असम में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की प्रस्तावित क्षेत्रीय वॉलंटियर्स मीटिंग शुरू होने से पहले ही विवाद खड़ा हो गया। रविवार को गुवाहाटी में पुलिस ने CJP के सह-संयोजक आशुतोष रांका समेत पार्टी के कई नेताओं और वॉलंटियर्स को हिरासत में लिया। यह कार्रवाई पार्टी की पहली क्षेत्रीय वॉलंटियर्स मीटिंग से कुछ समय पहले हुई। CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए दावा किया कि असम पुलिस ने रांका और उनकी टीम को हिरासत में लेकर किसी अज्ञात स्थान पर ले गई। पार्टी का कहना था कि नेता और कार्यकर्ता एक छोटी वॉलंटियर्स मीटिंग के लिए जुटे थे, लेकिन पुलिस ने कार्यक्रम स्थल तक पहुंच रोक दी।
रिपोर्टों के मुताबिक, रांका शनिवार को गुवाहाटी पहुंचे थे और रविवार को CJP कार्यकर्ताओं से मुलाकात करने वाले थे। पार्टी ने बताया कि बैठक का उद्देश्य असम और नॉर्थईस्ट में अपने वॉलंटियर नेटवर्क को मजबूत करना था। रांका ने राज्य में स्कूलों, जमीन और मतदाता सूची के मुद्दों को उठाने की बात भी कही थी। उनके बयानों में मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा पर कई आरोप लगाए गए हैं, जिन्हें रांका और CJP के दावों के रूप में देखा जाना चाहिए। CJP ने पुलिस पर कार्यकर्ताओं को बैठक में पहुंचने से रोकने और हिरासत में लेने का आरोप लगाया। पार्टी के अनुसार, 35 लोगों को हिरासत में लिया गया, जिनमें रांका, अनिकेत भारद्वाज, प्रेमाकाश गोलू और असम के पार्टी समन्वयक साहिल समेत अन्य कार्यकर्ता शामिल थे। उन्हें काहिलीपारा स्थित 10वीं असम पुलिस बटालियन परिसर ले जाने की जानकारी सामने आई।
बाद में रविवार रात रांका और अन्य हिरासत में लिए गए CJP सदस्यों को रिहा कर दिया गया। रिहाई के बाद रांका ने सोशल मीडिया पर हिरासत को लेकर अपना पक्ष रखा और कहा कि वे घटनास्थल पर प्रेस से बात करेंगे। इस पूरे मामले पर असम पुलिस का पक्ष और हिरासत के कानूनी आधार भी खबर में अलग से शामिल किया जाना जरूरी है। फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों में CJP की ओर से लगाए गए आरोप प्रमुखता से सामने आए हैं, इसलिए पुलिस कार्रवाई के कारणों को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच और आधिकारिक जानकारी के आधार पर ही निकाला जाना चाहिए।