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अनार की रखवाली में हाईटेक पहरा: सोलर CCTV और नाइट विजन से खेतों पर नजर

महाराष्ट्र में अनार की फसल चोरी की बढ़ती घटनाओं ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। पुणे के शिरूर से लेकर सोलापुर, नासिक और अहिल्यानगर तक तैयार फसल रातोंरात चोरी होने के मामले सामने आए हैं। अब पारंपरिक ‘राखण’ यानी रातभर खेत की रखवाली के साथ किसान सोलर-पावर्ड और नाइट-विजन CCTV जैसे तकनीकी उपायों की ओर भी देख रहे हैं। हालांकि उपलब्ध रिपोर्टों में इन कैमरों के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल का आधिकारिक आंकड़ा सामने नहीं आया है।

Kalpana Gautam28 सित. 2026, 12:21 AM IST
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अनार की रखवाली में हाईटेक पहरा: सोलर CCTV और नाइट विजन से खेतों पर नजर

महाराष्ट्र के अनार उत्पादक इलाकों में इन दिनों किसान सिर्फ फसल नहीं उगा रहे, बल्कि उसकी सुरक्षा के लिए भी नए तरीके तलाश रहे हैं। वजह है तैयार अनार की चोरी। 2025 के जुलाई और अगस्त महीनों में पुणे, सोलापुर, नासिक और अहिल्यानगर जिलों में अनार की बड़ी मात्रा में चोरी के कई मामले सामने आए। रिपोर्ट के मुताबिक, इन दो महीनों में कम-से-कम 15 ऐसे मामलों की जानकारी सामने आई, जिनमें दो टन से ज्यादा अनार चोरी होने की शिकायतें थीं।


 हालांकि यह आंकड़ा आधिकारिक सरकारी रिकॉर्ड नहीं, बल्कि स्थानीय रिपोर्टों और पुलिस मामलों पर आधारित बताया गया है। सबसे चर्चित मामलों में पुणे जिले के शिरूर तहसील का शिंदोडी गांव भी शामिल है। यहां किसान शाहाजी वालुंज के करीब तीन एकड़ के बाग से लगभग 4.5 टन तैयार भगवा अनार चोरी होने की शिकायत सामने आई। रिपोर्ट के अनुसार, चोरी इतनी तेजी से हुई कि सुबह तक पेड़ों पर मौजूद बड़े और तैयार फल गायब थे।

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एक रात में लाखों का नुकसान

सोलापुर के सांगोला इलाके में भी ऐसी ही घटना सामने आई। किसान अल्ताफ मुल्ला के करीब 300 पेड़ों से लगभग तीन टन तैयार भगवा अनार चोरी होने की बात सामने आई। उन्होंने बताया कि घटना के बाद आसपास के किसानों ने रात में सामुदायिक गश्त यानी ‘राखण’ शुरू कर दी थी।


यही ‘राखण’ महाराष्ट्र के ग्रामीण इलाकों में फसल सुरक्षा का पारंपरिक तरीका रहा है। किसान और गांव के लोग बारी-बारी से रात में खेतों का चक्कर लगाते हैं। लेकिन अनार की चोरी के मामलों ने इस व्यवस्था के सामने भी चुनौती खड़ी कर दी है।


कई किसानों के लिए समस्या सिर्फ चोरी नहीं है। कुछ इलाकों में रात की रखवाली के दौरान तेंदुए की मौजूदगी का खतरा भी बताया गया है। यानी किसान को एक तरफ महंगी तैयार फसल की चिंता है और दूसरी तरफ रात में खेत पर मौजूद रहने का जोखिम भी।


क्यों बना अनार चोरों का निशाना?

अनार की चोरी के पीछे सबसे बड़ा कारण इसकी बाजार कीमत को माना जा रहा है। 2025 में महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में भगवा अनार की कीमतों में तेजी देखी गई। रिपोर्ट में किसानों के हवाले से बताया गया कि भारी और समय से अलग बारिश, बीमारी और फूल आने के चक्र में बदलाव के कारण उत्पादन प्रभावित हुआ, जबकि प्रीमियम गुणवत्ता वाले अनार की मांग बनी रही। इससे तैयार और बड़े आकार के फलों की कीमत आकर्षक हुई। यही वजह है कि किसानों के अनुसार चोरी करने वाले सिर्फ बाग में घुसकर फल नहीं तोड़ रहे थे, बल्कि कई मामलों में बड़े और बाजार के लिए तैयार फलों को चुनकर ले गए।


