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विधायकों से बदसलूकी पर कार्रवाई, अधिकारियों के लिए महाराष्ट्र सरकार ने तय किया प्रोटोकॉल
महाराष्ट्र सरकार ने सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए सांसदों व विधायकों के साथ व्यवहार को लेकर स्पष्ट प्रोटोकॉल तय किया है। निर्देशों में सम्मानजनक भाषा, समय पर जवाब और आधिकारिक कामकाज में उचित प्राथमिकता पर जोर दिया गया है। हालांकि, कुछ कानूनी और चुनावी परिस्थितियों में इस प्रोटोकॉल को लेकर बाद में संशोधन भी किया गया है।

महाराष्ट्र में सरकारी अधिकारियों और निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के बीच आधिकारिक संवाद को लेकर सरकार ने नियमों को स्पष्ट किया है। राज्य सरकार की ओर से नवंबर 2025 में जारी निर्देशों में कहा गया था कि सांसदों और विधायकों के साथ अधिकारियों का व्यवहार शिष्ट, सम्मानजनक और नियमों के अनुरूप होना चाहिए। इसका उद्देश्य प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच संवाद को अधिक व्यवस्थित और जवाबदेह बनाना बताया गया था।
निर्देशों के मुताबिक, किसी विधायक या सांसद के सरकारी कार्यालय पहुंचने पर अधिकारी को निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार उनका अभिवादन करना चाहिए। बातचीत के दौरान भाषा और व्यवहार में शालीनता बनाए रखने तथा उनकी ओर से उठाए गए प्रशासनिक मुद्दों को ध्यान से सुनने पर भी जोर दिया गया। फोन पर बातचीत में भी सम्मानजनक भाषा के इस्तेमाल का निर्देश दिया गया था।
पत्रों और कामकाज के लिए भी समयबद्ध व्यवस्था
सरकार के दिशा-निर्देश केवल शिष्टाचार तक सीमित नहीं हैं। सांसदों और विधायकों की ओर से भेजे जाने वाले पत्रों तथा जनहित से जुड़े मामलों पर समय पर जवाब देने की व्यवस्था पर भी जोर दिया गया है। रिपोर्टों के अनुसार, संबंधित विभागों को ऐसे पत्रों का रिकॉर्ड रखने और निर्धारित समयसीमा में जवाब देने के निर्देश दिए गए थे। अगर किसी मामले में तय समय में पूरा जवाब देना संभव न हो, तो संबंधित जनप्रतिनिधि को देरी का कारण और आगे की कार्रवाई की जानकारी देने की व्यवस्था भी बताई गई।
इसके अलावा सरकारी कार्यक्रमों में स्थानीय सांसदों और विधायकों को आमंत्रित करने, निमंत्रण पत्र में उनका नाम शामिल करने और प्रोटोकॉल के मुताबिक बैठने की व्यवस्था करने पर भी जोर दिया गया।
नियम तोड़ने पर कार्रवाई, लेकिन ‘सीधी कार्रवाई’ का दावा कितना सही?
यहां एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि उपलब्ध रिपोर्टों में नियमों के उल्लंघन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी का उल्लेख है। वहीं महाराष्ट्र के सरकारी सेवा संबंधी कानून में जानबूझकर देरी, लापरवाही या कर्तव्य में चूक को अनुशासनात्मक कार्रवाई का आधार माना गया है। इसलिए हर असम्मानजनक व्यवहार के मामले में स्वतः तत्काल कार्रवाई होगी, ऐसा कहना सही नहीं होगा; कार्रवाई संबंधित नियम और मामले की प्रकृति के अनुसार होगी।
2026 में प्रोटोकॉल में आया अहम बदलाव
इस पूरे मामले का एक और महत्वपूर्ण पहलू अप्रैल 2026 का संशोधन है। महाराष्ट्र सरकार ने नवंबर 2025 के निर्देशों में बदलाव करते हुए स्पष्ट किया कि अगर कोई जनप्रतिनिधि किसी आपराधिक या अन्य मामले में दोषी ठहराया जा चुका है, किसी जांच या सुनवाई में पक्षकार के रूप में उपस्थित है, या चुनावी प्रक्रिया जैसे नामांकन और जांच के सिलसिले में सरकारी कार्यालय पहुंचता है, तो अधिकारी के लिए खड़े होकर अभिवादन करना अनिवार्य नहीं होगा। ऐसे मामलों में अधिकारी को कानून और परिस्थितियों के अनुसार निष्पक्ष व्यवहार करना होगा।
यानी महाराष्ट्र सरकार का मौजूदा प्रोटोकॉल दो बातों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करता है—जनप्रतिनिधियों के पद का संस्थागत सम्मान और संवेदनशील कानूनी या चुनावी मामलों में प्रशासनिक निष्पक्षता। महाराष्ट्र के सामान्य प्रशासन विभाग की वेबसाइट पर राज्य के सेवा और अनुशासन संबंधी नियम भी उपलब्ध हैं।
