तर्पण और पिंडदान करते हैं तथा धार्मिक अनुष्ठान पूरा करते हैं। इस बार पितृ पक्ष में ऑनलाइन पिंडदान की व्यवस्था भी चर्चा में है। तीर्थ पुरोहित के मुताबिक, अमेरिका में रहने वाला एक श्रद्धालु 28 सितंबर को ऑनलाइन माध्यम से प्रयागराज में पिंडदान कराने की तैयारी में है।पिछले कुछ वर्षों से ऐसी व्यवस्था का इस्तेमाल वे लोग कर रहे हैं, जो किसी कारणवश प्रयागराज नहीं पहुंच पाते। लंबी दूरी, समय की कमी या यात्रा से जुड़ी दूसरी परेशानियों के कारण कई परिवार ऑनलाइन माध्यम से धार्मिक अनुष्ठान करवाते हैं।यह सुविधा केवल विदेशों में रहने वाले लोगों तक सीमित नहीं है।
देश के गांव और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले ऐसे लोग भी इसका सहारा लेते हैं, जिनके लिए प्रयागराज पहुंचना मुश्किल होता है। तीर्थ पुरोहितों के मुताबिक, पितृ पक्ष के दौरान युवा पीढ़ी की भागीदारी भी देखने को मिल रही है। कई युवा अपने माता-पिता और पूर्वजों के लिए तर्पण और पिंडदान कराने प्रयागराज पहुंच रहे हैं। जो लोग संगम तक पहुंच सकते हैं, वे स्वयं धार्मिक अनुष्ठान में शामिल होते हैं, जबकि दूसरे लोग ऑनलाइन माध्यम से कर्मकांड करवाते हैं। इससे यह भी सामने आता है कि बदलते समय के बावजूद परिवार और पूर्वजों से जुड़ी धार्मिक परंपराओं को निभाने की इच्छा बनी हुई है। पितृ पक्ष के दौरान संगम क्षेत्र में श्रद्धालुओं की वेशभूषा भी अलग नजर आ सकती है। तीर्थ पुरोहितों के अनुसार, पिंडदान और तर्पण के लिए आने वाले कई श्रद्धालु पीले वस्त्र पहनकर धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। इस वजह से पितृ पक्ष के दौरान संगम क्षेत्र का माहौल सामान्य दिनों की तुलना में अलग दिखाई देता है।
बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपने पितरों के निमित्त विधि-विधान से कर्मकांड करते नजर आएंगे। पितृ पक्ष की शुरुआत के साथ प्रयागराज में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने की उम्मीद है। 26 सितंबर के बाद संगम क्षेत्र में देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले लोगों की संख्या और बढ़ सकती है। श्रद्धालु अपने माता-पिता और पूर्वजों के लिए तर्पण, पिंडदान और अन्य धार्मिक अनुष्ठान करेंगे। वहीं तीर्थ पुरोहित भी संगम क्षेत्र में आने वाले परिवारों को विधि-विधान से कर्मकांड कराने में जुटेंगे।