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कच्छ में नाबालिग छात्रा से कथित दुष्कर्म: पूर्व प्रिंसिपल गिरफ्तार, स्कूल प्रबंधन पर मामला दबाने का आरोप
गुजरात के कच्छ जिले के रापर तालुका की एक आवासीय स्कूल में नाबालिग छात्रा से कथित दुष्कर्म के मामले में पुलिस ने पूर्व प्रिंसिपल को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, घटना का पता स्कूल परिसर में मिले प्रेग्नेंसी टेस्ट किट के बाद चला। आरोप है कि स्कूल प्रबंधन ने पुलिस को सूचना देने के बजाय मामले को आंतरिक स्तर पर दबाने की कोशिश की। मामले में पूर्व प्रिंसिपल समेत चार लोगों के खिलाफ BNS और POCSO Act के तहत FIR दर्ज की गई है।

गुजरात के कच्छ जिले के रापर तालुका स्थित एक आवासीय स्कूल में नाबालिग छात्रा से कथित दुष्कर्म का मामला सामने आया है। पुलिस ने मामले में स्कूल के पूर्व प्रिंसिपल को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी पर छात्रा के साथ एक से अधिक बार दुष्कर्म करने का आरोप है। घटना सामने आने के बाद उसे अगस्त में स्कूल से हटा दिया गया था।
पुलिस के मुताबिक, मामले का खुलासा अगस्त के मध्य में हुआ, जब स्कूल की एक महिला शिक्षक को परिसर में एक प्रेग्नेंसी टेस्ट किट मिली। इसके बाद हॉस्टल वार्डन ने CCTV फुटेज की जांच की। पुलिस का दावा है कि जांच के दौरान पता चला कि किट कथित तौर पर तत्कालीन प्रिंसिपल की जेब से गिरी थी। इसके बाद स्कूल स्तर पर की गई जांच में छात्रा के साथ कथित यौन अपराध की जानकारी सामने आई।
Times of India की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने बताया कि आरोपी प्रिंसिपल छात्रा को हॉस्टल के पीछे एक सुनसान स्थान पर ले गया था और अगस्त में दो अलग-अलग मौकों पर उसके साथ कथित दुष्कर्म किया। हालांकि, इस संबंध में अंतिम तथ्य जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही तय होंगे।
मामला पुलिस तक पहुंचने में देरी का आरोप
पुलिस का आरोप है कि स्कूल प्रबंधन को घटना की जानकारी मिलने के बाद भी तत्काल पुलिस को सूचित नहीं किया गया। Indian Express के अनुसार, स्कूल की ओर से 24 सितंबर को पुलिस को केवल टेस्ट किट मिलने की जानकारी दी गई थी और कथित यौन अपराध का उल्लेख नहीं किया गया। इसके बाद पुलिस ने छात्रा के माता-पिता से संपर्क किया, जिसके बाद 25 सितंबर को दुष्कर्म की शिकायत दर्ज कराई गई और FIR दर्ज की गई।
पुलिस ने इस मामले में पूर्व प्रिंसिपल के अलावा स्कूल के ट्रस्ट/प्रबंधन से जुड़े अन्य लोगों और हॉस्टल वार्डन को भी आरोपी बनाया है। पुलिस का कहना है कि इन लोगों पर कथित तौर पर घटना की जानकारी होने के बावजूद उसे दबाने या पुलिस को सूचना नहीं देने का आरोप है।
POCSO Act के तहत कार्रवाई
मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण देने वाले POCSO Act की धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है। पुलिस जांच में यह भी देखा जा रहा है कि घटना के संबंध में स्कूल प्रबंधन की भूमिका क्या थी और कथित अपराध की जानकारी मिलने के बाद अधिकारियों ने क्या कदम उठाए।
सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, Shree Gram Swaraj Sangh Rapar क्षेत्र में आवासीय शिक्षा से जुड़ी संस्था संचालित करता है और गुजरात सरकार की सूची में इससे जुड़ी आवासीय आश्रमशाला भी दर्ज है।
फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है। आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोप अदालत में विचाराधीन रहेंगे और दोषसिद्धि न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर तय होगी।
