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महाराष्ट्र में पानी का भंडार घटा, 75% रह गया; मराठवाड़ा में हालात ज्यादा चिंताजनक

महाराष्ट्र में पिछले कुछ हफ्तों से बारिश कम होने के कारण बांधों में पानी की आवक प्रभावित हुई है। राज्य में इस समय करीब 75% जल भंडार है, जबकि पिछले साल यह करीब 88% था।

Neha Sharma29 सित. 2026, 08:09 PM IST
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महाराष्ट्र में पानी का भंडार घटा, 75% रह गया; मराठवाड़ा में हालात ज्यादा चिंताजनक

महाराष्ट्र: राज्य में मानसून की विदाई से पहले बारिश की कमी का असर अब बांधों के जल भंडार पर भी साफ दिखाई दे रहा है। पिछले कुछ हफ्तों से कई इलाकों में बारिश कम होने के कारण बांधों में पानी की आवक लगभग रुक गई है। 28 सितंबर तक राज्य के छह क्षेत्रों के प्रमुख, मध्यम और छोटे बांधों में कुल जल भंडार करीब 75% दर्ज किया गया, जबकि पिछले साल इसी तारीख के आसपास यह आंकड़ा करीब 88% था। यानी पिछले साल की तुलना में करीब 13% की कमी है।


मराठवाड़ा में सबसे ज्यादा कमी

मराठवाड़ा की स्थिति सबसे ज्यादा चिंता वाली बनी हुई है। छत्रपति संभाजीनगर क्षेत्र के बांधों में इस समय करीब 45% पानी है, जबकि पिछले साल सितंबर के अंत में यह करीब 81% था। यानी यहां पिछले साल के मुकाबले करीब 35 प्रतिशत अंकों की कमी दर्ज की गई है। विदर्भ के कुछ हिस्सों में भी पानी का भंडार पिछले साल से काफी कम है। अमरावती क्षेत्र में कमी करीब 22% बताई गई है, जबकि नागपुर क्षेत्र के बांधों में करीब 71% पानी है, जो पिछले साल के 87% के मुकाबले कम है।


पुणे, नासिक और कोंकण में स्थिति बेहतर

राज्य के सभी हिस्सों में हालात एक जैसे नहीं हैं। पुणे, नासिक और कोंकण क्षेत्र के बांधों में पानी की स्थिति फिलहाल तुलनात्मक रूप से बेहतर है। हालांकि, इन क्षेत्रों में भी पिछले साल के मुकाबले करीब 2 से 5% कम पानी दर्ज किया गया है। पुणे के बांधों में जुलाई के दौरान अच्छी बारिश से जल स्तर काफी बढ़ा था, लेकिन अगस्त और सितंबर में अच्छी बारिश के लंबे दौर नहीं आए।


जयकवाड़ी में रोज तेजी से घट रहा पानी

मराठवाड़ा के सबसे महत्वपूर्ण जयकवाड़ी बांध पर भी गर्मी और कम बारिश का असर दिख रहा है। सितंबर में बांध से पानी के वाष्पीकरण की मात्रा सामान्य से काफी ज्यादा रही। रिपोर्ट के मुताबिक, जयकवाड़ी से रोज औसतन करीब 1.3 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी वाष्पीकरण के कारण कम हो रहा है। यह स्थिति इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि जयकवाड़ी छत्रपति संभाजीनगर, जालना और आसपास के इलाकों के लिए पीने के पानी, खेती और उद्योगों का बड़ा स्रोत है।


आगे पानी की स्थिति पर नजर

कम बारिश और मानसून की विदाई के बीच जल संसाधन विभाग बांधों के पानी के स्तर पर लगातार नजर रख रहा है। खासकर मराठवाड़ा और विदर्भ में आने वाले महीनों के लिए पानी का प्रबंधन चुनौती बन सकता है। राज्य के कुल 3,032 प्रमुख, मध्यम और छोटे बांधों के जल भंडार पर विभाग की निगरानी है।