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आग बुझाने से लेकर रेस्क्यू तक! मुंबई फायर ब्रिगेड ने 3 महीने में संभालीं 5,701 इमरजेंसी कॉल
मुंबई फायर ब्रिगेड की ताजा रिपोर्ट ने शहर की आपदा-प्रतिक्रिया की बदलती तस्वीर सामने रखी है। जून से अगस्त 2026 के बीच फायर ब्रिगेड को 5,701 इमरजेंसी कॉल मिलीं। इनमें सिर्फ 28 फीसदी मामले आग से जुड़े थे, जबकि करीब 72 फीसदी कॉल रेस्क्यू, पेड़ गिरने, सड़क हादसों, पानी में डूबने, तेल रिसाव और मकान ढहने जैसी गैर-फायर घटनाओं से संबंधित थीं। जुलाई में सबसे ज्यादा 2,688 कॉल दर्ज की गईं।

मुंबई में फायर ब्रिगेड का नाम सुनते ही आमतौर पर आग की लपटों और दमकल की गाड़ियों की तस्वीर सामने आती है। लेकिन जून से अगस्त 2026 के आंकड़े बताते हैं कि शहर में फायर ब्रिगेड की भूमिका अब सिर्फ आग बुझाने तक सीमित नहीं रह गई है। मुंबई फायर ब्रिगेड के आंकड़ों के मुताबिक, तीन महीनों में कुल 5,701 इमरजेंसी कॉल पर टीमों ने प्रतिक्रिया दी। इनमें 1,580 कॉल आग से जुड़ी थीं। यानी कुल कॉल का करीब 28 फीसदी हिस्सा ही वास्तविक फायर इमरजेंसी का था। इसके मुकाबले 4,121 कॉल गैर-फायर घटनाओं से संबंधित थीं, जो कुल का करीब 72 फीसदी है।
इन गैर-फायर मामलों में 2,565 ‘अन्य सेवाओं’, 1,391 रेस्क्यू सेवाओं और 165 हाउस-कॉलैप्स की घटनाएं शामिल थीं। ‘अन्य सेवाओं’ में पेड़ गिरना, सड़क हादसे, तेल रिसाव और डूबने जैसी घटनाएं आती हैं, जबकि रेस्क्यू कॉल में इंसानों और जानवरों को पेड़, पानी, मैनहोल या अन्य खतरनाक जगहों से निकालना शामिल है।
जुलाई बना सबसे व्यस्त महीना
तीन महीनों में जुलाई सबसे ज्यादा व्यस्त रहा। इस महीने अकेले 2,688 इमरजेंसी कॉल दर्ज हुईं, जो तीन महीने के कुल मामलों का करीब 47 फीसदी है। जून में 2,007 और अगस्त में 1,006 कॉल दर्ज हुईं। रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई में मुंबई में भारी बारिश का असर भी इमरजेंसी कॉल पर दिखाई दिया तुलना करें तो जून-अगस्त 2025 में फायर ब्रिगेड को 3,432 कॉल मिली थीं। इस साल इसी अवधि में यह संख्या बढ़कर 5,701 हो गई। यानी एक साल में इस तीन महीने की अवधि के दौरान इमरजेंसी रिस्पॉन्स का दबाव काफी बढ़ा है।
पूरे साल की तस्वीर भी बदलती भूमिका दिखाती है
सितंबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच मुंबई फायर ब्रिगेड ने कुल 17,729 इमरजेंसी कॉल अटेंड कीं। इनमें 5,975 फायर, 6,457 रेस्क्यू, 4,982 अन्य सेवाएं और 315 हाउस-कॉलैप्स के मामले थे। यानी पूरे 12 महीने में भी गैर-फायर इमरजेंसी का हिस्सा करीब 66 फीसदी रहा। BMC के आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, मुंबई फायर ब्रिगेड को आग के अलावा बिल्डिंग गिरने, डूबने, सड़क और रेल हादसों, केमिकल या तेल रिसाव, बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं तथा पशु-पक्षी रेस्क्यू में भी सेवाएं देनी होती हैं।
इन आंकड़ों से साफ है कि मुंबई जैसे घनी आबादी वाले महानगर में फायर ब्रिगेड अब सिर्फ ‘फायर फाइटिंग फोर्स’ नहीं, बल्कि शहर की पहली आपदा प्रतिक्रिया व्यवस्था का अहम हिस्सा बन चुकी है। खासकर मानसून के दौरान पेड़ गिरने, जलभराव, हादसों और रेस्क्यू की घटनाएं बढ़ने से इस बल पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
