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अहमदाबाद में 73 साल के रिटायर्ड प्रोफेसर से ₹16.18 लाख की साइबर ठगी, पुलिस-ATS बनकर डराया

अहमदाबाद के सिंगारवा में 73 वर्षीय सेवानिवृत्त प्रोफेसर साइबर ठगी का शिकार हो गए। ठगों ने खुद को पुलिस और ATS अधिकारी बताकर प्रोफेसर को चाइल्ड पोर्नोग्राफी और करोड़ों रुपये के अवैध लेनदेन के मामले में फंसाने की धमकी दी। वीडियो कॉल के जरिए लगातार निगरानी का दावा करते हुए जांच के नाम पर उनसे कुल ₹16.18 लाख RTGS के जरिए ट्रांसफर करा लिए। बाद में ठगों ने RBI की फर्जी रसीद और NIA के नाम से फर्जी NOC भी भेजी। ठगी का एहसास होने पर प्रोफेसर ने साइबर क्राइम पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

Kashish Rai29 सित. 2026, 08:39 PM IST
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अहमदाबाद में 73 साल के रिटायर्ड प्रोफेसर से ₹16.18 लाख की साइबर ठगी, पुलिस-ATS बनकर डराया

अहमदाबाद के सिंगारवा इलाके में साइबर ठगी का एक मामला सामने आया है। यहां 73 वर्षीय सेवानिवृत्त प्रोफेसर को ठगों ने पुलिस और ATS अधिकारी बनकर निशाना बनाया। आरोपियों ने उन्हें गंभीर अपराधों में फंसाने की धमकी देकर इतना डराया कि जांच के नाम पर उनके बैंक खाते से 16 लाख 18 हजार 300 रुपये ट्रांसफर करा लिए। प्रोफेसर के मुताबिक, 29 अगस्त को उन्हें चिराग रावत नाम के व्यक्ति का फोन आया। उसने खुद को बनारस पुलिस मुख्यालय का अधिकारी बताया। फोन करने वाले ने दावा किया कि प्रोफेसर का मोबाइल नंबर आधार कार्ड से जुड़ा है और इसी नंबर का इस्तेमाल कर बैंक खाता खोला गया है, जिसमें करोड़ों रुपये का अवैध लेनदेन हुआ है।


ठगों ने प्रोफेसर को यह भी बताया कि उनके नाम से चाइल्ड पोर्नोग्राफी और अवैध जुए से जुड़ा मामला सामने आया है। इस तरह की बात सुनकर प्रोफेसर घबरा गए। इसके बाद प्रेम गौतम नाम के एक व्यक्ति ने उन्हें WhatsApp वीडियो कॉल किया। वह पुलिस की वर्दी में दिखाई दिया और खुद को ATS का इंस्पेक्टर बताया। आरोपियों ने प्रोफेसर को गिरफ्तारी की धमकी दी। हालांकि, उनकी उम्र अधिक होने का हवाला देते हुए ठगों ने कहा कि उनकी जांच घर बैठे वीडियो कॉल के जरिए की जा सकती है। इसके बाद उन्हें किसी से भी घटना के बारे में बात न करने के लिए कहा गया। ठग लगातार वीडियो और फोन कॉल के जरिए संपर्क में रहे और उन पर नजर रखने का दावा करते रहे।


31 अगस्त को आरोपियों ने प्रोफेसर से उनके अलग-अलग बैंक खातों की जानकारी और बैंक स्टेटमेंट मांगे। इसके अगले दिन यानी 1 सितंबर को जांच के नाम पर बैंक खाते में मौजूद रकम की जांच RBI से कराने की बात कही गई। ठगों ने भरोसा दिलाया कि जांच पूरी होने के बाद रकम वापस कर दी जाएगी। उनकी बातों में आकर प्रोफेसर ने RTGS के जरिए बताए गए बैंक खाते में ₹11,03,000 ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद 2 सितंबर को उनसे दोबारा ₹5,15,300 ट्रांसफर करवाए गए। इस तरह आरोपियों ने कुल ₹16,18,300 अपने बताए खातों में जमा करा लिए। पैसे लेने के बाद ठगों ने प्रोफेसर को भरोसे में रखने के लिए RBI के नाम से एक फर्जी रसीद भी WhatsApp पर भेजी। 5 सितंबर को दूसरे WhatsApp नंबर से प्रेम गौतम के नाम पर दोबारा संपर्क किया गया और जांच जारी होने की बात कही गई।


इसके बाद 9 सितंबर को ठगों ने दावा किया कि जांच पूरी हो गई है और NIA के नाम से एक फर्जी NOC भी भेज दी। कुछ समय बाद जब प्रोफेसर ने आरोपियों के मोबाइल नंबरों पर संपर्क करने की कोशिश की तो किसी ने फोन नहीं उठाया। इसके बाद उन्हें समझ आया कि वह साइबर ठगी का शिकार हो चुके हैं। प्रोफेसर ने पूरी घटना अपनी पत्नी और बेटे को बताई और इसके बाद साइबर क्राइम पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस अब आरोपियों द्वारा इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबरों, बैंक खातों, वीडियो कॉल और पैसों के लेनदेन से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है।