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महाराष्ट्र धुले के साक्री में फसलें सूखीं, 67 दिन बारिश नहीं होने से फसलें बर्बाद
धुले: महाराष्ट्र के साक्री तालुका में मानसून के बाद लंबे dry spell ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। 102 दिनों में 67 दिन बारिश नहीं हुई और अगस्त-सितंबर में बारिश सामान्य से काफी कम रही। इससे मक्का, सोयाबीन, मूंगफली, कपास और दूसरी खरीफ फसलों पर असर पड़ा है। राज्य के कई तालुके सूखा प्रभावित घोषित किए जाने के बीच फसल नुकसान का पंचनामा शुरू किया जा रहा है।

धुले: महाराष्ट्र के धुले जिले के साक्री तालुका में इस साल मानसून के बाद लंबे समय तक बारिश नहीं होने से किसानों की परेशानी बढ़ गई है। शुरुआती बारिश के बाद किसानों ने उम्मीद के साथ खरीफ की बुवाई की थी, लेकिन बाद में लंबे dry spell ने फसलों को नुकसान पहुंचाया। 29 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक, साक्री में 1 जून से 11 सितंबर के बीच 102 दिनों में 67 दिन बारिश नहीं हुई, जबकि लगातार 22 दिनों तक बारिश नहीं हुई थी।
साक्री में कुल मौसमी बारिश सामान्य स्तर के आसपास रही, लेकिन बारिश का समय और अंतराल किसानों के लिए बड़ी समस्या बन गया। कृषि विभाग के अनुसार अगस्त और सितंबर में तालुका में औसत बारिश का करीब 50 फीसदी ही दर्ज हुआ। बारिश की कमी से खेतों में नमी घट गई और खरीफ फसलों की बढ़वार प्रभावित हुई।
साक्री के कई गांवों में मक्का, सोयाबीन, मूंगफली, बाजरा, कपास, प्याज और दालों की खेती प्रभावित हुई है। किसानों के मुताबिक मूंगफली जैसी फसलों में दाने पूरी तरह विकसित नहीं हो पाए, जबकि कपास और दूसरी फसलों पर भी सूखे का असर पड़ा है। लंबे dry spell के कारण अब रबी सीजन की बुवाई के लिए खेतों में पर्याप्त नमी नहीं बची है।
265 तालुके सूखा प्रभावित घोषित
महाराष्ट्र सरकार ने हाल ही में राज्य के 358 में से 265 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया है। यह फैसला Drought Management Code के तहत लिया गया है। सरकार के अनुसार, राज्य में 1 जून से 26 सितंबर के बीच सामान्य 970.9 मिमी के मुकाबले 798.2 मिमी बारिश हुई, यानी करीब 18 फीसदी बारिश की कमी रही।
सूखा प्रभावित क्षेत्रों में भूमि राजस्व में राहत, फसल ऋण के पुनर्गठन और कृषि ऋण की वसूली पर रोक जैसे उपाय लागू किए जाएंगे। फसल नुकसान का वास्तविक मुआवजा तय करने के लिए खेतों का सर्वे और पंचनामा किया जा रहा है।
कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे के मुताबिक, महाराष्ट्र में फसल नुकसान के पंचनामे 29 सितंबर से शुरू किए जा रहे हैं। सरकार ने सूखा प्रभावित इलाकों में पशुओं के लिए चारा शिविर लगाने की भी योजना बताई है।
साक्री की स्थिति यह दिखाती है कि केवल कुल बारिश का आंकड़ा ही खेती की स्थिति तय नहीं करता। बारिश के बीच लंबा अंतराल और मिट्टी में नमी की कमी भी फसल उत्पादन पर बड़ा असर डाल सकती है।
