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लद्दाख में 48 हजार एकड़ जमीन पर Solar Project, चरागाह बचाने की मांग से बढ़ी चिंता
लेह/लद्दाख: लद्दाख के पांग इलाके में 13 GW के बड़े Renewable Energy Project की योजना को लेकर जमीन के इस्तेमाल का मुद्दा चर्चा में है। रिपोर्टों के मुताबिक परियोजना के लिए करीब 48,250 एकड़ जमीन इस्तेमाल की जा सकती है। स्थानीय चरवाहों और Changpa समुदाय के लोगों को चिंता है कि इससे उनके पारंपरिक चरागाह और पशुपालन पर असर पड़ सकता है। वहीं प्रशासन Renewable Energy और स्थानीय हितों के बीच संतुलन बनाने की बात कह रहा है।

लेह, लद्दाख: लद्दाख में बड़े Solar और Renewable Energy Projects के साथ जमीन के अधिकार का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। पूर्वी लद्दाख के पांग इलाके में 13 गीगावाट के Renewable Energy Project की योजना है। रिपोर्ट के अनुसार, इस परियोजना के लिए करीब 48,250 एकड़ जमीन इस्तेमाल होने की बात सामने आई है। स्थानीय चरवाहों और समुदायों को चिंता है कि परियोजना से उनके पारंपरिक चराई वाले इलाकों और रोजी-रोटी पर असर पड़ सकता है।
जमीन किसके अधिकार में है, सवाल यही
लद्दाख में 2019 में जम्मू-कश्मीर से अलग होकर केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद जमीन के अधिकार और उसके इस्तेमाल को लेकर लगातार चर्चा होती रही है। अब बड़े Renewable Energy Projects के लिए जमीन की पहचान और इस्तेमाल को लेकर यह सवाल फिर उठ रहा है कि स्थानीय जमीन पर फैसला लेने की प्रक्रिया क्या होगी और स्थानीय लोगों की भूमिका कितनी होगी।
पांग में Solar Project की बड़ी योजना
केंद्र सरकार की योजना के तहत पांग क्षेत्र में बड़े Renewable Energy Project को विकसित करने की तैयारी है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक इसमें Solar और Wind Energy के साथ Battery Storage की भी योजना शामिल है। परियोजना से पैदा होने वाली बिजली को देश के दूसरे हिस्सों तक पहुंचाने के लिए बड़ी Transmission Network भी बनाई जा रही है।
लद्दाख प्रशासन पहले भी यह कह चुका है कि Solar Project के साथ स्थानीय लोगों और खासकर Nomadic communities के पारंपरिक पशुपालन को ध्यान में रखा जाएगा। प्रशासन ने एक Solar Demonstration Project का भी उल्लेख किया है, जिसका उद्देश्य यह दिखाना था कि Solar panels के आसपास और नीचे पशुओं को चराया जा सकता है।
चरागाह की जमीन को लेकर स्थानीय चिंता
स्थानीय समुदायों का कहना है कि जिन इलाकों को परियोजनाओं के लिए चुना जा रहा है, उनमें पारंपरिक चराई वाली जमीन भी शामिल है। रिपोर्ट में Changpa nomadic communities की चिंता का उल्लेख है, जिनकी आजीविका पशुपालन और इन चरागाहों पर काफी निर्भर है। स्थानीय लोगों की मांग है कि जमीन के इस्तेमाल और परियोजना के असर से जुड़ी जानकारी उन्हें साफ तौर पर दी जाए।
सरकार ने जमीन के अधिकार पर भी कदम उठाए
इसी बीच लद्दाख प्रशासन ने सितंबर 2026 में Nautor Land Rules 2026 को मंजूरी दी है। इन नियमों के तहत Nautor जमीन के नियमितीकरण और पात्र लोगों के मालिकाना हक से जुड़े मामलों के लिए प्रक्रिया तय की गई है। प्रशासन का कहना है कि इससे वास्तविक जमीन धारकों को कानूनी स्पष्टता मिलेगी और सरकारी तथा LAHDC की जमीन को अवैध कब्जे और गलत दावों से बचाने में मदद मिलेगी।
इसके अलावा Changthang Wildlife Sanctuary में स्थानीय लोगों के जमीन, पारंपरिक इस्तेमाल और चराई के अधिकारों की जांच दोबारा शुरू की गई है। प्रशासन ने गांव स्तर पर जमीन का रिकॉर्ड तैयार करने और निजी, सामुदायिक, सरकारी तथा चरागाह जमीन की अलग-अलग पहचान करने के निर्देश दिए हैं।
Solar Energy बनाम जमीन का अधिकार
लद्दाख में Solar Energy की बड़ी क्षमता को देखते हुए सरकार इसे Renewable Energy Hub के रूप में विकसित करना चाहती है। दूसरी तरफ स्थानीय समुदाय चाहते हैं कि विकास परियोजनाओं के साथ उनकी जमीन, चरागाह और पारंपरिक जीवन पर असर को भी ध्यान में रखा जाए। इसलिए आने वाले समय में Solar Project और Land Rights का मुद्दा लद्दाख में अहम बना रह सकता है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि बड़े Renewable Energy Projects को आगे बढ़ाते समय स्थानीय समुदायों के जमीन और चराई के अधिकारों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाती है।