पुणे ग्रामीण पुलिस ने भी शिरूर के मामलों की जांच के दौरान बड़े गिरोहों की आशंका जताई थी। पुलिस के अनुसार, आरोपियों को फसल और उसके बाजार की जानकारी होने के संकेत मिले थे। शिरूर में दर्ज दो मामलों की जांच के लिए विशेष टीम बनाई गई थी और एक संदिग्ध की गिरफ्तारी की जानकारी भी सामने आई थी।


अब खेत में ‘डिजिटल चौकीदार’

ऐसे माहौल में CCTV किसानों के लिए एक अतिरिक्त सुरक्षा विकल्प बनकर सामने आया है। सोलर-पावर्ड CCTV का फायदा यह है कि जहां खेतों तक नियमित बिजली कनेक्शन नहीं है, वहां कैमरा सोलर पैनल और बैटरी से चलाया जा सकता है। 4G कनेक्टिविटी वाले कैमरों के जरिए किसान मोबाइल फोन से खेत की निगरानी भी कर सकते हैं। बाजार में उपलब्ध कुछ ऐसे कैमरों में मोशन डिटेक्शन और इंफ्रारेड नाइट विजन जैसी सुविधाएं भी हैं।


महाराष्ट्र में खेतों में सोलर CCTV का इस्तेमाल बिल्कुल नया नहीं है। 2023 की एक किसान केस स्टडी में चंद्रकांत राठौड़ और सूर्यकांत राठौड़ नाम के किसानों द्वारा खेत में सोलर-पावर्ड CCTV लगाने का उल्लेख मिलता है।


हालांकि यहां एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि उपलब्ध विश्वसनीय रिपोर्टों से यह पुष्टि नहीं होती कि पुणे और आसपास के सभी या बड़ी संख्या में अनार किसान अब सोलर नाइट-विजन CCTV लगा चुके हैं। इसलिए इसे फिलहाल तकनीक की ओर बढ़ता हुआ सुरक्षा विकल्प कहना अधिक सटीक होगा।


‘राखण’ से CCTV तक का बदलाव

पारंपरिक खेती में खेत की रखवाली इंसान करता था। रात में टॉर्च लेकर किसान या गांव के लोग खेतों के बीच चक्कर लगाते थे। चोरी का खतरा बढ़ा तो निगरानी का समय भी बढ़ गया। CCTV इस व्यवस्था को बदल सकता है। कैमरा लगातार निगरानी कर सकता है, रात में गतिविधि रिकॉर्ड कर सकता है और कुछ आधुनिक सिस्टम संदिग्ध हलचल होने पर मोबाइल पर अलर्ट भी भेज सकते हैं। इससे किसान को हर रात खेत में मौजूद रहने की जरूरत कम हो सकती है।


लेकिन कैमरा अपने आप चोरी नहीं रोकता। वह निगरानी, रिकॉर्डिंग और पहचान में मदद करता है। कैमरे की सही जगह पर स्थापना, पर्याप्त बैटरी बैकअप, मोबाइल नेटवर्क और रिकॉर्डिंग स्टोरेज भी जरूरी हैं।


फसल की सुरक्षा अब खेती का हिस्सा

महाराष्ट्र देश के प्रमुख अनार उत्पादक राज्यों में है और राज्य में पुणे के अलावा सोलापुर, सांगली, नासिक और अन्य जिलों में भी अनार की खेती होती है। अनार उत्पादन और इसकी तकनीकी खेती को लेकर राज्य और कृषि अनुसंधान संस्थानों की गतिविधियां भी जारी हैं।


ऐसे में चोरी का मुद्दा सिर्फ कानून-व्यवस्था का सवाल नहीं रह जाता। किसान के लिए यह कई महीनों की मेहनत और निवेश की सुरक्षा का सवाल है।

एक तरफ बाजार में अच्छी कीमत मिलने की संभावना फसल को मूल्यवान बनाती है, तो दूसरी तरफ वही कीमत चोरों के लिए भी इसे आकर्षक बना सकती है।


इसलिए आने वाले समय में खेतों की सुरक्षा में पारंपरिक ‘राखण’ और आधुनिक तकनीक साथ-साथ दिखाई दे सकती है—दिन में किसान और रात में कैमरा।

यानी महाराष्ट्र के अनार बागों में कहानी सिर्फ ‘राखण से CCTV’ तक पहुंचने की नहीं है। असली सवाल यह है कि जब खेत की तैयार फसल लाखों रुपये की हो, तो उसकी सुरक्षा का मॉडल कितना आधुनिक, किफायती और भरोसेमंद बनाया जा सकता है।